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कर्ज बना गले की फांस: रूबल में भुगतान की रूसी शर्त अब बन रही है टकराव का नया मैदान

Fri, 08 Apr 2022 01:30 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 08 Apr 2022 01:30 PM IST
सार

रूस के वित्त मंत्रालय ने कहा कि जिस बैंक में रूस का धन है, उसने कर्ज का भुगतान करने के रूस के निर्देश को मानने से इनकार कर दिया। उस स्थिति में रूस को मैच्योर बॉन्ड के बदले भुगतान रूबल में करना पड़ा...

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Fearing Default, Russia Paid Foreign Dollar Debt in Rubles
रूबल - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

रूस अपनी देनदारियां रूबल में चुकाने के अपने इरादे पर आगे बढ़ रहा है। जबकि पश्चिमी देश अभी तक इस रुख पर अड़े हुए हैं कि रूबल में चुकाई गई रकम को वे स्वीकार नहीं करेंगे। इस वजह से यह अंदेशा बना हुआ है कि रूस को डिफॉल्टर यानी समय पर अपनी देनदारी ना चुकाने का दोषी ठहरा दिया जाए।

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रूस सरकार ने बुधवार को कहा कि उसने मैच्योर हुए बॉन्ड्स के बदले भुगतान रूबल में किया है। रूस वित्त मंत्रालय ने कहा कि 64 करोड़ 92 लाख डॉलर की ये रकम उसे मजबूरी में रूबल में चुकानी पड़ी। वजह यह है कि डॉलर और यूरो में रखे गए रूस के धन को पश्चिमी देशों ने जब्त कर लिया है। यूक्रेन पर रूस की सैनिक कार्रवाई के विरोध में पश्चिमी देशों ने ये कदम उठाया है। इसी हफ्ते अमेरिका ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाए। उससे अमेरिकी बैंकों में रखे अपने धन के जरिए कर्ज चुकाने में रूस अक्षम हो गया।

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बैंक का निर्देश मानने से इनकार

रूस के वित्त मंत्रालय ने कहा कि जिस बैंक में रूस का धन है, उसने कर्ज का भुगतान करने के रूस के निर्देश को मानने से इनकार कर दिया। उस स्थिति में रूस को मैच्योर बॉन्ड के बदले भुगतान रूबल में करना पड़ा।

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रेटिंग एजेंसियों ने कहा है कि ऐसे भुगतान को डिफॉल्ट की श्रेणी में रखा जाएगा। यानी समझा जाएगा कि रूस ने सही समय पर कर्ज नहीं चुकाया। अमेरिका स्थित वित्तीय संस्था- इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस की उप-मुख्य अर्थशास्त्री एलिना रिबाकोवा ने एक समाचार एजेंसी से कहा- ‘जिस ऋण में रूबल में भुगतान का प्रावधान पहले से शामिल नहीं है, अगर उसका भुगतान रूस ने रूबल में किया, तो उसे डिफॉल्ट समझा जाएगा।’

रूस ने मार्च के मध्य में रूबल में बॉन्ड के भुगतान की एक विशेष प्रक्रिया घोषित की थी। अब वह उस पर ही अमल कर रहा है। रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को यह तो कहा कि उसने रूबल में बॉन्ड्स का भुगतान किया है, लेकिन यह नहीं बताया कि क्या उस भुगतान को दूसरे पक्ष ने स्वीकार कर लिया है। क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) के प्रवक्ता दिमत्री पेस्कोव ने सिर्फ यह कहा कि रूस के पास सभी कर्जों को चुकाने लिए पर्याप्त संसाधन हैं।

‘अमित्र देशों’ से भुगतान सिर्फ रूबल में

इस बीच रूस यह एलान भी कर चुका है कि वह प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल की बिक्री के बदले ‘अमित्र देशों’ से भुगतान सिर्फ रूबल में स्वीकार करेगा। जिन देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं, उन्हें उसने अमित्र देशों की सूची में रखा है। रूस के इस फैसले को लेकर यूरोप में भ्रामक स्थिति बनी हुई है। यूरोप गैस की अपनी 40 फीसदी जरूरत के लिए रूस पर निर्भर है। ज्यादातर देशों का अभी तक यही कहना है कि वे रूबल में भुगतान नहीं करेंगे। लेकिन उनसे अलग रुख लेते हुए हंगरी ने कहा है कि उसे रूबल में भुगतान करने में कोई दिक्कत नहीं है।



इसी हफ्ते भारी बहुमत से दोबारा निर्वाचित होकर सत्ता में आए हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने बुधवार को कहा कि रूसी ऊर्जा पर यूरोपियन यूनियन के किसी भी प्रतिबंध के वे खिलाफ हैं। वे रूस का यह निर्देश स्वीकार करेंगे कि तेल और गैस के आयात के बदले आगे से रूबल में भुगतान किया जाए।

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