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यूरोपियन यूनियन: लॉबिस्ट्स की बड़ी जीत, कॉरपोरेट जवाबदेही का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में गया

Tue, 25 May 2021 06:58 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 25 May 2021 06:58 PM IST
सार

यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ने सोमवार को पुष्टि की कि फिलहाल मानवाधिकार और पर्यावरण संरक्षण संबंधी नियमों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह बनाने के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि गर्मियों के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। उसने कहा कि ऐसे किसी प्रस्ताव पर अमल से पहले व्यापक तैयारियों की जरूरत है...

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European Commission put on hold the proposal violations of human rights and environmental conservation regulations
यूरोपीय संघ - फोटो : pixabay

विस्तार

कॉरपोरेट लॉबिस्ट्स ने यूरोप में एक बड़ी जीत हासिल की है। यूरोपीय आयोग उस प्रस्ताव को फिलहाल टालने के लिए राजी हो गया है, जिसके जरिए कंपनियों को मानवाधिकार और पर्यावरण संरक्षण संबंधी नियमों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह बनाने का इरादा जताया गया था। पहले की योजना के मुताबिक जून से इस प्रस्ताव पर अमल शुरू किया जाना था। अगर ये प्रस्ताव अमल में आ जाता, तो यूरोपीय कंपनियों के लिए चीन के शिनजियांग प्रांत में कथित जबरिया श्रम और कोका की खेती में बाल मजदूरों के इस्तेमाल से जुड़े कारोबार से दूर रहने की मजबूरी बन जाती। यूरोपीय कंपनियां इस प्रस्ताव के खिलाफ जोरदार लॉबिंग में जुटी थीं। आखिरकार उन्हें फौरी कामयाबी मिल गई है।

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लेकिन इससे कॉरपोरेट जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए अभियान चलाने वाले संगठनों को निराशा हाथ लगी है। जो प्रस्ताव पेश किया गया था, उसमें कंपनी संचालन के नियम और निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) के कर्त्तव्यों से जुड़े प्रावधान भी शामिल थे। कंपनियों की दलील थी कि सप्लाई चेन के पूरे दायरे में कारोबार संबंधी मानदंडों के पालन के लिए उन्हें मजबूर करना उचित नहीं है। उधर यूरोपियन यूनियन (ईयू) के सदस्य कुछ देश कंपनी संचालन में सरकारी हस्तक्षेप की सोच से सहमत नहीं हुए।
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यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ने सोमवार को पुष्टि की कि फिलहाल इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि गर्मियों के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। उसने कहा कि ऐसे किसी प्रस्ताव पर अमल से पहले व्यापक तैयारियों की जरूरत है, ताकि सभी पहलुओं पर गौर किया जा सके और अलग-अलग विचारों में तालमेल बनाया जा सके।
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लेकिन गैर-सरकारी संगठनों ने यूरोपीय आयोग के इस रुख की कड़ी आलोचना की है। गैर सरकारी संस्था ग्लोबल विटनेस के कार्यकर्ता रिचर्ड गार्डिनर ने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा- ‘आयोग फिर से उसी पुराने नजरिए की तरफ से लौट गया है, जिसमें अल्पकालिक मुनाफे को तरजीह दी जाती है। इसी नजरिए के कारण हम जलवायु परिवर्तन की समस्या झेल रहे हैं।’ इसके पहले सामजिक कार्यकर्ताओं और यूरोपीय संसद के प्रगतिशील सदस्यों ने आयोग को कॉरपोरेट हितों के आगे ना झुकने की चेतावनी दी थी। ग्रीन पार्टी की सांसद हेइदी हौताला ने कहा था- ‘यूरोपीय संसद की इस मामले में स्पष्ट सोच है कि वह यूरोपीय आयोग से क्या चाहती है। हम वैश्विक मानक पेश करने की तैयारी में है। अगर इस मामले में आयोग झुक गया तो यह बेहद हानिकारक होगा।’


वैसे कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं को अभी भी आशा है कि देर-सबेर ईयू प्रस्तावित नियमों को लागू करेगा। ऑक्सफेम ईयू के कार्यकर्ता मार्क ओलिविर हरमन ने कहा कि ये पहल यूरोपीय ग्रीन डील का अहम हिस्सा है। इसलिए हमें उम्मीद है कि आयोग इस लक्ष्य पर निगाह बनाए रखेगा। लेकिन मुक्त व्यापार के समर्थक नॉर्डिक देश ऐसे किसी हस्तक्षेप के लिए भविष्य में भी सहमत होंगे, इसकी संभावना कम है। इन देशों ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह ठुकरा देने की मांग की है। डेनमार्क के उद्योग मंत्री ने कहा कि ये प्रस्ताव एक गलत रास्ते की तरफ ले जाता है। हमें कंपनियों और उनके शेयरहोल्डर्स की शक्ति कम नहीं करनी चाहिए, जो सही दिशा में काम कर रहे हैं।

मानव अधिकार और पर्यावरण संरक्षण संबंधी नियमों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह बनाने का इरादा जताया गया था
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