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ट्रंप के पूर्व NSA बोल्टन ने कबूला जुर्म: जेल जाने से बचने के लिए वकीलों से की डील, 28 अक्तूबर को सजा पर फैसला

Fri, 26 Jun 2026 08:24 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 26 Jun 2026 08:24 PM IST
सार

डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने गोपनीय दस्तावेज अवैध रूप से पास रखने का जुर्म कबूल कर लिया है। उन्होंने मैरीलैंड की अदालत में सरकारी वकीलों के साथ अधिकतम पांच साल की सजा की डील की है ताकि जेल जाने से बचा जा सके। मामले में अंतिम फैसला 28 अक्टूबर को आएगा।
 

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former us nsa john bolton pleads guilty in classified information case to avoid jail term
जॉन बोल्टन, डोनाल्ड ट्रंप सरकार के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका के सियासी गलियारे से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर आ रही है। डोनाल्ड ट्रंप सरकार के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने अदालत में अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उन्होंने माना है कि उन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए देश के बेहद गोपनीय दस्तावेज अवैध रूप से अपने पास छुपा कर रखे थे।
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बोल्टन ने यह सरेंडर मैरीलैंड के ग्रीनबेल्ट में स्थित फेडरल कोर्ट में किया है। उन्होंने जेल की कोठरी से बचने के लिए सरकारी वकीलों के साथ एक सीक्रेट डील की है। इस हाई-प्रोफाइल केस में अब डिस्ट्रिक्ट जज थियोडोर चुआंग आगामी 28 अक्टूबर को उनकी सजा तय करेंगे।
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क्या है बोल्टन की वो गुप्त 'डील'?
सरकारी वकीलों और बोल्टन के बीच जो समझौता हुआ है, वह बेहद दिलचस्प है। बोल्टन पर पिछले साल अक्टूबर में कुल 18 गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन सबमें उन पर खुफिया जानकारी अपने पास रखने और उसे लीक करने के आरोप थे। लेकिन इस नई डील के तहत बोल्टन ने सिर्फ एक आरोप में अपना जुर्म माना है।
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इस सौदे के बदले न्याय विभाग ने जज से सिफारिश की है कि बोल्टन की जेल की सजा को अधिकतम पांच साल तक ही सीमित रखा जाए। हालांकि, आखिरी फैसला जज के हाथ में ही है। सौदे में बोल्टन ने अपने लिए एक सेफ एग्जिट भी रखा है। अगर जज उन्हें पांच साल से ज्यादा की जेल या 22.5 लाख डॉलर से अधिक का जुर्माना ठोकते हैं, तो बोल्टन इस जुर्म कबूलनामे को वापस ले सकते हैं।

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डायरी के पन्नों और 'शशशश...' वाले मैसेज से फंसा पेच
आपको बता दें कि बोल्टन ने ट्रंप प्रशासन से हटने के बाद एक बेहद चर्चित किताब लिखी थी, जिसका नाम था 'द रूम व्हेयर इट हैपेंड'। ट्रंप सरकार ने तब उस किताब को रोकने की बहुत कोशिश की थी। लेकिन यह आपराधिक मुकदमा उस किताब को लेकर नहीं है। यह पूरा मामला उन गोपनीय नोट्स से जुड़ा है, जो बोल्टन सरकारी पद पर रहते हुए एक डायरी की तरह लिखते थे। जांच में सामने आया कि बोल्टन ने इन खुफिया और संवेदनशील नोट्स को अपनी पत्नी और बेटी के साथ शेयर किया था।

सरकारी वकीलों के हाथ कुछ ऐसे मैसेज लगे हैं, जिसने बोल्टन की चोरी पकड़ ली। एक खुफिया दस्तावेज भेजने के बाद बोल्टन ने अपने परिवार को मोबाइल पर मैसेज भेजा था, "हम इसके बारे में कोई बात नहीं करेंगे!!!" इसके जवाब में उनके परिवार के एक सदस्य ने लिखा था, "शशशश।" यही मैसेज अदालत में उनके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन गए।


ट्रंप से पुरानी दुश्मनी और टाइमिंग का खेल
जॉन बोल्टन कभी ट्रंप के पहले कार्यकाल में उनके सबसे भरोसेमंद और ताकतवर सिपहसालार थे। लेकिन साल 2019 में ट्रंप ने उन्हें पद से हटा दिया। इसके बाद से बोल्टन ट्रंप के सबसे बड़े आलोचक बन गए। ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद उनके कई विरोधियों पर मुकदमे चले हैं, जिसे विपक्ष बदले की राजनीति बता रहा है।

लेकिन बोल्टन ने इस मामले में कोई लंबी कानूनी लड़ाई नहीं लड़ी। उन्होंने सीधे कोर्ट के सामने घुटने टेक दिए। गौर करने वाली बात यह है कि एफबीआई ने बोल्टन के घर और दफ्तर पर अगस्त 2024 में ही छापा मार दिया था। यानी यह जांच ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने से पहले ही शुरू हो चुकी थी। अब पूरी दुनिया की नजरें 28 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब जज बोल्टन की किस्मत का फैसला करेंगे।
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