{"_id":"6221ea20ec970229f6135dfd","slug":"faft-s-grey-list-pakistan-remains-in-the-grey-list-for-four-month","type":"story","status":"publish","title_hn":"FATF Grey List: फिर से सभी शर्ते लागू करने में पाकिस्तान नाकाम, जून तक ग्रे सूची में ही रहेगा, जानिए पूरा मामला","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
FATF Grey List: फिर से सभी शर्ते लागू करने में पाकिस्तान नाकाम, जून तक ग्रे सूची में ही रहेगा, जानिए पूरा मामला
Fri, 04 Mar 2022 06:25 PM IST
मेघा चौधरी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,इस्लामाबाद
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,इस्लामाबाद
Published by: मेघा चौधरी
Updated Fri, 04 Mar 2022 06:25 PM IST
सार
पाकिस्तान जून तक अतिरिक्त मानदंडों के तहत कुछ लक्ष्यों को पूरा नहीं करने पर वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण निगरानी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे सूची में रहेगा।
विज्ञापन
इमरान खान और उइगर मुस्लिम
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पाकिस्तान एक बार फिर से सभी शर्ते लागू करने में नाकाम हो गया, जिसके चलते अब वह जून तक एफएटीएफ की ग्रे सूची में रहेगा। पाकिस्तान अतिरिक्त मानदंडों के तहत कुछ लक्ष्यों को पूरा नहीं करने पर वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण निगरानी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे सूची में रहेगा। यह जानकारी शुक्रवार को एक मीडिया रिपोर्ट से मिली। एफएटीएश पूरी दुनिया में मनी लॉन्ड्रिंग, सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और टेरर फाइनेंसिंग पर निगाह रखता है।
विज्ञापन
2018 से ग्रे लिस्ट में है पाकिस्तान
पाकिस्तान जून 2018 से पेरिस स्थित एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में है। पाकिस्तान मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने में विफल रहा है, जिसके कारण आतंकी वित्तपोषण को बढ़ावा मिला। इसे पूरा करने के लिए पाकिस्तान को अक्टूबर 2019 तक कार्य योजना दी गई थी। तभी से एफएटीएफ के आदेशों का पालन नहीं करने पर पाकिस्तान को इस सूची में रखा गया। डॉन अखबार के मुताबित, एफएटीएफ की बैठक का समापन शुक्रवार को होना है। बैठक में पाकिस्तान की समीक्षा होना भी शामिल है।
विज्ञापन
2023 तक लक्ष्य पूरा करने की कोशिश
पाकिस्तान जनवरी 2023 के अंत तक 2021 की कार्य योजना को पूरा करने का लक्ष्य बना रहा है। एफएटीएफ ने अक्टूबर 2021 में पाकिस्तान को 26 वस्तुओं को पूरा करने पर 27 सूत्रीय कार्य योजना की प्रगति को स्वीकार किया था। लेकिन संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित आतंकी समूहों के शीर्ष नेताओं के साथ टेरर फाइनेंसिंग की जांच और सजा दिलाने में लापरवाही बरतने पर पाकिस्तान को बढ़ी हुई निगरानी सूची में रखा गया था।
विज्ञापन
रिपोर्ट के अनुसार उस समय एफएटीएफ के अध्यक्ष मार्कस प्लीयर ने कहा था कि पाकिस्तान को कुल 34 वस्तुओं में से दो कार्य योजनाओं को पूरा करना था। अब पाकिस्तान ने 30 वस्तुओं को बड़े पैमाने पर संबोधित किया है। एफएटीएफ के क्षेत्रिय सहयोगी एशिया पैसिफिक ग्रुप की मनी लॉन्ड्रिंग पर 2021 का कार्य योजना में बहुत सी लापरवाही मिली थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि नई कार्य योजना में सात में से चार आइटम बड़े पैमाने पर संबोधित हुए हैं।
हाल ही में आईएमएफ ने पाकिस्तान को 2018 में एंटी मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद विरोधी वित्तपोषण ने कार्य योजना में अंतिम शेष पूरा करने के लिए कहा था। साथ ही 2021 एएमएल/सीएफटी कार्य योजना के तहत मनी लॉन्ड्रिंग म्यूचुअल इवैल्यूएशन रिपोर्ट पर एशिया पैसिफिक ग्रुप में जो कमियों रह गई थी उनको तुरंत दूर करने के लिए कहा।
जून के अंत तक सराकर ने निर्माण क्षेत्र के लिए कर माफी कार्यक्रम के संबंध में वित्तीय संस्थानों द्वारा एएमएल/सीएफटी नियंत्रणों के कार्यान्वयन की समीक्षा करने के लिए आईएमएफ को प्रतिबद्धता दी है। इसने एपीजी की 2021 की कार्य योजना के कार्यान्वयन के लिए समय-सीमा को पूरा करने का वादा किया है।
बढ़ सकती हैं समस्याएं
पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में बने रहने के साथ, इस्लामाबाद के लिए आईएमएफ, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और यूरोपीय संघ से वित्तीय सहायता प्राप्त करना कठिन होता जा रहा है। इस प्रकार देश के लिए समस्याएं और बढ़ जाती हैं। पाकिस्तान अब तक चीन, तुर्की और मलेशिया जैसे करीबी सहयोगियों की मदद से ब्लैक लिस्ट में शामिल होने से बचता रहा है।
क्या है फएटीएफ
एफएटीएफ की स्थापना 1989 में मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता के लिए अन्य संबंधित खतरों से निपटने के लिए की गई थी। यह एक एक अंतर-सरकारी निकाय है। इसमें वर्तमान में 39 सदस्य हैं, जिनमें दो क्षेत्रीय संगठन - यूरोपीय आयोग और खाड़ी सहयोग परिषद शामिल हैं। भारत भी इसका सदस्य है। बता दें कि एफएटीएफ की सूची में ईरान और उत्तर कोरिया भी शामिल है। इस कारण इन दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने और बाहर से निवेश पाने में परेशानी हो होती है।