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France: आखिर क्यों फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों नई सरकार के बारे में फैसला करने का करेंगे इंतजार, जानें वजह

Mon, 08 Jul 2024 07:57 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: काव्या मिश्रा Updated Mon, 08 Jul 2024 07:57 AM IST
सार

फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को कहा कि मैक्रों का ध्यान फिलहाल चुनाव परिणामों के विश्लेषण पर है और वह कोई भी फैसला लेने से पहले संसद में पूरी तस्वीर सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।
 

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French President Macron will 'wait' to make decision about new government news in hindi
इमैनुएल मैक्रों - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

संसदीय चुनावों के दूसरे दौर के प्रारंभिक परिणामों की घोषणा के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय का बयान सामने आया है। उसका कहना है कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों नई सरकार के बारे में फैसला लेने के लिए इंतजार करेंगे।

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लोगों की पसंद का करेंगे सम्मान
फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय एलिसी पैलेस का कहना है, 'हमारे संस्थानों की जिम्मेदारी लेने वाले के रूप में राष्ट्रपति यह सुनिश्चित करेंगे कि फ्रांसीसी लोगों की पसंद का सम्मान किया जाए। गणतंत्रीय परंपरा को ध्यान में रखते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला लेने से पहले नई नेशनल असेंबली के गठन का इंतजार करेंगे। मैक्रों आने वाले परिणामों पर सावधानीपूर्वक विचार कर रहे हैं।'
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फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को कहा कि मैक्रों का ध्यान फिलहाल चुनाव परिणामों के विश्लेषण पर है और वह कोई भी फैसला लेने से पहले संसद में पूरी तस्वीर सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।
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न्यू पॉपुलर फ्रंट की सफलता
संसदीय उपचुनाव में न्यू पॉपुलर फ्रंट की सफलता ने उन्हें अग्रणी ताकत बना दिया है, हालांकि वे पूर्ण बहुमत से पीछे रह गए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह परिणाम फ्रांस में चल रही राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाता है, जहां किसी भी एक गठबंधन को स्वतंत्र रूप से शासन करने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं मिल रही हैं।

इस बीच, फ्रांस के प्रधानमंत्री गैब्रियल अट्टल ने अपने इस्तीफे की घोषणा की है।

जॉर्डन बार्डेला ने मैक्रों की आलोचना की
चुनाव परिणामों ने फ्रांसीसी राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा। जॉर्डन बार्डेला के नेतृत्व वाली नेशनल रैली ने मैक्रों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मैक्रों कथित तौर पर फ्रांस को अनिश्चितता और अस्थिरता में धकेल रहे हैं। इसके अलावा बार्डेला ने अनुमानित परिणामों से कम सीटें मिलने पर निराशा भी व्यक्त की।

फ्रांस में त्रिशंकु सरकार बनने की संभावना
फ्रांस में रविवार को संसदीय चुनाव के दूसरे चरण के लिए वोटिंग हुई। रुझानों में अप्रत्याशित रूप से एकजुट हुए वामपंथी गठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही है, जोकि राष्ट्रपति मैक्रों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। वहीं, रुझानों में मैक्रों का मध्यमार्गी गठबंधन दूसरे और धुर दक्षिणपंथी तीसरे स्थान पर रहने का अनुमान है। किसी भी एक गठबंधन को बहुमत मिलता दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति मैक्रों को अभूतपूर्व परिस्थितियों का सामना करते हुए धुर-दक्षिणपंथियों के साथ सत्ता साझा करनी पड़ सकती है। वहीं, विशेषज्ञों ने त्रिशंकु सरकार बनने की भी संभावना जताई है। राष्ट्रपति मैक्रों ने सबको चौंकाते हुए समय से तीन साल पहले आकस्मिक चुनाव का एलान किया था, लेकिन इसका असर उल्टा होता दिख रहा है।

मतगणना जारी

चुनाव संपन्न होने के बाद मतगणना जारी है। चुनाव परिणाम सोमवार यानी आज आने की उम्मीद है। फ्रांस की संसद का कार्यकाल 2027 में खत्म होना था, लेकिन यूरोपीय संघ में 9 जून को अपनी पार्टी रेनेसां की बड़ी हार के बाद राष्ट्रपति मैक्रों ने समय पूर्व संसद भंग कर बड़ा जोखिम लिया है। 30 जून को पहले दौर के चुनाव में मरीन ली पेन की नेशनल रैली को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली थी। उनकी पार्टी को सबसे ज्यादा 35.15 प्रतिशत वोट मिले, जबकि 27.99 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे नंबर पर वामपंथी न्यू पॉपुलर फ्रंट गठबंधन रहा। मैक्रों की रेनेसां पार्टी सिर्फ 20.76 फीसदी वोट हासिल कर सकी। दूसरे दौर के लिए सिर्फ वही प्रत्याशी मैदान में हैं, जिन्हें पहले चरण में 12.5 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले हैं।


 

फ्रांस में संसदीय चुनावों के लिए इस बार 4.9 करोड़ से ज्यादा मतदाता पंजीकृत हैं। मतदाताओं को नेशनल असेंबली के लिए 577 सदस्यों का चुनाव करना है। नेशनल असेंबली फ्रांस की संसद का प्रभावशाली निचला सदन है, जिसमें बहुमत के लिए 289 सीटें जीतना जरूरी है। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, स्थानीय समयानुसार दोपहर तक 26.63 प्रतिशत मतदाता वोट डाल चुके थे। फ्रांस के संसदीय चुनाव में मतदान का नया रिकॉर्ड बना है। रात 8 बजे मतदान की समाप्ति से तीन घंटे पहले 59.71 प्रतिशत लोग मतदाधिकार का प्रयोग कर चुके थे, जो वर्ष 1981 के बाद सबसे अधिक मतदान है।

 

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