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पाकिस्तान: विदेशी साजिश के दावे पर घिरे इमरान खान, सच को तोड़ने-मरोड़ने का आरोप

Tue, 05 Apr 2022 06:48 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 05 Apr 2022 06:48 PM IST
सार

राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) ने अपनी बैठक के बाद एक बयान जारी किया था। उसमें डिप्लोमैटिक केबल में इस्तेमाल की गई भाषा पर चिंता जताई गई थी। एनएससी ने कहा कि ये संदेश पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में दखल देने जैसा है...

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Experts say that Pak PM Imran Khan distorted the US cable and claim it Foreign conspiracy in Pakistan
इमरान खान - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के इस दावे पर अब सवाल उठ रहे हैं कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) उनकी सरकार गिराने की विदेशी साजिश से संबंधित दस्तावेजों को गंभीर माना था। ये बैठक 27 मार्च को हुई। उसमें इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार ने उसे मिले एक कूटनीतिक संदेश (डिप्लोमैटिक केबल) को पेश किया। इमरान सरकार का दावा है कि ये दस्तावेज पीटीआई सरकार के खिलाफ विदेश से रची गई साजिश का ठोस सबूत हैं।

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एनएससी ने अपनी बैठक के बाद एक बयान जारी किया था। उसमें डिप्लोमैटिक केबल में इस्तेमाल की गई भाषा पर चिंता जताई गई थी। एनएससी ने कहा कि ये संदेश पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में दखल देने जैसा है। एनएससी ने अपनी उसी बैठक में फैसला किया था कि इस मामले में अमेरिका को एक विरोध पत्र सौंपा जाए।
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एनएससी के इसी बयान का इस्तेमाल करते हुए तीन अप्रैल को नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी ने सरकार के खिलाफ पेश विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को रद्द कर दिया। सूरी के उस निर्णय से पाकिस्तान में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। सूरी के फैसले के पहले इमरान खान सरकार की तरफ से सदन को बताया गया कि ‘एनएससी इस निर्णय पर पहुंची कि अविश्वास प्रस्ताव विदेश में रची गई साजिश का हिस्सा है।’
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पाकिस्तान के मीडिया में चल रही चर्चा में अब कई आलोचकों ने कहा है कि पीटीआई सरकार ने एनएससी के निष्कर्ष को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। यह मांग भी उठी है कि अगर एनएससी की बैठक की कार्यवाही दर्ज हुई, तो उसे सार्वजनिक किया जाए। अखबार द न्यूज में सूत्रों के हवाले से छपी एक रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि क्या एनएससी की बैठक कार्यवाही को लिखित रूप से दर्ज किया गया और क्या उस पर एनएससी के सभी सदस्यों ने दस्तखत किए? विश्लेषकों ने कहा है कि किसी बैठक की कार्यवाही को तभी आधिकारिक समझा जाता है, जब उसमें शामिल सभी सदस्यों ने उस पर दस्तखत किए हों। मीडिया चर्चाओं में दावा किया गया है कि बैठक में शामिल सर्वोच्च सैन्य अधिकारियों ने कार्यवाही पर दस्तखत नहीं किए।

यह दावा भी किया गया है कि एनएससी की बैठक में जिस डिप्लोमैटिक केबल पर चर्चा हुई, वह अमेरिका स्थित पाकिस्तानी राजदूत की तरफ से भेजा गया संदेश था। अमेरिका की तरफ से लिखा गया कोई पत्र बैठक में नहीं रखा गया। ये सवाल तीन अप्रैल से उठाया जा रहा है कि अगर ये मामला इतना गंभीर है, तो सरकार ने एनएससी की बैठक 27 मार्च को जाकर क्यों बुलाई, जबकि यह संदेश आठ मार्च को ही उसे प्राप्त हो गया था?


द न्यूज के मुताबिक उसे कई संबंधित अधिकारियों ने बताया है कि जो संदेश बैठक में रखा गया, उसमें अविश्वास प्रस्ताव का कोई जिक्र नहीं है। इन अधिकारियों ने ध्यान दिलाया है कि सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने हाल में एक सार्वजनिक भाषण अमेरिका से पाकिस्तान के रिश्तों को महत्त्वपूर्ण बताया। यह इस बात का संकेत है कि अविश्वास प्रस्ताव के पीछे कोई विदेशी साजिश होने की बात से पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व सहमत नहीं है।

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