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भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे, मौजूदा पीएम सुगा पर भी पड़ेगा असर
Wed, 23 Dec 2020 03:01 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 23 Dec 2020 03:01 PM IST
सार
सांसदों की पूछताछ के दौरान आबे ने दावा किया कि चेरी ब्लॉसम पार्टियों के आयोजन में कोई अनुचित काम नहीं हुआ। ये पार्टियां 1952 से हर साल प्रधानमंत्री आयोजित करते हैं। इसका आयोजन आम तौर पर वसंत ऋतु में होता है...
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शिंजो आबे
- फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे भ्रष्टाचार के एक मामले में फंस गए हैं। अभियोजकों ने इस मामले में उनसे पूछताछ की है। मामले के जानकारों का कहना है कि इस कांड का असर मौजूदा प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा पर भी पड़ सकता है। आबे ने पिछले अगस्त में खराब सेहत के कारण इस्तीफा दे दिया था।
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जिस मामले में इस हफ्ते आबे से पूछताछ हुई है, उसका संबंध गुप्त राजनीतिक खर्च से है। इस मामले का खुलासा एक स्थानीय राजनीतिक संगठन ने किया है। इस संगठन को ‘सपोर्ट ग्रुप इन जापान’ के नाम से जाना जाता है। आरोप है कि टोक्यो में हर साल होने वाले चेरी ब्लॉसम डिनर पार्टियों में अपने समर्थकों के भाग लेने के दौरान उनके खान-पान का खर्च संदिग्ध ढंग से जुटाया गया। इस खर्च का कोई ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया। ऐसा करना राजनीतिक कोष संबंधी नियमों का उल्लंघन है।
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टोक्यो के अखबार असाही शिंबुन में छपे ब्योरे के मुताबिक आबे के समर्थकों को पश्चिमी जापान में स्थित उनके चुनाव क्षेत्र यामागुची से राजधानी 2015 से पिछले साल तक टोक्यो लाया जाता रहा। उन लोगों ने महंगे होटलों में भोजन के लिए सिर्फ पांच हजार येन (लगभग 36 पाउंड) ही चुकाए। जबकि दो लग्जरी होटलों का कुल बिल पांच वर्षों में दो करोड़ 30 लाख येन का रहा। आबे के सचिव ने पूछताछ के दौरान दावा किया कि बाकी खर्च आबे सर्पोर्ट ग्रुप नामक संगठन ने चुकाया था। आबे सपोर्ट ग्रुप का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री के सेक्रेटरी के हाथ में था, जिन्हें वेतन सरकारी खजाने से मिलता था।
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खबरों के मुताबिक सांसदों की पूछताछ के दौरान आबे ने दावा किया कि चेरी ब्लॉसम पार्टियों के आयोजन में कोई अनुचित काम नहीं हुआ। ये पार्टियां 1952 से हर साल प्रधानमंत्री आयोजित करते हैं। इसका आयोजन आम तौर पर वसंत ऋतु में होता है। इसका मूल उद्देश्य खिलाड़ियों, अन्य मशहूर लोगों और विभिन्न क्षेत्रों में खास योगदान करने वाल नागरिकों को सम्मानित करना था। लेकिन आरोप है कि धीरे-धीरे सरकारें इसका आयोजन अपने समर्थकों को पुरस्कार देने के लिए करने लगीं।
विश्लेषकों ने आशंका जताई है कि इस घोटाले से आबे की विरासत कलंकित हो सकती है। साथ ही इसका असर प्रधानमंत्री सुगा पर पड़ सकता है, जिनका चयन आबे ने ही किया था। सुगा आठ साल तक आबे के मुख्य प्रवक्ता रहे। जब इस घोटाले को लेकर आबे पर पहली बार आरोप लगे थे, तब सुगा ने उनका बचाव किया था।
विपक्षी सांसदों ने आबे से यह बताने की मांग की है कि चेरी ब्लॉसम डिनर पार्टियों के लिए पैसा कहां से आया। उनके यह भी पूछा जा रहा है कि पहले उन्होंने खर्च के अंतर के अलग से भुगतान के आरोप का खंडन क्यों किया था। विपक्ष इस मामले को अपने राजनीतिक अभियान का बड़ा मुद्दा बनाने की योजना बना रहा है।
साथ ही ताजा जांच ऐसे समय उभरा है, जब सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के अध्यक्ष का चुनाव होने वाला है। सुगा अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हैं। इस विवाद के कारण जनमत सर्वेक्षणों में सुगा की लोकप्रियता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। एक महीना पहले सुगा मंत्रिमंडल के समर्थन का स्तर 56 फीसदी था, जो अब गिरकर 39 फीसदी पर आ गया है।