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US: टैरिफ को लेकर भारत की चुप्पी को पूर्व अमेरिकी एनएसए ने सराहा, कहा- यह ट्रंप से निपटने का सबसे अच्छा तरीका

Sat, 13 Sep 2025 10:00 AM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: बशु जैन Updated Sat, 13 Sep 2025 10:00 AM IST
सार

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ पर भारत का ज्यादातर चुप रहना और गुप्त कूटनीति पर निर्भर रहना ठीक है। मुझे लगता है कि ट्रंप जैसे व्यक्ति से निपटने का यही सबसे अच्छा तरीका है।

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Former American NSA praised India's silence regarding tariffs, said - this is the best way to deal with Trump
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका की ओर से लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ पर भारत की चुप्पी की पूर्व अमेरिकी एनएसए ने सराहना की है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ पर भारत का ज्यादातर चुप रहना और गुप्त कूटनीति पर निर्भर रहना ठीक है। मुझे लगता है कि ट्रंप जैसे व्यक्ति से निपटने का यही सबसे अच्छा तरीका है। अगर आप उनके बहकावे में आकर उनके साथ सार्वजनिक रूप से बहस में पड़ जाते हैं, तो इससे चीजें आसान नहीं होंगी। 
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पूर्व अमेरिकी एनएसए ने कहा कि अमेरिका में इस बात को लेकर काफी चिंता थी कि दो टैरिफ मुद्दों के साथ-साथ ट्रंप द्वारा कश्मीर में आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान में शांति लाने का श्रेय लेना अनुचित था। मुझे लगता है कि भारत का दीर्घकालिक हित रूस के साथ सैन्य और आर्थिक संबंधों को कम करने में है, क्योंकि रूस तेजी से चीन के साथ एक धुरी बन रहा है। पुतिन और शी जिनपिंग ने असीमित साझेदारी की बात की है। जब प्रधानमंत्री मोदी बीजिंग जाते हैं और पुतिन, शी जिनपिंग और किम जोंग उन से हाथ मिलाते हैं, तो यह अमेरिका के लिए एक संकेत होता है। सभी ने वे तस्वीरें देखीं, लेकिन यह भारत के लिए कोई दीर्घकालिक रणनीति नहीं है।
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भारत-अमेरिका संबंधों पर उन्होंने कहा कि रिश्ते अब भी वैसे ही हैं। भारत सरकार को ट्रंप को एक बार के प्रस्ताव के रूप में देखना चाहिए और उससे निपटना चाहिए। जो भी कदम उन्हें भारत के राष्ट्रीय हित में लगें, उन्हें उठाना चाहिए, लेकिन इसे ट्रंप की खासियत समझना चाहिए। किसी व्यापक अमेरिकी दृष्टिकोण को नहीं दर्शाना चाहिए। ट्रंप के पास कोई समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति नहीं है। वह बहुत ही लेन-देन वाले हैं। 
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उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि भारत और अमेरिका के बीच तनाव का एक बड़ा कारण ट्रंप की बेहद अनिश्चित शैली है। हालांकि भारत की ओर से कई चिंताएं हैं, लेकिन सबसे बड़ी चिंता पिछले कई वर्षों से भारतीय कंपनियों द्वारा रूसी तेल और गैस की खरीद पर लगाया गया 25% टैरिफ है। यह दर्शाता है कि ट्रंप कितने अनिश्चित हो सकते हैं क्योंकि उन्होंने प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के लिए रूस पर प्रतिबंध या टैरिफ नहीं लगाया है, न ही उन्होंने प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के लिए चीन पर प्रतिबंध या टैरिफ लगाया है। जबकि चीन भारत से कहीं बड़ा खरीदार है और कई अन्य खरीदार हैं। इसमें तुर्किये, पाकिस्तान और अन्य शामिल हैं। 


भारत के राजदूत बनने के योग्य नहीं सर्जियो गोर: बोल्टन
भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में नामित सर्जियो गोर के बारे में जॉन बोल्टन ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि वह भारत में अमेरिकी राजदूत बनने के योग्य हैं। मुझे लगता है कि जब हम रूसी तेल खरीद पर गौर करते हैं तो भारत और कई अन्य देशों ने प्रतिबंधों में विसंगति का फायदा उठाया। इसका उद्देश्य यूक्रेन में युद्ध के लिए धन जुटाने हेतु रूसी राजस्व को कम करना था, लेकिन वैश्विक बाजारों में रूस द्वारा तेल की बिक्री को इस तरह कम नहीं करना था। जिससे यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ जाएं। इससे स्पष्ट रूप से एक मूल्य सीमा बनती है, जिससे स्पष्ट रूप से रूसियों से निर्धारित मूल्य से कम पर तेल खरीदने और फिर उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार मूल्य पर बेचने की संभावना पैदा होती है। इसलिए मुझे लगता है कि कई लोग तर्क देंगे कि प्रतिबंधों का कोई तकनीकी उल्लंघन भी नहीं हुआ। मूल उद्देश्य यह होना चाहिए कि हम रूसी युद्ध मशीन को ईंधन नहीं देना चाहते। 
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