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श्रीलंका संकट: रानिल विक्रमसिंघे बने प्रधानमंत्री, पांचवीं बार संभाली देश की कमान, संसद में है केवल एक सीट
Thu, 12 May 2022 07:37 PM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 12 May 2022 07:37 PM IST
सार
आजादी के बाद से संबसे गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद पर रानिल विक्रमसिंघे की वापसी हो गई है। देश के मुख्य विपक्षी नेता सजिथ प्रेमदास ने भी राष्ट्रपति को एक पत्र लिख कर इस पद को संभालने की इच्छा व्यक्त की थी।
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रानिल विक्रमसिंघे
- फोटो : ANI
विस्तार
अपने इतिहास के सबसे खराब आर्थिक दौर का सामना कर रहे श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को गुरुवार को देश का अगला प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया गया है। रानिल विक्रमसिंघे के पास 225 सदस्यीय संसद में केवल एक सीट है। यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के 73 वर्षीय नेता विक्रमसिंघे ने बुधवार को राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे से बात की थी।
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यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के 73 वर्षीय नेता विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने प्रधानमंत्री नियुक्त किया। इससे पहले दोनों ने बुधवार को बंद कमरे में बातचीत की थी। श्रीलंका के चार बार प्रधानमंत्री रह चुके विक्रमसिंघे को अक्तूबर 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने प्रधानमंत्री पद से हटा दिया था। हालांकि, दो महीने बाद ही सिरीसेना ने उन्हें इस पद पर बहाल कर दिया था।
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सूत्रों के मुताबिक, सत्तारूढ़ श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (एसएलपीपी), विपक्षी समगी जन बालावेगाया (एसजेबी) के एक धड़े और अन्य कई दलों ने संसद में विक्रमसिंघे के बहुमत साबित करने के लिए अपना समर्थन जताया है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि उनके पास अंतरिम प्रशासन का नेतृत्व करने के लिए क्रॉस पार्टी समर्थन है जिसे छह महीने चलना है। सूत्रों ने कहा कि सत्ताधारी श्रीलंका पोडुजना पेरामुना (एसएलपीपी) के सदस्य, मुख्य विपक्षी दल समागी जन बलवेगया (एसजेबी) का एक वर्ग और कुछ अन्य पार्टियों ने संसद में विक्रमसिंघे के लिए बहुमत प्रदर्शित करने के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया था। यूएनपी के चेयरमैन वजीरा अभयवर्धना ने कहा है कि नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद विक्रमसिंघे संसद में बहुमत पाने में सक्षम हो जाएंगे। विक्रमसिंघे ने प्रधानमंत्री के तौर पर महिंदा राजपक्षे का स्थान लिया है, जिन्होंने सोमवार को इस्तीफा दिया था।
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देश की सबसे पुरानी पार्टी यूएनपी 2020 के संसदीय चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत सकी थी और यूएनपी के मजबूत गढ़ रहे कोलंबो से चुनाव लड़ने वाले विक्रमसिंघे भी हार गए थे। बाद में वह सकल राष्ट्रीय मतों के आधार पर यूएनपी को आवंटित राष्ट्रीय सूची के माध्यम से संसद पहुंच सके।
उनके साथी रहे सजीत प्रेमदासा ने उनसे अलग होकर अलग दल एसजेबी बना लिया, जो मुख्य विपक्षी दल बन गया। समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रेमदास ने राष्ट्रपति को एक खुला पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने देश का अगला प्रधानमंत्री बनने की इच्छा व्यक्त की थी।
विक्रमसिंघे को दूरदृष्टि वाली नीतियों के साथ अर्थव्यवस्था को संभालने वाले नेता के तौर पर जाने जाते हैं। उन्हें श्रीलंका का ऐसा राजनेता माना जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी जुटा सकते हैं। श्रीलंका 1948 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से सबसे बुरे आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है।
नए पीएम का पहला बयान
इस बीच कोलंबो में श्रीलंका के नए पीएम रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि मैंने अर्थव्यवस्था को ऊपर उठाने की चुनौती ली है और मुझे इसे पूरा करना होगा। भारत-श्रीलंका संबंधों के बारे में पूछे जाने पर श्रीलंका के नए पीएम विक्रमसिंघे ने कहा कि यह पहले से ही बहुत बेहतर हो जाएगा। जब पूछा गया कि प्रदर्शनकारी नहीं जा रहे हैं और क्या उनसे बात कर पाए हैं? उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें रहना चाहिए। हम चाहते हैं कि वे रहें। अगर वे बात करना चाहते हैं, तो हां।
श्रीलंका की नई सरकार के साथ काम करने को लेकर आशान्वित है भारत
विक्रमसिंघे के शपथ लेने के बाद भारतीय उच्चायोग ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुसार गठित नई श्रीलंकाई सरकार के साथ काम करने को लेकर आशान्वित है और द्वीप राष्ट्र के लोगों के लिए नई दिल्ली की प्रतिबद्धता जारी रहेगी।