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Bangladesh: बांग्लादेश में काम वाली जगह पर महिला पत्रकारों का हो रहा यौन उत्पीड़न; नई इंटरनेशनल स्टडी में दावा

Tue, 26 May 2026 01:19 AM IST
Pavan वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Pavan Updated Tue, 26 May 2026 01:19 AM IST
सार

रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में ज्यादातर पीड़िताओं ने करियर की चिंता की वजह से इस घटनाओं की रिपोर्ट नहीं की। सर्वे से पता चला कि 15 फीसदी पुरुषों की तुलना में 48 पीसदी महिलाओं को काम से जुड़ा ऑनलाइन यौन उत्पीड़न हुआ। इसमें यह भी बताया गया कि 24 फीसदी महिलाओं को शारीरिक यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

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Female journalists in Bangladesh are facing harassment at their workplaces, claims a new international study
तारिक रहमान, पीएम, बंग्लादेश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बांग्लादेश में काम की जगह पर सुरक्षा को लेकर काफी चिंताएं बनी हुई हैं। एक नई इंटरनेशनल स्टडी से पता चला है कि देश भर में महिला पत्रकारों के साथ यौन उत्पीड़न होने की संभावना उनके पुरुष साथियों की तुलना में लगभग छह गुना ज्यादा है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, ज्यादातर घटनाएं करियर पर असर पड़ने के डर से रिपोर्ट नहीं की जाती है। बांग्लादेश में 339 मीडिया पेशेवरों को कवर करते हुए सर्वे में पाया गया कि 60 प्रतिशत महिला जवाब देने वालों को मौखिक यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जबकि नौ प्रतिशत पुरुष जवाब देने वालों को।
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17 फीसदी पीड़ित, आधे से ज्यादा नहीं करती हैं शिकायत
द बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, ये नतीजे डब्ल्यूएएन-आईएफआरए विमेन इन न्यूज, सिटी, सेंट जॉर्ज, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन और बीबीसी मीडिया एक्शन द्वारा किए गए कई देशों के एक स्टडी का हिस्सा है। इसमें 21 देशों के 2,800 से ज्यादा मीडिया प्रोफेशनल्स का सर्वे किया गया। नतीजों के मुताबिक, 17 फीसदी महिला मीडिया प्रोफेशनल्स को काम वाली जगह पर यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जिनमें से आधे से ज्यादा ने इन घटनाओं की रिपोर्ट न करने का फैसला किया। इसमें यह भी कहा गया कि रिपोर्ट किए गए 43 फीसदी मामलों में मालिक भी एक्शन लेने में नाकाम रहे।
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करियर की चिंता की वजह से नहीं की जाती है शिकायत
सर्वे से पता चला कि 15 फीसदी पुरुषों की तुलना में 48 पीसदी महिलाओं को काम से जुड़ा ऑनलाइन यौन उत्पीड़न हुआ। इसमें यह भी बताया गया कि 24 फीसदी महिलाओं को शारीरिक यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जबकि चार फीसदी पुरुषों ने ऐसे ही अनुभव बताए। रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में ज्यादातर पीड़िताओं ने करियर की चिंता की वजह से इस घटनाओं की रिपोर्ट नहीं की। बांग्लादेश में जिन महिला मीडिया प्रोफेशनल्स को वर्बल हैरेसमेंट का सामना करना पड़ा, उनमें से 52 फीसदी ने इस अब्यूज की रिपोर्ट नहीं की, जबकि एम्प्लॉयर्स ने रिपोर्ट किए गए 43 फीसदी मामलों में कोई एक्शन नहीं लिया।


यौन उत्पीड़न की दरें अफ्रीका में सबसे ज्यादा 33 फीसदी
द बिजनेस स्टैंडर्ड ने सिटी, सेंट जॉर्ज, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की लिंडसे ब्लूमेल के हवाले से कहा, 'यौन उत्पीड़न का उन लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ता है जो इसे महसूस करते हैं और न्यूजरूम में काम करने के आम माहौल पर भी। रिसर्च से पता चलता है कि उत्पीड़न चाहे किसी भी तरह का हो, इसे महसूस करने से कार्य संतुष्टि कम होता है और उद्योग छोड़ने का रिस्क बढ़ जाता है'। स्टडी में पाया गया कि यौन उत्पीड़न की दरें अफ्रीका में सबसे ज्यादा 33 फीसदी थीं, उसके बाद अरब क्षेत्र में 31 फीसदी और दक्षिण-पूर्व एशिया में 19 फीसदी दर्ज की गईं, जबकि यूक्रेन में यह 12 फीसदी थी।

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डब्ल्यूएएन-आईएफआरए विमेन इन न्यूज की मैनेजिंग डायरेक्टर सुसान माकोरे ने कहा, 'जब ज्यादातर यौन उत्पीड़न के मामले रिपोर्ट नहीं होते हैं तो यह वर्कप्लेस कल्चर, भरोसे और अकाउंटेबिलिटी की गहरी नाकामी का संकेत है। मीडिया में यौन उत्पीड़न कोई अकेला वर्कप्लेस का मुद्दा नहीं है; यह एक स्ट्रक्चरल रुकावट है जो यह तय करती है कि पत्रकारिता में कौन हिस्सा लेने, बने रहने और लीड करने में सुरक्षित महसूस करता है'।

-इनपुट आईएएनएस
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