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किसान आंदोलन का असरः अब नेपाल के किसान भी सरकार के खिलाफ उतरे सड़कों पर
Wed, 16 Dec 2020 02:09 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 16 Dec 2020 02:09 PM IST
सार
आंकड़ों के मुताबिक सरलाही स्थित अन्नपूर्णा शुगर मिल पर किसानों का 17 करोड़ (नेपाली) रुपए का बकाया है। नवलपारसी स्थित इंदिरा शुगर मिल पर चार करोड़ 70 लाख, लुम्बिनी शुगर मिल पर 8 करोड़ और श्रीराम शुगर मिल पर 35 करोड़ रुपये बकाया हैं...
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Farmers agitation in Nepal
- फोटो : Agency
विस्तार
भारत के किसानों की तर्ज पर नेपाल के गन्ना किसान भी राजधानी काठमांडू आकर जम गए हैं। अपने गन्ने के वाजिब मूल्य की मांग करते हुए इन किसानों ने रविवार से यहां डेरा डाला हुआ है। उन्होंने यह कहते हुए सरकार से कोई बातचीत करने से इनकार कर दिया है कि उनके गन्ने का मूल्य वाजिब मूल्य दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है और वे सिर्फ यही चाहते हैं कि सरकार अपना काम करे।
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मंगलवार को गृह मंत्री राम बहादुर थापा ने कुछ दूसरे मंत्रियों और अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि वे गन्ना मिल मालिकों के खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई करें। इस बारे में पत्रकारों के पूछने पर थापा ने कहा- मैं यह नहीं कह सकता कि किसी तरह की कानून सम्मत कार्रवाई होनी चाहिए। कार्रवाई कानून के अनुरूप की जाएगी। इसे करना स्थानीय प्रशासन का काम है।
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वकीलों का कहना है कि मिल मालिकों पर धोखाधड़ी का मामला चलाया जा सकता है। लेकिन यहां पर्यवेक्षकों को ये उम्मीद नहीं है कि सरकार इस हद तक जाएगी। इस साल जनवरी में भी गन्ने का वाजिब मूल्य पाने के लिए किसान आंदोलन पर उतरे थे। तब गृह मंत्रालय ने किसानों का हिसाब ना चुकाने वाले गन्ना मिल मालिकों की गिरफ्तारी का आदेश दिया था। लेकिन असल में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
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किसान संगठनों ने मंगलवार की बैठक के बाद आए सरकारी बयान को ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा है कि वे अपना शांतिपूर्ण विरोध तब तक जारी रखेंगे, जब तक कि उनके बकाये का भुगतान नहीं हो जाता। इसके पहले सोमवार और फिर मंगलवार को किसानों ने उनकी मिल मालिकों के साथ बैठक कराने की सरकार की पेशकश ठुकरा दी थी।
किसान खासकर उद्योग औऱ वाणिज्य मंत्री लेख राज भट्ट के इस बयान से नाराज हो गए हैं कि मिल मालिक आंदोलनकारी किसानों को वास्तविक किसान नहीं मानते। भट्ट ने कहा था कि मिल मालिकों की राय में ये आंदोलन बिचौलिये चला रहे हैं। मंगलवार को अन्नपूर्णा शुगर मिल नामक एक चीनी कारखाने ने भी एक बयान में कहा कि इस आंदोलन में बिचौलियों की भागीदारी है।
किसान नेताओं ने ऐसे बयानों को आंदोलन के चरित्र हनन की कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में किसानों से सहानुभूति रखने वाले लोग भी शामिल हैं, लेकिन ऐसे आरोप बेबुनियाद हैं। विश्लेषकों ने कहा है कि ऐसे आरोप लगाए जाने से दोनों पक्षों के बीच भरोसे का संकट खड़ा हो गया है। इससे हालत और पेचीदा हो गई है।
खुद सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सरलाही स्थित अन्नपूर्णा शुगर मिल पर किसानों का 17 करोड़ (नेपाली) रुपए का बकाया है। नवलपारसी स्थित इंदिरा शुगर मिल पर चार करोड़ 70 लाख, लुम्बिनी शुगर मिल पर 8 करोड़ और श्रीराम शुगर मिल पर 35 करोड़ रुपये बकाया हैं।
सरकार ने मिल मालिकों से बकाये का ब्योरा उपलब्ध कराने और मंगलवार तक बकाया चुकाने का निर्देश दिया था। लेकिन मंगलवार को खुद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मिल मालिकों ने कोई ब्योरा नहीं भेजा। इसके पहले 24 नवंबर को वाणिज्य मंत्री लेख राज भट्ट ने मिल मालिकों के साथ बैठक की थी और किसानों का बकाया चुकाने का आदेश दिया था। लेकिन मिल मालिक ने सरकार की ये बात भी नहीं मानी। वे यही कहते रहे हैं कि भुगतान धीरे-धीरे किया जा रहा है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि महामारी के कारण हो सकता है कि मिल मालिकों को बकाया चुकाने में दिक्कत आ रही हो। अगर ये बात है तो सरकार को बीच में आना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों का पैसा समय पर मिले। किसान नेताओं का भी यही कहना है कि उनका पैसा मिले, यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
गन्ना किसान संघर्ष समिति के संरक्षक राकेश मिश्रा ने कहा है कि सरकार फिलहाल प्रधानमंत्री राहत कोष से किसानों का भुगतान कर सकती है और वह उस रकम को बाद में मिल मालिकों से वसूल सकती है। किसानों ने यह साफ कर दिया है कि बिना अपनी रकम हासिल किए वे अपने गांव नहीं लौटेंगे।