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कोरोना का खौफ : दुनिया के चार लाख नाविक 16 माह से नहीं गए घर
Sun, 01 Nov 2020 01:38 PM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sun, 01 Nov 2020 01:38 PM IST
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जहाज
- फोटो : पेक्सेल्स
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कोरोना की वजह से नाविकों की जिंदगी की रफ्तार भी धीमी हो गई है। पिछले 16 महीने से चार लाख से ज्यादा नाविक, समुद्री कर्मचारी या तो बंदरगाहों या फिर जहाजों में फंसे हुए हैं। फिलीपींस के सहायक इंजीनियर एलोन करीब 16 महीने से जहाज पर फंसे हुए थे।
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शादी की तारीख निकली
पिछले हफ्ते जब एलोन का जहाज ब्राजील के सैंटोस बंदरगाह पहुंचा तो उनकी शादी की तय तारीख निकल चुकी थी। इस बीच एलोन ने तीन बार घर जाने की कोशिश लेकिन वो इसमें सफल नहीं हो पाए। एलोन अकेले ऐसे नाविक नहीं है, ऐसे लाखों नाविक और कर्मचारी हैं, जो जहाज पर फंसे हैं।
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दूसरी तरफ कोरोना महामारी को देखते हुए पोर्ट प्रशासन जहाजों को जगह देने और नए लोगों के आने से बच रहे हैं। कुछ देशों में चालक दल बदलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हांगकांग शिप ओनर्स एसोसिएशन के हेड जगार्ड ने कहा कि कुछ नाविक डेंटिस्ट के पास नहीं जा पाने के कारण खुद ही अपना दांत उखाड़ रहे हैं।
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अधिकतम 11 माह की इजाजत
अंतरराष्ट्रीय संधि के अनुसार जहाज पर रहने का अधिकतम समय 11 महीने है। ऐसे में यूनियनों का कहना है कि 16 माह से ज्यादा वक्त तक जहाजों पर रखना नाविकों के अधिकारों का हनन है। उनका कहना है कि उनकी स्थिति बंधुआ मजदूरों जैसी हो गई है। इस फैसले से कुछ मल्टीनेशनल कंपनियां भी खुश नहीं है, उन्हें डर है कि ओद्योगिक कार्रवाई की वजह से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर असर पड़ सकता है।
बता दें, कोरोना वायरस का पहला मामला चीन के वुहान में दिसंबर 2019 में सामने आया था। देखते-देखते यह पूरी दुनिया में फैल गया और 22 माह बाद भी इसका पुख्ता इलाज या कारगर वैक्सीन नहीं बन सका है।