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फ्लाईदुबई हमला: चाकू नहीं, कुल्हाड़ी से हुआ था कैप्टन स्मित पर वार, फिर भी बचाईं 180 जानें; जांच में नए खुलासे
Sat, 03 Oct 2026 12:49 PM IST
शिवम गर्ग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवम गर्ग
Updated Sat, 03 Oct 2026 12:49 PM IST
सार
फ्लाईदुबई की एफजेड1073 हमले की जांच से पता चला है कि ओमानी को-पायलट ने भारतीय कैप्टन पर कॉकपिट की इमरजेंसी कुल्हाड़ी से हमला किया था, जो एक 'आतंकवादी काम' था। जांच में और क्या सामने आया? आइए, जानते हैं...
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यूएई ने इसे आतंकवादी हमला बताया (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
यूनाइटेड अरब अमीरात के अटॉर्नी जनरल हमाद सैफ अल शम्सी ने सरकारी न्यूज एजेंसी WAM के मुताबिक, बुधवार को फ्लाईदुबई फ्लाइट 1073 को हाईजैक करने की कोशिश की जांच से पता चला है कि ओमानी को-पायलट ने भारतीय कैप्टन पर कॉकपिट की इमरजेंसी कुल्हाड़ी से हमला किया था, जो एक 'आतंकवादी काम' था।
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एयरलाइंस को आम तौर पर कॉकपिट में क्रैश एक्स रखना जरूरी होता है, ताकि इमरजेंसी में खिड़की तोड़कर भागने या आग लगने पर पैनल तोड़ने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सके। अल शम्सी का कहना है कि घटना के हालात, मकसद और किसी भी जुड़े कनेक्शन का पता लगाने के साथ-साथ फिजिकल और डिजिटल सबूतों की जांच के लिए जांच जारी है।
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घायल कैप्टन ने खोला कॉकपिट का दरवाजा
बीते 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में अचानक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने विमान में सवार 174 लोगों और क्रू सदस्यों की जान खतरे में डाल दी। उड़ान के दौरान कॉकपिट में सह-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया। हमले के बाद विमान तेजी से नीचे आने लगा। गंभीर रूप से घायल कैप्टन ने इसके बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में मदद की। विमान की सऊदी अरब के तबुक में आपात लैंडिंग कराई गई।
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क्या विमान को जानबूझकर गिराने की कोशिश थी?
इस घटना की जांच में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या सह-पायलट का उद्देश्य विमान को जानबूझकर दुर्घटनाग्रस्त करना था। इस्राइली अधिकारियों ने घटना को विमान को गिराने की कोशिश के तौर पर देखा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि सह-पायलट विमान को गिराना चाहता था। हालांकि जांच के शुरुआती दौर में मकसद को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला था। अब यूएई ने घटना को ‘आतंकवादी’ हमला बताया है और यह पता लगाने के लिए जांच जारी है कि क्या इसके पीछे कोई पूर्व योजना, निर्देश या अन्य लोग शामिल थे।
सह-पायलट के पुराने रिकॉर्ड की भी जांच
जांच एजेंसियां सह-पायलट के पुराने रिकॉर्ड और पृष्ठभूमि की भी पड़ताल कर रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उसके विमानन करियर से जुड़े पुराने सुरक्षा सवालों की जांच हो रही है। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि क्या पहले किसी विमानन संस्था की ओर से उसके संबंध में सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गई थीं और यदि ऐसा था तो बाद में उसे फ्लाईदुबई में उड़ान भरने की अनुमति कैसे मिली। हालांकि किसी व्यक्ति के सामान में किसी राजनीतिक या वैचारिक संगठन से जुड़ी सामग्री मिलना अपने आप में हमले का मकसद साबित नहीं करता। इसके लिए जांच एजेंसियों को ठोस साक्ष्य जुटाने होंगे।
सीरिया और कट्टरपंथ से जुड़े दावों की भी पड़ताल
रिपोर्टों में सह-पायलट के कथित सीरिया संपर्क और कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होने के दावे भी सामने आए हैं। इस्राइली प्रधानमंत्री ने उसके बारे में कट्टरपंथी इस्लामी विचारों से प्रभावित होने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि जांच से जुड़े अंतिम निष्कर्ष अभी बाकी हैं। यूएई की जांच अब इस बात पर भी केंद्रित है कि हमला किसी पूर्व योजना या निर्देश के तहत किया गया था या नहीं। अलग-अलग देशों की एजेंसियां इस मामले की जांच में सहयोग कर रही हैं।
स्मित मच्छार ने कैसे टाला बड़ा हादसा?
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इससे यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू करने का मौका मिला। इसके बाद विमान में मौजूद दूसरे पायलटों ने कमान संभाली और विमान को तबुक में सुरक्षित उतारा गया। बाद में स्मित मच्छार ने अस्पताल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत में घटना का विवरण साझा किया। प्रधानमंत्री मोदी और इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू समेत कई लोगों ने कैप्टन की कार्रवाई की सराहना की है।
अब विमानन सुरक्षा पर भी उठ रहे सवाल
इस घटना ने विमानन सुरक्षा और पायलटों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर यह देखा जा रहा है कि किसी पायलट के पुराने सुरक्षा रिकॉर्ड में चिंता सामने आने पर अलग-अलग विमानन एजेंसियों के बीच जानकारी किस तरह साझा होती है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि फ्लाईदुबई में सह-पायलट की नियुक्ति के समय किस तरह की जांच हुई थी और उसके पुराने रिकॉर्ड की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंची थी या नहीं।