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पासवर्ड के चोरी या कमजोर होने से दुनिया में हर चौथे यूजर की जानकारी से छेड़छाड़

Wed, 22 Jan 2020 10:50 PM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: आसिम खान Updated Wed, 22 Jan 2020 10:50 PM IST
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Every fourth information in the world was tampered with due to theft or weakening of password
सांकेतिक तस्वीर

इंटरनेट की दुनिया में आम आदमी की अहम जानकारियों से छेड़छाड़ के मामले अब गंभीर स्थिति में पहुंच चुके हैं। वजह है आपका पासवर्ड। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के एक नए अध्ययन के मुताबिक दुनियाभर में डाटा से धोखाधड़ी के हर पांच में से चार मामले कमजोर पासवर्ड या फिर पासवर्ड के चोरी होने की वजह से सामने आ रहे हैं। 

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यही नहीं साइबर क्राइम की वजह से 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर मिनट तकरीबन 20 करोड़ रुपये की चपत लगने की आशंका जताई गई है। इसमें से 80 फीसदी अपराध की वजह साइबर क्राइम से संबंधित होगा। विश्व आर्थिक मंच ने 2020 में अपनी सालाना बैठक में इस अध्ययन की रिपोर्ट जारी करते हुए स्पष्ट तौर पर कहा है कि अगर खुद को और कारोबार को ज्यादा सुरक्षित रखना है तो पासवर्ड से मुक्त होना ही विकल्प होगा। 
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अध्ययन में यह भी कहा गया है कि आपकी किसी भी जानकारी को प्रमाणित करने के लिए पिन, पासवर्ड या याद रखने वाली जो भी चीजें हैं, वह लोगों के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुका है। ऐसे पासवर्ड या पिन को बरकरार रखना बड़ा ही चुनौतीपूर्ण है।
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पासवर्ड रीसेट करने में ही सवा सात करोड़ खर्च का अनुमान
अध्ययन के मुताबिक, आईटी हेल्प डेस्क की लागत का तकरीबन 50 फीसदी सिर्फ पासवर्ड रीसेट (दोबारा बनाने) करने में ही खर्च हो जाने का अनुमान जताया गया है। यह कंपनियों पर तकरीबन सवा सात करोड़ रुपये सालाना अतिरिक्त बोझ है।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस या बिजनेस लर्निंग ज्यादा कारगर हथियार
वैश्विक मंच ने कहा, पासवर्ड नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि हमारी डिजिटल दुनिया में सभी सुरक्षा बाधाओं को हटाना नहीं है। इसके बजाय आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग जैसी नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल करने से यूजर्स का समय और कंपनी का पैसा बचाया जा सकता है।


इन पांच तकनीक की वकालत
अध्ययन में कंपनियों को बगैर पासवर्ड के सर्वश्रेष्ठ पांच तकनीक के  इस्तेमाल करने की वकालत की गई है। ये हैं बायोमीट्रिक्स (आंख, उंगली आधारित पहचान), बिहैविओरल एनालिटिक्स (व्यवहार आधारित पहचान), जीरो नॉलेज प्रूफ्स (क्रिप्टोग्राफी में इस्तेमाल), क्यू आर कोड्स (बार कोड आधारित) और सिक्यूरिटी कीज (दो तरह के कारकों पर आधारित पहचान प्रणाली से संबंधित उपकरण)। 

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