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Pakistan: डर के साये में बीत रहे अफगान शरणार्थियों के दिन, पाकिस्तान सरकार ने दिया है देश छोड़ने का अल्टीमेटम

Sat, 07 Oct 2023 10:09 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 07 Oct 2023 10:09 PM IST
सार

Pakistan: इस्लामाबाद ने बिना दस्तावेज वाले सभी प्रवासियों, खासतौर पर अफगानों के लिए स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए एक नवंबर तक की समय सीमा तय की है। सरकार ने उस तारीख के बाद गिरफ्तारी और निर्वासन की चेतावनी दी है।  

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Fear grips Afghans in Karachi as Pak government announces evicting illegal immigrants
Afghan refugees - फोटो : Social Media

विस्तार

पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि इस महीने के अंत तक 17 लाख अफगान शरणार्थियों को उनके अपने देश भेज दिया जाएगा। इस एलान के बाद से कराची में रह रहे अफगानिस्तान के अप्रवासी अपने दिन और रात डर के साये में बिता रहे हैं। 

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कराची के उत्तरी बाहरी इलाके में बसी हिजरा कॉलोनी और अफगानिस्तान बस्ती में अधिकांश अफगान पुरुष, महिलाएं और बच्चे रहते हैं। सरकार की इस घोषणा के बाद उनकी जिंदगी नरक बन गई है, क्योंकि पुलिस ने उनकी धर-पकड़ शुरू कर दी है। 
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इस्लामाबाद ने बिना दस्तावेज वाले सभी प्रवासियों, खासतौर पर अफगानों के लिए स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए एक नवंबर तक की समय सीमा तय की है। सरकार ने उस तारीख के बाद गिरफ्तारी और निर्वासन की चेतावनी दी है।  
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अफगान बस्ती में समुदाय के प्रमुख हाजी अब्दुल्ला ने कहा, 'हममें से जिनके पास वैध शरणार्थी का दर्जा या कार्ड है, उन्हें भी पुलिस नहीं बख्श रही है। पुलिस पूरे कराची में हमारे लोगों को निशाना बना रही है।' अनुमान है कि कराची तीन लाख अफगानों का घर है, जिनमें से कई तालिबान के सत्ता में आने के दौरान अफगानिस्तान से आए थे और अवैध रूप से यहां रह रहे थे। 

संयुक्त राष्ट्र के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि करीब तेरह लाख अफगान पाकिस्तान में पंजीकृत शरणार्थी हैं, जबकि अन्य आठ लाख अस्सी हजार को देश में रहने के लिए कानूनी दर्जा प्राप्त है। हालांकि, पाकिस्तान के कार्यवाहक गृह मंत्री सरफराज बुगती ने दावा किया कि पाकिस्तान में 17 लाख से अधिक अफगान शरणार्थी हैं जो सरकार के साथ पंजीकृत नहीं हैं और उन्हें घर वापस भेजा जा रहा है।

अधिकांश अफगान शरणार्थी अफगानिस्तान की सीमा से लगे उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा और दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांतों में रहते हैं।  हालांकि, दक्षिणी सिंध प्रांत में भी करीब पांच लाख शरणार्थी रहते हैं, जिनमें से अधिकांश कराची में हैं, जो उन्हें आसानी से अपनी आजीविका कमाने का मौका प्रदान करता है।'

दो आबादी वाले इलाकों में मध्यम वर्ग की आयु वाले कई युवाओं के पास पुलिस के साथ झड़पों और गिरफ्तारियों के बारे में बताने के लिए दर्दनाक कहानियां हैं। एक युवक अब्दुल्ला ने कहा, 'पुलिस दिन-रात हमारे लोगों से पैसे ऐंठ रही है, जबकि हमारे जिन लोगों के पास शरणार्थी कार्ड हैं, वे उन्हें अपना कार्ड दिखाते हैं। उन्हें फाड़ दिया जा रहा है और हमारे लोगों को पुलिस थानों में ले जाया जा रहा है और तभी छोड़ा जा रहा है जब पुलिस को रिश्वत दी जाती है।'

समुदाय के सम्मानित व्यवसायी हाजी रहीम ने कहा कि ज्यादातर युवा घर पर रह रहे हैं और पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के डर से काम के लिए बाहर नहीं निकल रहे हैं। 

उन्होंने कहा, 'हमें नहीं पता कि क्या करना है। यहां तो कानूनी स्थिति वाले शरणार्थियों को भी परेशान किया जा रहा है और पैसे देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। एक व्यक्ति जिसके पास ठेला है और सदर में चिप्स बेचता है, उसे पुलिस ने पकड़ लिया और वह अभी भी जेल में है क्योंकि उसका परिवार पुलिस द्वारा मांगे गए पैसे की व्यवस्था नहीं कर सका था।'


एक महिला सानिया नाज ने कहा कि पांच बच्चों को खिलाना मुश्किल है, क्योंकि उनके पति और भाई दोनों जेल में हैं। हालांकि, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इलियास कश्मीरी ने  कहा कि इन दोनों इलाकों में रहने वाले कई अफगान शरणार्थी मादक पदार्थों की तस्करी, सड़क पर अपराध और डकैती में शामिल पाए गए हैं।

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