US: ट्रंप प्रशासन की रूस सीमा पर सैन्य मदद में कटौती की योजना पर विवाद, यूरोपीय-बाल्टिक देशों ने जताई नाराजगी
ट्रंप प्रशासन की योजना के तहत रूस से सटे यूरोपीय देशों की सैन्य सहायता में कटौती को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पेंटागन के प्रस्ताव में लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया को मिलने वाली ट्रेनिंग, हथियार और खुफिया मदद प्रभावित हो सकती है। इस कदम से बाल्टिक देश और अमेरिकी सांसद नाराज हैं।
विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब एक और मामले में चर्चा तेज होती जा रही है। ये चर्चा तब शुरू हुई जब ट्रंप के प्रशासन द्वारा रूस की सीमा से लगे यूरोपीय देशों के लिए सुरक्षा सहायता में कटौती की योजना को लेकर शुक्रवार को भ्रम की स्थिति बन गई। मामले में अधिकतर देश यहां तह कि अमेरिकी सांसद भी इस बात पर नाराजगी जता रहे है। खासतौर पर लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया जैसे बाल्टिक देश। हालांकि दूसरी तरफ इन देशों का ये भी कहना है अभी उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।
बता दें कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के एक प्रस्ताव के अनुसार अमेरिका उन कार्यक्रमों के लिए फंडिंग कम करना चाहता है जो इन देशों को सैन्य ट्रेनिंग, हथियार और खुफिया सहायता देते हैं। इसमें दो अहम कार्यक्रम शामिल हैं, पहला धारा 333 जिसके तहत अमेरिकी सेना दूसरे देशों की सेनाओं को ट्रेनिंग और उपकरण देती है। वहीं दूसरा बाल्टिक सुरक्षा पहल जो बाल्टिक देशों को अमेरिकी हथियार खरीदने और खासतौर पर रूस के खिलाफ अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में मदद करता है। हालांकि यह साफ नहीं हुआ है कि कटौती कितनी होगी, लेकिन अनुमान है कि यह सैकड़ों मिलियन डॉलर तक हो सकती है।
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चर्चाओं के बीच बाल्टिक देशों की नाराजगी
पेंटागन के इस फैसले के बाद लिथुआनिया के पूर्व विदेश मंत्री गेब्रिएलियस लैंड्सबर्गर ने कहा कि इस तरह की कटौती से रूस के खिलाफ नाटो की ताकत और भरोसा कमजोर होगा। वहीं लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया इन तीनों देशों ने कहा है कि उन्हें अब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन वे अमेरिकी रक्षा मंत्रालय से बातचीत कर रहे हैं। इसके साथ ही एस्टोनिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका की मदद अब उनके बजट का छोटा हिस्सा है क्योंकि उन्होंने खुद अपनी सैन्य खर्च बढ़ा दिया है। बाल्टिक देश और पोलैंड 2026 तक अपनी GDP का 5% रक्षा पर खर्च करने की योजना बना रहे हैं।
अमेरिकी सांसदों में खासा नाराजगी
इस फैसले के बाद ऐसा नहीं है कि केवल इन देशों में नाराजगी है। अमेरिकी कांग्रेस के कई सांसदों ने भी इस फैसले पर चिंता जताई है। रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन ने इसे शर्मनाक और विनाशकारी फैसला बताया। डेमोक्रेट सांसद जीन शहीन ने कहा कि यह कदम रूस को गलत संदेश देगा। डेमोक्रेट डिक डर्बिन और रिपब्लिकन चक ग्रासली ने एक प्रस्ताव दिया है जिससे बाल्टिक सिक्योरिटी इनिशिएटिव को कानून बनाकर स्थायी किया जा सके।
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कितना पैसा जा चुका है?
गौरतलब है कि अमेरिका की तरफ से बाल्टिक सुरक्षा पहल के तहत 2018 से 2024 तक करीब $377 मिलियन दिए जा चुके हैं। धारा 333 से यूरोप को 2018 से 2022 के बीच $1.6 बिलियन मिले। हालांकि विदेश मंत्रालय की ओर से मिलने वाली करीब $7 बिलियन सालाना की सहायता अभी प्रभावित नहीं हुई है।