जनरल कोलिन पॉवेल की संक्रमण से मौत: डोज लगवाए कुछ लोगों के मरने का यह मतलब नहीं कि वैक्सीन बेकार है!
विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि इन्हीं हालात को ध्यान में रखते हुए अब खतरे की श्रेणी में आने वाले लोगों को तुरंत बूस्टर डोज लगवाने की सलाह दी जा रही है। बीते अगस्त में अमेरिका सरकार के स्वास्थ्य अधिकारियों ने आंशिक या गंभीर रूप से इन्यूनोकॉम्प्रमाइज्ड लोगों को बूस्टर डोज लगवाने की सलाह दी थी...
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अमेरिका में पूर्व रक्षा मंत्री जनरल कोलिन पॉवेल की कोविड-19 संक्रमण के कारण हुई मौत ने देश में वैक्सीन के असर पर बहस छेड़ दी है। 84 वर्षीय पॉवेल को वैक्सीन के दोनों डोज लग चुके थे। लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से पैदा हुई समस्याओं के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के स्वास्थ्य अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि पॉवेल की मृत्यु का लाभ वैक्सीन विरोधी गुट उठा सकते हैं। वे इसे अपने इस दावे का प्रमाण बता सकते हैं कि वैक्सीन कारगर नहीं होती। पॉवेल की मृत्यु की खबर आने के बाद से सोशल मीडिया पर ऐसे समूहों की तरफ से कहा जा रहा है कि जब टीका लगवा चुके लोग भी कोविड-19 से मर रहे हैं, तो फिर वैक्सीन लगवाने का फायदा क्या है?
सीएनएन ने इस नए माहौल को देखते हुए विशेषज्ञों से बातचीत की। जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के मिल्केन इंस्टीट्यूट स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में फिजीशियन डॉ लियेना वेन ने इस चैनल से कहा कि अब जरूरत इस बात की है कि विज्ञान और अनुसंधान के निष्कर्षों बारे में मीडिया ज्यादा जानकारी दे। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के वैक्सीन बेहद असरदार हैं। इनकी वजह से लोगों में कोविड-19 संक्रमण गंभीर बीमारी में तब्दील नहीं होती।
इस सिलसिले में विशेषज्ञों ने अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के ताजा रिसर्च से सामने आए आंकड़ों का जिक्र किया है। इनके मुताबिक वैक्सीन के कारण कोविड-19 संक्रमण से ग्रसित होने की आशंका छह गुना घट जाती है। जबकि इस कारण मौत की आशंका 11 गुना कम हो जाती है। विशेषज्ञों ने वैक्सीन के इस असर को शानदार कहा है। लेकिन उन्होंने ये बात स्वीकार की है कि कोई भी वैक्सीन कोविड-19 संक्रमण से 100 फीसदी बचाव नहीं करता। लेकिन उनका कहना है कि ये बात किसी भी दूसरे रोग के वैक्सीन पर भी लागू होती है।
कोलिन पॉवेल की मृत्यु के बारे में डॉ. लियेना वेन ने कहा- ‘हम जानते हैं कि जो लोग वृद्ध हैं और जिन्हें सेहत संबंधी दिक्कतें हैं, उनके गंभीर संक्रमण से पीड़ित होने और उसकी वजह से उनकी मृत्यु की संभावना भी रहती है। मेडिकल भाषा में ऐसे लोगों को इम्युनोकॉम्प्रॉमाइज्ड (जिनकी प्रतिरक्षण क्षमता कमजोर हो गई हो) कहा जाता है। जनरल पॉवेल कैंसर पीड़ित थे। फिर उनकी उम्र अधिक हो गई थी। इसलिए उनके लिए खतरा था।’
विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि इन्हीं हालात को ध्यान में रखते हुए अब खतरे की श्रेणी में आने वाले लोगों को तुरंत बूस्टर डोज लगवाने की सलाह दी जा रही है। बीते अगस्त में अमेरिका सरकार के स्वास्थ्य अधिकारियों ने आंशिक या गंभीर रूप से इन्यूनोकॉम्प्रमाइज्ड लोगों को बूस्टर डोज लगवाने की सलाह दी थी। डॉ. वेन ने कहा- ‘कोविड-19 वैक्सीन रेनकोट की तरह हैं। जब हल्की बारिश हो रही हो, तो ये काम करते हैं, लेकिन अगर आप आंधी या तूफान में फंस गए हैं, तो आपके भीग जाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।’