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'तीन में से एक महिला होती है यौन हिंसा का शिकार'
Updated Fri, 21 Jun 2013 08:06 AM IST
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दुनिया भर में हर तीन में से एक से ज्यादा महिला को शारीरिक या यौन हिंसा का शिकार होना पड़ा है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य समूहों की रिपोर्ट में यह कहा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की हत्या के 38 फ़ीसदी मामलों में हत्यारे उनके साथी ही होते हैं और इस तरह की हिंसा अवसाद और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बढ़ाने का एक मुख्य कारण है।
सुनियोजित अध्ययन
विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख मार्गरेट चान कहती हैं कि महिलाओं के खिलाफ़ हिंसा “महामारी के स्तर की एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या” थी।
शोध में दुनिया भर में ऐसे हमलों पर चुप रहने की प्रवृत्ति को भी रोकने की बात कही गई है।
शोध में यह भी कहा गया है कि दुनिया भर में स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा दुर्व्यवहार को रोकने के लिए नए दिशानिर्देशों को लागू किया जाना चाहिए ताकि पीड़ितों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।
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साथी और गैर-साथी हिंसा पर रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन, लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन और दक्षिण अफ्रीकी आयुर्विज्ञान शोध परिषद द्वारा जारी की गई है।
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इसके शोधकर्ताओं का कहना है कि विश्व भर के आंकड़ों का यह पहला सुनियोजित अध्ययन है। इसमें महिलाओं और लड़कियों के प्रति शारीरिक और मानसिक दुर्व्यवहार के असर को विस्तार से बताया गया है।
निष्कर्ष
शोध के मुख्य निष्कर्ष ये हैं:
-नज़दीकी साथी द्वारा हिंसा दुर्व्यवहार सबसे आम है। दुनिया भर में 30 फ़ीसदी महिलाएं इससे प्रभावित होती हैं।
-कत्ल होने वाली 38 फ़ीसदी महिलाओं की हत्या उनके साथियों द्वारा की जाती है।
-अपने साथी द्वारा शारीरिक या यौन दुर्व्यवहार की शिकार होने वाली 42 फीसदी महिलाएं इससे चोटिल हो जाती हैं।
-किसी गैर के हमले का शिकार होने वाली महिलाओं के अवसाद और व्यग्रता का शिकार होने की आशंका उन महिलाओं के मुकाबले 2।6 फ़ीसदी ज़्यादा होती है जिन्होंने हिंसा का सामना नहीं किया।
-जिन्हें अपने साथी द्वारा दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है उन्हें यह दिक्कतें होने की आशंका दोगुनी होती है।
-पीड़ितों को शराबखोरी, गर्भपात, यौन संक्रमित रोग और एचवाईवी होने की आशंका अधिक रहती है।
रिपोर्ट की सहलेखिका प्रोफ़ेसर शारलेट वॉट्स कहती हैं, “यह नए आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के प्रति हिंसा बेहद आम है। हमें महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी इस वैश्विक समस्या के अंतर्निहित कारकों को दूर करने के लिए उस पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है।”
शोधपत्र यह भी उल्लेख करता है कि “कलंक लगने का डर” बहुत सी महिलाओं को यौन हिंसा की शिकायत करने से रोकता है।
शोध इस बात पर ज़ोर देता है कि दुनिया भर में अधिकारियों को इस मुद्दे को “ज़्यादा गंभारता” से लेने की ज़रूरत है।
स्वास्थ्य कर्मियों को बेहतर प्रशिक्षण देने की ज़रूरत है ताकि वह पहचान सकें कि कब महिला के हिंसा का शिकार होने की आशंका है और फिर तुरंत प्रतिक्रिया कर सकें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वह अन्य संगठनों से मिलकर नए दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन का काम जून के अंत तक शुरू कर देगा।
अपने साथी द्वारा हिंसा का शिकार होने वाली महिलाएं (%)
कम और मध्यम आय क्षेत्र
अफ्रीका (बोट्सवाना, कैमरून, डी आर कोंगो, इथियोपिया, केन्या, लीसोथो, लाइबेरिया, मलावी, मोज़ांबीक़, नामीबिया, रवांडा, साउथ अफ़्रीका, स्वाज़ीलैंड, युगांडा, तन्ज़ानिया, ज़ांबिया, ज़िंबाब्वे) 36.6%
अमेरिका (ब्राज़ील, चिली, कोलंबिया, कोस्टा रिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, हैती, होंडुरास, जमैका, मैक्सिको, निकारागुआ, पैरागुए, पेरू, बोलिविया) 29.8%
पूर्वी भूमध्यसागरीयक्षेत्र (मिस्र, ईरान, ईराक, जॉर्डन, फि़लीस्तीनी क्षेत्र) 37.0%
यूरोप (अल्बानिया, अज़रबेजान, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोलडोवा गणतंत्र, रोमानिया, रूस, सर्बिया, तुर्की, यूक्रेन) 25.4%
दक्षिण-पूर्व एशिया (भारत, बांग्लादेश, पूर्वी तिमोर, बर्मा, श्रीलंका, थाइलैंड) 37.7%
पश्चिमी प्रशांत महासागरीय (कंबोडिया, चीन, फ़िलीपीन्स, समोआ, वीयतनाम) 24.6%
उच्च आय क्षेत्र
(ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, क्रोशिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क, फ़िनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, हॉंगकॉंग, आइसलैंड, आयरलैंड, इसराइल, जापान, नीदरलैंड्स, न्यूज़ीलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड, ब्रिटेन, अमेरिका) 23.2%
(स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन, स्वास्थ्य विज्ञान और ऊष्ण कटिबंधीय दवाओं की लंदन संस्था, और दक्षिण अफ्रीकी आयुर्विज्ञान शोध परिषद)