करजई की अपील: लड़ाई खत्म हो, बातचीत से सुलझें मुद्दे, ब्रिटेन नहीं देगा तालिबान की सरकार को मान्यता
तालिबान और पंजशीर के बीच चल रही लड़ाई को अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने रोकने की अपील की है।
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विस्तार
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा है कि पंजशीर में तालिबान और उसका विरोध कर रहे मोर्चे को लड़ाई बंद करनी चाहिे और बातचीत के जरिए अपने मामले सुलझाने चाहिए। समाचार एजेंसी एएनआई ने यह जानकारी अफगानिस्तान के टोलो न्यूज के हवाले से दी है।
Former president Hamid Karzai in a statement asked the Taliban and the "resistance front" in Panjshir to stop the fighting and resolve their issues through talks: Afghanistan's TOLOnews
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(File photo) pic.twitter.com/RhIUrYVUfC — ANI (@ANI) September 3, 2021
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं की काबुल में रैली
इसके साथ ही काबुल में महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह ने रैली निकाली। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार इन कार्यकर्ताओं ने तालिबान व अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यहां की भविष्य की सरकार में महिलाओं के लिए निर्णय लेने वाली भूमिकाएं सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।
रूस चाहता है शांत-लोकतांत्रिक अफगानिस्तान
उधर, भारत के लिए रूस के राजदूत निकोलाइ कुदाशेव ने कहा है कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक अफगानिस्तान के लिए रूस पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं भारत ये भावनाएं साझा कर सकता है। यह भावनाएं हमारे द्विपक्षीय सहयोग और समूहों में साफ दिखती है।
Russia is very much committed to a peaceful & democratic new Afghanistan. I believe that India could share these feelings. These feelings reflected in our bilateral cooperations in multiple formats like SCO-Afghanistan Contact Group: Russian Ambassador to India Nikolay Kudashev pic.twitter.com/UqYt6HphTc
— ANI (@ANI) September 3, 2021
ब्रिटेन नहीं देगा तालिबान की सरकार को मान्यता
उधर, समाचार एजेंसी एएनआई ने रॉयटर्स के हवाले से खबर दी है कि ब्रिटेन काबुल में तालिबान की नई सरकार को मान्यता नहीं देगा। ब्रिटेन के विदेश सचिव डॉमिनिक रैब ने इस संबंध में कहा है कि ब्रिटेन तालिबान को काबुल में नई सरकार के रूप में मान्यता नहीं देगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में नई वास्तविकताओं से निपटना होगा और हम देश के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को टूटते हुए नहीं देखना चाहते।