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जम्मू-कश्मीर: भारत के आंतरिक मामले में चीन का दखल, बताया संप्रभुता के लिए चुनौती
Thu, 31 Oct 2019 05:17 PM IST
अमित मंडल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमित मंडल
Updated Thu, 31 Oct 2019 05:17 PM IST
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : पीटीआई
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जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर चीन ने गुरुवार को खुले रूप से अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाते हुए भारत के आंतरिक मामले में दखल देने की कोशिश की। चीन जम्मू-कश्मीर को विभाजित कर दो केंद्रशासित प्रदेशों में बदलने का खुला विरोध किया। इससे पहले तक वह इस मामले में खुला बयान देने से बच रहा था।
चीन ने भारत के फैसले को गैरकानूनी और अमान्य करार दिया। चीन ने कहा कि उसके कुछ हिस्से को अपने प्रशासन में शामिल करने के भारत के फैसले से चीन की संप्रभुता को चुनौती मिली है।
बता दें कि जम्मू-कश्मीर को विभाजित कर इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बदलने का फैसला आज से लागू हो गया है। भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को राज्य का विशेष दर्जा खत्म करते हुए अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया था।
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चीन ने उस समय भी इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अनुच्छेद 370 हटाकर लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने से उसका कुछ हिस्सा भी इसमें आ गया है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, भारत सरकार ने दो केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के गठन का एलान किया है जिससे हमारा कुछ हिस्सा प्रशासनिक क्षेत्र में आ गया है। चीन इसका विरोध करता है। भारत के इस फैसले से चीन की संप्रुभता को चुनौती मिली है।
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चीन ने भारत के फैसले को गैरकानूनी और अमान्य करार दिया। चीन ने कहा कि उसके कुछ हिस्से को अपने प्रशासन में शामिल करने के भारत के फैसले से चीन की संप्रभुता को चुनौती मिली है।
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बता दें कि जम्मू-कश्मीर को विभाजित कर इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बदलने का फैसला आज से लागू हो गया है। भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को राज्य का विशेष दर्जा खत्म करते हुए अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया था।
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चीन ने उस समय भी इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अनुच्छेद 370 हटाकर लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने से उसका कुछ हिस्सा भी इसमें आ गया है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, भारत सरकार ने दो केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के गठन का एलान किया है जिससे हमारा कुछ हिस्सा प्रशासनिक क्षेत्र में आ गया है। चीन इसका विरोध करता है। भारत के इस फैसले से चीन की संप्रुभता को चुनौती मिली है।