बांग्लादेश: 1971 के युद्ध अपराधों का दोषी जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ता गिरफ्तार, सुनाई गई थी मौत की सजा
आरएबी ने एक बयान में बताया कि अली1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान जमात-ए-इस्लामी का कार्यकर्ता था। तब वह गैबंधा (उत्तर-पश्चिमी इलाका) में सामूहिक हत्याओं, आगजनी, दुष्कर्म और लूटपाट की घटनाओं में शामिल था।
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बांग्लादेश के सुरक्षा बलों ने जमात-ए-इस्लामी के एक कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया है, जो बीते एक दशक से फरार चल रहा था। एक न्यायाधिकरण ने उसकी गैरमौजूदगी में उसे 1971 में मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध करने का दोषी ठहराया था और उसे मौत की सजा सुनाई गई थी।
अपराध रोधी 'रैपिड एक्शन बटालियन' (आरएबी) की एक टीम गोपनीय सूचना के आधार पर शनिवार को ढाका के बाहरी देमरा इलाके पहुंची, जहां से उसने अबू मुस्लिम मोहम्मद अली (70 वर्षीय) को गिरफ्तार किया।
आरएबी ने एक बयान में बताया कि अली1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान जमात-ए-इस्लामी का कार्यकर्ता था। तब वह गैबंधा (उत्तर-पश्चिमी इलाका) में सामूहिक हत्याओं, आगजनी, दुष्कर्म और लूटपाट की घटनाओं में शामिल था।
न्यायाधिकरण ने 2017 में सुनाई गई थी मौत की सजा
दरअसल, मुक्ति संग्राम के दौरान अत्याचारों के पीड़ितों में से एक की शिकायत पर अबू के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी। लेकिन वह 2013 में कहीं छिप गया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 2017 में उसकी गैरमौजूदगी में उसे मौत की सजा सुनाई थी।
लो प्रोफाइल बनकर झुग्गी जैसे घर में रह रहा था अली
आरएबी के लेफ्टिनेंट कर्नल आरिफ मोहिउद्दीन अहमद ने कहा, हमने उसे झुग्गी जैसे घर से गिरफ्तार किया है, जहां वह लो प्रोफाइल बनकर रह रहा था। अहमद ने कहा, अली जमात-ए-इस्लामी की तत्कालीन छात्र शाखा इस्लामिक छात्र संघ का सक्रिय सदस्य था। वह ट्रिब्यूनल के समक्ष कभी पेश नहीं हुआ।
आरएबी ने मोहम्मदपुर और मुग्धा इलाकों में की छापेमारी
आरएबी ने ढाका के मोहम्मदपुर और मुग्धा इलाकों में अलग-अलग छापेमारी की, जहां युद्ध अपराध के अपराधी अली को गिरफ्तार किया गया। दस दिन पहले युद्ध अपराध के दो अन्य दोषियों को भी गिरफ्तार किया गया था। उनमें से एक जसीसर रहमान ( 69 वर्षीय) था, जबकि दूसरा लगभग इसी उम्र का अब्दुल वाहिद था। दोनों को मानवता के खिलाफ अपराध करने के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी।
इसी माह जमात का एक और कार्यकर्ता हुआ था गिरफ्तार
एक फरवरी को आरएबी ने दक्षिण-पश्चिम मदारीपुर से जमात के कार्यकर्ता अब्दुल माजिद (70 वर्षीय) को पूर्वोत्तर नेत्रोकोना में अत्याचार करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरएबी ने कहा कि गिरफ्तार किए गए सभी दोषी फरार हैं। 26 मार्च, 1971 को बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) ने पश्चिमी पाकिस्तान से अपनी आजादी की घोषणा की थी।
पाकिस्तानी सेना ने की थी 30 लाख बांग्लादेशी लोगों की हत्या
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, नौ महीने के खूनी गुरिल्ला युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने स्थानीय सहयोगियों (बांग्लादेश के) की सहायता से अनुमानित 30 लाख लोगों की हत्या कर दी थी, करीब 2 लाख महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया और लाखों लोगों को अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर किया था।
50 से ज्यादा फैसले दे चुके न्यायाधिकरण, छह को मिली फांसी
प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने मुक्ति संग्राम के दौरान जघन्य या भीषण अपराधों के अपराधियों और उनके सहयोगियों को न्याय के कटघरे में लाने की पहल की थी। इसके लिए 2010 में न्यायाधिकरण बनाया गया। यह न्यायाधिकरण तब से अब तक पचास से ज्यादा फैसले दे चुका है। छह दोषियों को उनकी अपील, पुनर्विचार याचिका और दया याचिकाओं को खारिज करने के बाद फांसी दी गई।