{"_id":"63358fa82f9409442f742343","slug":"flood-relief-activities-to-continue-for-next-two-years-in-pakistan-victims-say-not-our-country","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तान: अगले दो साल तक जारी रहेगा राहत कार्य, बाढ़ से देश का एक तिहाई हिस्सा पानी में डूबा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
पाकिस्तान: अगले दो साल तक जारी रहेगा राहत कार्य, बाढ़ से देश का एक तिहाई हिस्सा पानी में डूबा
Thu, 29 Sep 2022 05:59 PM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 29 Sep 2022 05:59 PM IST
सार
बाढ़ से विस्थापित हुए और खुले शिविरों में रह रहे सैकड़ों हजारों लोगों ने राहत और सहायता प्रदान करने में सरकार की विफलता पर असंतोष व्यक्त किया है।
विज्ञापन
पाकिस्तान में बाढ़ के बाद के हालात
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पाकिस्तान में बाढ़ राहत गतिविधियां अगले दो साल तक जारी रहने की संभावना है, योजना मंत्री अहसान इकबाल ने गुरुवार को प्रलयकारी बाढ़ के विनाशकारी प्रभावों का हवाला देते हुए ये बात कही। जून के मध्य से इस विनाशकारी बाढ़ से अब तक 1,666 लोग मारे गए हैं। जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से देश का एक तिहाई हिस्सा पानी में डूब गया है और करीब 30 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है। योजना, विकास और विशेष पहल मंत्री इकबाल ने अभूतपूर्व बारिश और बाढ़ के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया, जिसमें सैकड़ों हजारों लोग घायल हुए हैं और 30.3 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
विज्ञापन
बाढ़ से 20 लाख से अधिक घर बर्बाद
उन्होंने कहा, प्राकृतिक आपदाएं जलवायु परिवर्तन का परिणाम हैं, हालांकि हम भविष्य में उनसे निपटने के लिए योजनाएं लेकर आ रहे हैं। अभी के लिए सरकार ने 20 जिलों के लिए 40 अरब रुपये आवंटित किए हैं। बाढ़ से 20 लाख से अधिक घर नष्ट हो गए हैं और दस लाख से अधिक पशुधन बाढ़ में खो गए हैं जो ग्रामीण परिवारों की आय का एक प्रमुख स्रोत था। बाढ़ से हुए नुकसान से यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या नकदी की कमी वाला देश समय पर अपने कर्ज का भुगतान करने में सक्षम होगा, क्योंकि स्थानीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रही है और विदेशी मुद्रा भंडार घट रहा है।
विज्ञापन
पीएम शहबाज ने की जलवायु न्याय की मांग
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी ने विनाश की भरपाई के लिए जलवायु न्याय की मांग की है क्योंकि आपदा जलवायु के कारण हुई और पाकिस्तान दुनिया में सबसे कम कार्बन का उत्सर्जन करता है और वह विकसित देशों के कार्बन उत्सर्जन का खामियाजा भुगत रहा है। इस बीच बाढ़ से विस्थापित हुए और खुले शिविरों में रह रहे सैकड़ों हजारों लोगों ने राहत और सहायता प्रदान करने में सरकार की विफलता पर असंतोष व्यक्त किया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे मॉन्सटर मॉनसून करार दिया है और कहा कि सिंध प्रांत सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
विज्ञापन
35 वर्षीय शबीरा खातून अभी भी अपने नवजात बच्चे को खोने के सदमे से उबर नहीं पा रही है। उनकी 13 वर्षीय बेटी समीना ने कहा कि शिविरों में रहने वाले अधिकांश बच्चों को तेज बुखार है और उन्हें डेंगू या मलेरिया का पता चला है। यहां लगभग 80 प्रतिशत बच्चे मलेरिया और दस्त से बीमार हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि मलेरिया, डेंगू बुखार, त्वचा और आंखों में संक्रमण, और तीव्र दस्त जैसी बीमारियों में वृद्धि से दूसरी आपदा की संभावना है। किशोरी समीना ने कहा कि हमारे आने से पहले की रात को कराची में मेरी मां प्रसव पीड़ा में थी।