सवा करोड़ कैथोलिक ईसाई वाले कम्युनिस्ट देश चीन में पहली बार हुई बिशप की नियुक्ति
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कम्युनिस्ट चीन में पहली बार किसी बिशप की नियुक्ति हुई है। यह नियुक्ति चीन और वेटिकन के बीच मेल-मिलाप को बढ़ावा देने के लिए हुए करार के बाद संयुक्त मंजूरी के तहत हुई है। चीन में करीब 1.20 करोड़ कैथोलिक ईसाई हैं जो दशकों से सरकार संचालित एसोसिएशन और वेटिकन समर्थक गैर मान्यता प्राप्त भूमिगत चर्च के बीच बंटे हुए हैं। एसोसिएशन का पादरी कम्युनिस्ट पार्टी चुनती आई है।
चीन के आधिकारिक चर्च चाइनीज कैथोलिक पैट्रियोटिक एसोसिएशन ने बताया कि याओ शुन को आंतरिक मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र के उलानकाब का बिशप नियुक्त किया गया है। जबकि एक और बिशप की नियुक्ति होनी है लेकिन उसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चीनी कानून के मुताबिक फादर और बिशप को अपना पंजीकरण करना होता है और देश के आधिकारिक चर्च के साथ काम करना पड़ता है। इस नियुक्ति को पोप से भी मंजूरी मिली है। चीन में पादरियों की नियुक्ति को लेकर दोनों देशों के रिश्ते 1951 में खराब हुए थे। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन बिशप की कमी का सामना कर रहा है।
बीजिंग-वेटिकन में तनावपूर्ण रिश्ते
वेटिकन जानता है कि चीन इन नियुक्तियों का इस्तेमाल आधिकारिक चर्च से असंबद्ध श्रद्धालुओं की पहचान कर कार्रवाई में कर सकता है। इसके बावजूद पोप फ्रांसिस ने चीन की ओर से नियुक्त सात पादरियों को मंजूरी दी है। चीन में कैथोलिक ईसाईयों की संख्या में वृद्धि के साथ वेटिकन ने पेइचिंग से संबंध बहाल करने की पहल तेज कर दी है, लेकिन दोनों में तनाव बरकरार है। वेटिकन के ताइवान से भी राजनयिक रिश्ते हैं जबकि चीन मानता है कि ताइवान उसका अलग हुआ प्रांत है और उसके साथ एकीकरण होना है।