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बिखर रही दुनिया किसी के हित में नहीं- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

Sat, 28 Sep 2019 12:08 AM IST
संदीप भट्ट यू एन, हिंदी समाचार
यू एन, हिंदी समाचार Published by: संदीप भट्ट Updated Sat, 28 Sep 2019 12:08 AM IST
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Fragmented world is in interest of none, says PM Modi at UN General Assembly
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा है कि विश्व का स्वरूप बदल रहा है और गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। विश्व का बिखराव किसी के हित में नहीं है इसलिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए समरसता, विश्व बंधुत्व, विश्व कल्याण और शांति का संदेश है जो संयुक्त राष्ट्र का भी ध्येय रहा है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महासभा की जनरल डिबेट को संबोधित करते हुए ध्यान दिलाया कि 21वीं सदी की आधुनिक तकनीकें, सामाजिक जीवन, निजी जीवन, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से आज विश्व का स्वरूप बदल रहा है।
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“इन परिस्थितियों में एक बिखरी हुई दुनिया किसी के हित में नहीं है। ना ही हम सभी के पास अपनी-अपनी सीमाओं के भीतर सिमट जाने का विकल्प है।” इन चुनौतियों से निपटने में बहुपक्षवाद की अहमियत पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इस नए दौर में बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र को नई शक्ति और नई दिशा देनी ही होगी।
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उन्होंने कहा कि यह एक विशेष समय है क्योंकि पूरा विश्व महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है और सत्य और अहिंसा का उनका संदेश विश्व की शांति और प्रगति के लिए आज भी प्रासंगिक है। भारत जो विषय उठा रहा है, जिन वैश्विक मंचों के निर्माण के लिए भारत आगे आया है उसका आधार वैश्विक चुनौतियां हैं, वैश्विक विषय हैं और गंभीर समस्याओं के समाधान का सामूहिक प्रयास है।

उन्होंने कहा कि अपनत्व, विश्व बंधुत्व और विश्व कल्याण की भावना सदियों से भारत की विशेषता रही है और यही संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का भी ध्येय रही है।

टिकाऊ विकास लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा की दिशा में भारत द्वारा ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। हाल के सालों की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान संपन्न करने, पांच साल में 11 करोड़ से ज़्यादा शौचालय बनाने, वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने और पचास करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा योजना देने में सफलता मिली है जो दुनिया को प्रेरक संदेश और उम्मीद देता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने  कहा कि भारत की संस्कृति और जीवन परंपराओं के सहारे बड़ा बदलाव लाने का संकल्प लिया गया है जो वैश्विक सपनों को अपने में समेटे हैं। इसका प्राणतत्व जनभागीदारी से जनकल्याण है, जग कल्याण के लिए है। उन्होंने भारत के अनुभव से अन्य विकासशील देशों को भी मदद मिलने की उम्मीद जताई। “हमारे प्रयासों के केंद्र में 130 करोड़ भारतीय हैं लेकिन जिन सपनों के लिए वो हो रहे हैं वो सारे विश्व के हैं। प्रयास हमारे हैं लेकिन परिणाम सभी के लिए हैं।”


जलवायु परिवर्तन

विश्व के लिए जलवायु परिवर्तन को गंभीर समस्या बताते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी में भारत का योगदान कम रहा है और प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन के मामले में भी भारत पीछे है। लेकिन इसके समाधान की तलाश में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। “एक ओर भारत 450 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य पर काम कर रहा है तो दूसरी ओर उसने इंटरनेशनल सोलर एलायंस स्थापित करने की पहल की है।”

ग्लोबल वार्मिंग से प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती संख्या तीव्रता के मद्देनज़र भारत ने कोएलिशन फ़ॉर डिज़ास्टर रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की भी पहल की है। देशों को इस गठबंधन से जुड़ने का निमंत्रण देते हुए उन्होंने कहा कि इससे ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी जिन पर प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव कम से कम होगा। प्लास्टिक प्रदूषण से पर्यावरण को पनप रहे ख़तरे पर उन्होंने बताया कि भारत को एक बार इस्तेमाल में लाई जाने वाली प्लास्टिक से मुक्त करने का अभियान चल रहा है।

आतंकवाद

संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों में भारत की उल्लेखनीय भागीदारी को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा है कि इन अभियानों में “सबसे बड़ा बलिदान अगर किसी देश ने दिया है तो वो देश भारत है।”
आतंकवाद के ख़तरे के प्रति दुनिया को सचेत करते हुए उन्होंने इसे मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल बताया।

“भारत ने दुनिया को युद्ध नहीं बुद्ध दिए हैं शांति का संदेश दिया है…इसीलिए हमारी आवाज में दुनिया को आतंक के खतरे के ख़िलाफ़ सतर्क करने की गंभीरता भी है और आक्रोश भी। हमारा मानना है कि यह किसी एक देश की नहीं बल्कि दुनिया और मानवता की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।


आतंक के नाम पर बंटी हुई दुनिया उन सिद्धांतों को ठेस पहुंचाती है जिनके आधार पर यूएन का जन्म हुआ है।”प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व नेताओं का आह्वान करते हुए कहा कि मानवता की ख़ातिर आतंक के ख़िलाफ़ पूरे विश्व का एकमत और एकजुट होना अनिवार्य है।
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