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'वंडर ड्रग’ बना मेंढक का जहर कंबो, मनोवैज्ञानिक आघात का दर्द कम होने का दावा
Mon, 04 Jan 2021 02:34 AM IST
Jeet Kumar
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, न्यूयॉर्क सिटी।
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, न्यूयॉर्क सिटी।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 04 Jan 2021 02:34 AM IST
सार
- अमेजन के वर्षावन की औषधि बड़ी कंपनियों के प्रोफेशनल्स में हो रही लोकप्रिय
- शरीर के जहर मुक्त होने से लेकर मनोवैज्ञानिक आघात का दर्द कम होने का दावा कर रहे इसे लेने वाले
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मेढ़क (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
पहली बार कंबो लेने वाले को अगले 60 सेकंड में तेज बुखार या बड़ी एलर्जी का अनुभव होता है। इसके बाद वह खुद को फूलता हुआ घिनौना महसूस करता है। भयंकर उल्टी आने जैसा महसूस होता, उल्टी होती भी है।
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इससे लेने वाले को लगता है जैसे न केवल उसके शरीर में जमा हुए जहरीले तत्व साफ हो गए, बल्कि जेहन में बसे मनोवैज्ञानिक आघात भी खत्म हो गए। यही अनुभव अमेजन के वर्षा वन के एक मेढ़क से मिलने वाले जहर कंबो को वंडर ड्रग की तरह लोकप्रिय बना रहा है।
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एक तकनीकी कंपनी में कार्यरत 39 साल की मीडिया स्ट्रैटजिस्ट जुलिया एलिसन कंबो लेना अपने जीवन को सबसे भयावह अनुभव बताती हैं, लेकिन जल्द ही इसे फिर महसूस भी करना चाहती हैं।
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दक्षिण अमेरिका के वर्षा वन की जनजातियों द्वारा कंबो किसी टीके की तरह उपयोग की जाती है, लेकिन अब यह सेनफ्रांसिस्को जैसे शहरों और कई देशों में नए जमाने के अमीरों व बड़ी कंपनियों के प्रोफेशनल्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
मेंढक की त्वचा से आता है जहर
कंबो एक गोंद जैसा जहर है, जो जायंट मंकी फ्रॉग की त्वचा पर मिलता है। सरीसृप विज्ञानी इस मेंढक को ‘फाइलोमेडूसा बाइकलर’ के नाम से जानते हैं। यह जहर कई जनजातियां बीमारियां व दुर्भाग्य मिटाने और शारीरिक दमखम बढ़ाने में उपयोग करती हैं।
अमेजन वर्षा वन में इन मेंढक को उनकी आवाज से तलाशा जाता है, पकड़कर आग के पास रखते हैं, ताकि वह घबराए और जहर निकाले। उसकी त्वचा में सूइयां घुसाकर जहर निकाला जाता है। इसे लेने के लिए व्यक्ति की कोहनी, कंधे, टखने आदि की त्वचा के छोटे हिस्से को जलते कोयले से दागा जाता है। इससे बने फफोले को हटाकर वहां मेंढक के जहर में डूबी सुई रख दी जाती है।
11 हजार की एक सुई
कंबो के लिए कई शहरों में आयोजन हो रहे हैं। इसकी एक सुई करीब 11 हजार रुपये की है। इसे देने से पहले व्यक्ति को तीन दिन बिना शराब, मांस, चीनी, डेयरी आदि चीजों के रखा जाता है। कंबो देने के ठीक पहले भी कुछ औषधियां दी जाती हैं।
कई देशों में कंबो ट्रीटमेंट देने वालों को प्रशिक्षण व सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं। नीदरलैंड में एक प्राइवेट एजेंसी द्वारा 2014 से अब तक 400 लोगों को कंबो प्रशिक्षक घोषित किया गया है।
अनुभव 15 से 40 मिनट का
कंबो लेने के बाद व्यक्ति को लगातार पानी दिया जाता है। वह 15 से 40 मिनट लगातार उल्टियां कर सकता है। इसे लेने वाले दावा करते हैं कि इस प्रक्त्रिस्या में उनके शरीर से कई जहरीले तत्व खत्म होते हैं।
कई लोग असफलता, तलाक के अवसाद से लेकर काम और जीवन में हुए हादसों के तनाव से मुक्त महसूस करने का दावा भी करते हैं। भावनात्मक भार और यादों से लगाव भी खत्म होता पाते हैं।
वैज्ञानिक अध्ययन नहीं, इसलिए असुरक्षित, मौत भी हो रहीं
2010 में ब्राजील के विभिन्न प्रोफसरों द्वारा किए गए अध्ययन में फाइलोमेडूसा मेढ़क के जहर को एंटीमाक्त्रसेबियल, हार्मोनल और न्यूरो एक्टिविटी को बूस्ट करने वाला माना गया। हालांकि विस्तृत शोध नहीं होने से फ्लोरिडा मेयो क्लीनिक के निदेशक एडम पर्लमैइन इसे सुरक्षित नहीं मानते।
विटन विश्वविद्यालय जर्मनी के मॉलिक्यूलर फार्माकोलॉजी के प्रोफेसर एम कैपल हेजेलिंक के अनुसार कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कंबो से व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करवाया गया, कुछ की मौत भी हुई। इसकी वजह गलत मेंढक का जहर, ज्यादा पानी पीना और हृदय रोग भी हो सकते हैं।