ट्रंप को विशेषज्ञ की सलाह- पाकिस्तान से नजदीकी नासमझी, भारत से दूरी न बनाए अमेरिकी सरकार
- अमेरिकी संसद में विदेशी रिश्तों की परिषद के अध्यक्ष रिचर्ड एन. हास ने दी सलाह
- कहा- पाकिस्तान को रणनीतिक साझेदार बनाना अमेरिका के लिए सिर्फ नासमझी होगी
- भारत से संबंध बेहतर रहेंगे, तभी चीन जैसे देशों से हर स्तर पर मुकाबला संभव होगा
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कश्मीर पर भारत-पाक में चल रहे तनाव और अफगानिस्तान शांति वार्ता के बीच अमेरिका की विदेश नीति मामलों के शीर्ष विशेषज्ञ ने ट्रंप प्रशासन को चेताया है कि वह पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह के रणनीतिक झुकाव या भारत से दूरी न बनाए। विशेषज्ञ ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने यदि इनमें से कोई भी कदम उठाया तो वह नासमझी भरा कदम साबित होगा।
अमेरिकी संसद में विदेशी रिश्तों की परिषद के अध्यक्ष रिचर्ड एन. हास ने भारत और पाक को लेकर अमेरिकी रिश्तों के बारे में पिछले सप्ताह एक लेख लिखा है। लेख में उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान को रणनीतिक साझेदार बनाना अमेरिका के लिए सिर्फ नासमझी होगी।’
हास लिखते हैं कि काबुल में पाकिस्तान एक ऐसी मित्रवत सरकार चाह रहा है जो उसके कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारत को टक्कर दे सके। यह पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए अहम है। हास का यह लेख पहले प्रोजेक्ट सिंडिकेट में प्रकाशित हुआ और इसके बाद यह सीएफआर की वेबसाइस पर भी जारी हुआ है।
हास ने कहा, ‘इस पर अब भी भरोसा नहीं कर सकते हैं कि पाकिस्तान में सरकार पर नियंत्रण रखने वाली पाक सेना और आईएसआई तालिबान पर लगाम लगाएगी या आतंकवाद पर लगाम लगाएगी।’ उन्होंने लिखा, ‘ठीक इसी तरह भारत से दूरी बनाना भी अमेरिका की नासमझी होगी।’
भारत से मिलेंगे दीर्घकालिक लाभ, चीन से मुकाबले को संबंध अहम
अमेरिका में विदेशी संबंध परिषद के अध्यक्ष रिचर्ड हास ने कहा, यह सच है कि भारत में संरक्षणवादी व्यापार नीतियों की परंपरा रही है और अक्सर रणनीतिक मामलों उसका पूरी तरह मदद न करना अमेरिकी नीति निर्माताओं को हताश करता है। लेकिन लोकतांत्रिक भारत जल्द ही चीन को पछाड़कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। वह दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की ओर भी अग्रसर है, ऐसे में उस पर दांव लगाना अमेरिका को एक दीर्घकालिक लाभ देगा।
अमेरिकी विदेश नीति मामलों के शीर्ष विशेषज्ञ ने कहा कि अमेरिका को चीन से मुकाबला करना है और चीन से सामना करने में मदद के तौर पर भारत एक स्वाभाविक साझेदार है। भारत ने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में भागीदारी करने का खुलकर विरोध किया है, जबकि आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने उसे गले लगा लिया है। ऐसे में भारत एक बेहतर साझेदार साबित होगा।’
अमेरिका-तालिबान में अच्छी वार्ता जारी : ट्रंप
अमेरिका को तालिबान के साथ शांति समझौते की उम्मीद है, जिसके बाद वह अपने सैनिकों को अफगानिस्तान से वापस बुलाना शुरू कर देगा। अमेरिका, अफगानिस्तान में अपना दखल बंद करना चाहता है, जहां वह अभी तक एक खरब डॉलर खर्च कर चुका है।