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DNA की 'खास' जानकारी के लिए 3 वैज्ञानिकों को रसायन का नोबेल

Thu, 08 Oct 2015 10:49 AM IST
Updated Thu, 08 Oct 2015 10:49 AM IST
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scientists win nobel chemistry award for work on dna repair

इस साल के रसायन शास्त्र का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों स्वीडिश टॉमस लिंडाल, अमेरिकी पॉल मॉडरिश और तुर्की मूल के अमेरिकी अजीज सैंकर को दिया जाएगा। इन तीनों वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में यह बताया है कि कैसे कोशिकाएं क्षतिग्रस्त डीएनए की मरम्मत करती हैं।

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रॉयल स्वीडिश अकेडमी ऑफ साइंसेज का कहना है कि इन वैज्ञानिकों के अध्ययन से इस बात का पता चला कि एक जीवित कोशिका कैसे काम करती है। इनके शोध के आधार पर ही कैंसर जैसी घातक बीमारी के नए तरीके से इलाज को विकसित किया जा रहा है।
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नोबेल ज्यूरी ने कहा कि इन तीनों वैज्ञानिकों का अध्ययन मेडिसिन के लिए क्रांतिकारी है। इन्होंने बताया कि कैसे शरीर खुद ही डीएनए में बदलाव को ठीक करता है। डीएनए में बदलाव के कारण ही इंसान बीमार और बूढ़ा होता है।
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इन वैज्ञानिकों के व्यवस्थित अध्ययन से कई वंशानुगत बीमारियों के बेहद सूक्ष्म कारणों के बारे में भी पता चला। इन्होंने कैंसर और बूढ़ा होने की प्रक्रिया के बारे में दुनिया को अनमोल जानकारी दी।

तीनों विजेताओं को मिलेंगे 9.80 लाख अमेरिकी डॉलर

scientists win nobel chemistry award for work on dna repair

लिंडाल ने इस रिपेयर किट के एंजाइमों के बारे में पता लगाया जबकि सैंकर ने अल्ट्रावायलेट रेडिएशन के जरिए क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के ठीक होने के बारे में बताया। वहीं, मॉडरिश ने बेमेल मरम्मत के बारे में पता लगाया।

नोबेल कमेटी ने कहा कि वर्ष 2015 के नोबेल विजेताओं के कामों से न केवल इस बारे में जानकारी और गहरी हुई कि इंसानी शरीर कैसे काम करता है बल्कि इससे जीवन रक्षक दवाइयों के आविष्कार का भी रास्ता दिखा है।

77 वर्षीय लिंडाल कैंसर इंस्टीट्यूट यूके के मानद निदेशक हैं। वह फ्रैंकिस क्रिक इंस्टीट्यूट के मानद ग्रुप लीडर भी हैं। वर्ष 1946 में जन्मे और हार्वर्ड हघेस मेडिकल इंस्टीट्यूट में शोधकर्ता मॉडरिश ड्यूक यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसीन, डर्बन में प्रोफेसर हैं।

इसके अलावा 69 वर्षीय सैंकर यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलीना के स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर हैं। 10 दिसंबर को एक समारोह में इन वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार के तहत मिलने वाली करीब 9.80 लाख अमेरिकी डॉलर की राशि तीनों विजेताओं में बराबर-बराबर बांटी जाएगी।

क्या होता है डीएनए

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डीएनए यानी डिऑक्सीरिबो न्यूक्लीइक एसिड इंसान समेत तकरीबन हर जीव की कोशिकाओं के गुणसूत्रों में पाया जाने वाला आनुवंशिक पदार्थ होता है। डीएनए में चार मूलभूत रासायनिक संरचना होती है, जिसके आधार पर संबंधित जीव के गुणों का निर्धारण होता है।

कड़ी धूप और अन्य पर्यावरणीय कारकों के कारण भी डीएनए क्षतिग्रस्त हो सकता है लेकिन कोशिकाओं में एक प्रोटीन आधारित रिपेयर किट होता है जो क्षतिग्रस्त डीएनए की मरम्मत कर देता है। इन तीनों वैज्ञानिकों ने इसी मरम्मत प्रक्रिया के बारे में बताया है।

अमीरात के सामाजिक कार्यकर्ता को मानवाधिकार का ‘नोबेल’

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संयुक्त अरब अमीरात के मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद मंसूर को ‘मानवाधिकारों के लिए नोबेल पुरस्कार’ कहे जाने वाले मार्टिन एन्नाल्स पुरस्कार के लिए चुना गया है। मंसूर को अपना देश छोड़ने की मनाही है। वह संयुक्त अरब अमीरात में अभिव्यक्ति की आजादी तथा और अधिक राजनीतिक एवं नागरिक अधिकार दिए जाने के लिए 2006 से मुहिम चला रहे हैं। देश में व्याप्त सामाजिक समस्याओं को उजागर करने के कारण जेल में बंद दो ब्लॉगरों की आजादी में अहम भूमिका निभाई।

मंसूर को मार्टिन एन्नाल्स पुरस्कार से मंगलवार को नवाजा गया। इस पुरस्कार का नाम एमनेस्टी इंटरनेशनल के पूर्व महासचिव के नाम पर रखा गया है। यह पुरस्कार मानवाधिकारों की रक्षा करने वाले उस व्यक्ति को दिया जाता है जो बड़े निजी जोखिम के बावजूद मानवाधिकारों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता जताता है।

मार्टिन एन्नाल्स फाउंडेशन ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि अहमद मंसूर संयुक्त अरब अमीरात में उन कुछ आवाजों में से एक हैं जो देश में मानवाधिकार मुहैया कराने की दिशा में हो रहे विकास का विश्वसनीय और स्वतंत्र मूल्यांकन मुहैया कराती हैं। मंसूर को चुनाव बहिष्कार की अपील करने, सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े होने और यूएई के नेताओं का अपमान करने के लिए इंटरनेट का प्रयोग करने के मामले में 2011 में तीन साल कारावास की सजा सुनाई गई थी। उनके खिलाफ इस मामले में सुनवाई की प्रक्रिया को मानवाधिकार समूहों ने पूरी तरह अनुचित ठहराया था। इस मामले में मंसूर के साथ चार अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था।

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