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खतरे में है अमेरिकी लोकतंत्र: फ्रीडम हाउस ने चेताया, इंडेक्स में दस वर्ष में 11 पायदान की गिरावट

Tue, 23 Mar 2021 05:09 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 23 Mar 2021 05:09 PM IST
सार

फ्रीडम हाउस ने इस बारे में अपनी नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है। विश्लेषकों का कहना है कि 15 साल के भीतर यह पहला मौका है कि अमेरिकी सरकार की वित्तीय मदद से चलने वाली इस संस्था ने अमेरिका के अंदर लोकतंत्र के हाल पर ध्यान दिया है...

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'Freedom House had dropped the status of American democracy on its index in a recently released report
कैपिटल हिल में हुई हिंसा - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

अमेरिका में मतदान से संबंधित नियमों को बदलने को लेकर लगी होड़ से अमेरिकी लोकतंत्र के लिए चुनौतियां ख़ड़ी हो रही हैं। ये चेतावनी फ्रीडम हाउस नाम की संस्था ने दी है। फ्रीडम हाउस दुनिया में लोकतंत्र से संबंधित ट्रेंड पर नजर रखती है। वह हर साल डेमोक्रेसी और स्वतंत्रता के स्तर के आधार पर अपनी रिपोर्ट और सूचकांक जारी करती है। अब फ्रीडम हाउस ने अमेरिका के निर्वाचित प्रतिनिधियों से कहा है कि मतदान के रास्ते में खड़ी की जा रही नई रुकावटों को वे खारिज कर दें, ताकि नस्लीय अल्पसंख्यकों के मताधिकार की रक्षा हो सके।

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फ्रीडम हाउस ने इस बारे में अपनी नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है। विश्लेषकों का कहना है कि 15 साल के भीतर यह पहला मौका है कि अमेरिकी सरकार की वित्तीय मदद से चलने वाली इस संस्था ने अमेरिका के अंदर लोकतंत्र के हाल पर ध्यान दिया है। जबकि बीते 15 सालों में वह सिर्फ बाकी दुनिया में लोकतंत्र की स्थिति का अध्ययन करती रही थी। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि फ्रीडम हाउस ने हाल में जारी रिपोर्ट में अपने सूचकांक पर अमेरिकी लोकतंत्र का दर्जा गिरा दिया था। जबकि वो रिपोर्ट छह जनवरी को कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद भवन) पर धावा बोले जाने की घटना के पहले के अध्ययन के आधार पर जारी की गई थी।
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वेबसाइट एक्सियोस.कॉम के मुताबिक ताजा रिपोर्ट की लेखक सराह रेपुची ने दलील दी है कि अमेरिका में ब्लैक और मूलवासी समुदायों के लोगों के साथ राजनीतिक मामलों में असमान व्यवहार होता है। यह अमेरिकी लोकतंत्र की सबसे बड़ी खामियों में एक है। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका में जिस तरह का क्षय हाल में देखा गया है, उससे ये जाहिर होता है कि अमेरिकी लोकतंत्र खतरे में है, जिस पर तुरंत ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
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गौरतलब है कि रिपब्लिकन पार्टी के शासन वाले राज्यों में 2020 में मतदान की राह में रुकावटें डालने वाली अनगिनत शर्तें लगाई गईं। इस साल कई राज्यों में उन शर्तों को और भी सख्त बना दिया गया है। इन शर्तों को हटाने और मताधिकार को विस्तृत करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने हाल में एक बिल पारित किया है।

इस सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है। लेकिन इस बिल के सीनेट में पास होने की संभावना नहीं है। रिपब्लिकन पार्टी इस बिल पर फिलिबस्टर नियम लागू करने पर आमादा है। उस हाल में उसे पास कराने के लिए 100 सदस्यों वाले सदन में 60 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी। डेमोक्रेटिक पार्टी के पास सिर्फ 50 सीनेटर हैं।

अब फ्रीडम हाउस ने दोनों पार्टियों के सदस्यों से अपील की है कि वे दलगत हितों से ऊपर उठ कर वोटिंग प्रक्रिया को दुरुस्त करने के कदम उठाएं। फ्रीडम हाउस ने ध्यान दिलाया है कि उसके इंडेक्स पर पिछले एक दशक में अमेरिका 94वें स्थान से गिर कर 83वें नंबर पर आ चुका है। यानी दस वर्ष में कुल 11 पायदान की गिरावट आई है। इस कारण अब अमेरिका आजाद देशों की श्रेणी के उच्च से मध्य स्तर पर आ गया है। गौरतलब है कि फ्रीडम हाउस उन देशों को पूर्ण स्वतंत्र मानता है, जो उसके सूचकांक पर 100 से 62वें स्थान तक आते हैँ।


फ्रीडम हाउस ने कहा है कि अमेरिकी लोकतंत्र को सुरक्षित बनाने के लिए मताधिकार को विस्तृत करने के अलावा राजनीति पर धन के प्रभाव को घटाने, राजनीतिक ध्रुवीकरण की समस्या को हल करने और देश के अंदर बढ़ रहे उग्रवाद को खत्म करने की जरूरत है। गौरतलब है कि ये तमाम प्रवृत्तियां पिछले दस साल के अंदर अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था पर हावी होती गई हैं। 

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