करदाताओं पर मार: अब टोक्योवासियों पर आ पड़ा है ओलंपिक खेलों में हुई शाहखर्ची का बोझ
ओलंपिक खेलों का आयोजन बिना दर्शकों की मौजूदगी के हुआ। उस कारण लगभग 82 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ। पहले इतनी आमदनी टिकट बिक्री होने से अंदाजा लगाया गया था। उधर कोरोना वायरस महामारी से बचाव के लिए उपाय पर अतिरिक्त खर्च करने पर पड़े, जिससे आयोजन का कुल बजट काफी बढ़ गया...
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टोक्यो ओलंपिक खेलों के आयोजन पर पहले जितना अनुमान लगाया गया था, उसकी तुलना में असली खर्च बहुत ज्यादा रहा। अब अतिरिक्त खर्च का एक बड़ा हिस्सा जापान के करदाताओं को चुकाना पड़ सकता है। यहां के विशेषज्ञों का कहना है कि यहां जिस तरह की चिंता लोगों में है, उसे देखते हुए आने वाले वक्त में दुनिया के शहरों में ओलंपिक की मेजबानी लेने का आकर्षण खत्म हो सकता है।
ओलंपिक खेलों का आयोजन बिना दर्शकों की मौजूदगी के हुआ। उस कारण लगभग 82 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ। पहले इतनी आमदनी टिकट बिक्री होने से अंदाजा लगाया गया था। उधर कोरोना वायरस महामारी से बचाव के लिए उपाय पर अतिरिक्त खर्च करने पर पड़े, जिससे आयोजन का कुल बजट काफी बढ़ गया। उसके पहले निर्माण कार्यों पर भी अनुमान से कहीं ज्यादा खर्च हुआ था।
जापान ने 2011 में जब टोक्यो ओलंपिक और पैरा-ओलंपिक खेलों की मेजबानी हासिल की थी, तब अनुमान लगाया था कि इन आयोजनों पर 734 अरब येन का खर्च आएगा। लेकिन असल में पिछले दिसंबर तक ही 1.64 ट्रिलियन येन खर्च हो चुके थे। इनमें 96 अरब रुपये वो भी शामिल हैं, जो कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के उपायों पर खर्च हुए।
इस रूप में टोक्यो ओलंपिक का आयोजन 2016 में ब्राजील के रियो द जनेरो और 2012 के लंदन में हुए ओलंपिक खेलों की तुलना में ज्यादा महंगा साबित हुआ है। आरंभिक अनुमान के मुताबिक जापान सरकार पर 221 अरब येन, टोक्यो के स्थानीय प्रशासन पर 702 अरब येन और टोक्यो ओलंपिक खेल आयोजन समिति पर 721 अरब येन का बोझ आया है। इनमें 24 अगस्त से होने वाले पैरा ओलंपिक खेलों के आयोजन का खर्च भी शामिल है। इन खेलों में दर्शकों को आने दिया जाएगा या नहीं, अभी इस बारे में फैसला नहीं हुआ है।
टोक्यो मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी और मुसाशिनो यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर नाओफुमी मासुमोतो ने टोक्यो के अखबार जापान टाइम्स से कहा- ‘आमतौर पर जापान के लोग ओलंपिक खेलों के प्रशंसक माने जाते हैं। लेकिन टोक्यो ओलंपिक अपवाद रहा, जिसे जापान के ज्यादातर लोगों ने नापसंद किया है। इसके पीछे एक बड़ा कारण खर्च का भी रहा है।’ मासुमोतो ने बताया कि ओलंपिक खेलों के आयोजन के लिए जो अनुबंध हुआ था, उसमें ही ये बात सामने आई थी कि आयोजन पर जो घाटा होगा, उसे मेजबान शहर उठाएगा। इसका मतलब है कि अतिरिक्त खर्च का बोझ टोक्योवासियों को उठाना पड़ेगा।
इसके बावजूद जापान में केंद्र सरकार और टोक्यो प्रशासन के बीच खर्च को लेकर टकराव शुरू हो गया है। टोक्यो के गवर्नर युरिको कोइके ने कहा है कि खर्च के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति, केंद्र सरकार, स्थानीय सरकार और आयोजन समिति के बीच फिर से बातचीत होनी चाहिए। जापान में बहुत से लोगों राय यही है कि टोक्यो शहर पर पूरा बोझ डाल देना सही नहीं होगा।
उत्सुनोमिया यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन के प्रोफेसर युजी नाकामुरा ने जापान टाइम्स से कहा- ‘कोरोना वायरस को लेकर आपातकाल की घोषणा केंद्र सरकार ने की थी। इसलिए अतिरिक्त खर्च को पूरी तरह टोक्यो पर थोप देना उचित नहीं होगा।’ टोक्यो के स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि उसके खजाने की सेहत महामारी ने बिगाड़ दी है। ऐसे में उचित होगा कि प्रसारण अधिकारों से होने वाली आमदनी पर निर्भर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति को भी अतिरिक्त खर्च का बोझ उठाना चाहिए। पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर उसने ऐसा नहीं किया, तो भविष्य में दुनियाभर में शहर मेजबानी की पेशकश करने में हिचक सकते हैं।