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साढ़े तीन लाख रुपये में बिक सकती है चरखे के बारे में लिखी गई महात्मा गांधी की चिट्ठी
भाषा, बोस्टन
Updated Thu, 30 Aug 2018 06:14 PM IST
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महात्मा गांधी
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चरखे के बारे में लिखी गई महात्मा गांधी की एक चिट्ठी साढ़े तीन लाख रुपये में नीलाम हो सकती है। अमेरिका के नीलामी घर आरआर ऑक्शन ने यह जानकारी दी है। नीलामी घर के मुताबिक महात्मा गांधी द्वारा चरखे के महत्त्व पर जोर देते हुए लिखी गई एक बिना तारीख वाली चिट्ठी 5,000 डॉलर में नीलाम हो सकती है।
नीलामी घर ने एक बयान में बताया कि यशवंत प्रसाद नाम के किसी व्यक्ति को लिखा गया यह पत्र गुजराती में है और यह “बापू का आशीर्वाद” से हस्ताक्षरित है।
गांधी ने पत्र में लिखा है, “हमने जो चरखे के बारे में सोचा था वह हो गया।”
उन्होंने लिखा, “हालांकि तुमने जो कहा वह सही है : यह सब कुछ करघों पर निर्भर करता है।”
गांधी द्वारा चरखे का उल्लेख अत्याधिक महत्त्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने इसे आर्थिक स्वतंत्रता के प्रतीक के तौर पर अपनाया था।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीयों को सहयोग के लिए उन्हें हर दिन खादी कातने के लिए समय देने के लिए प्रेरित किया था।
उन्होंने स्वदेशी आंदोलन के तहत सभी भारतीयों को अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कपड़ों की बजाए खादी पहनने के लिए प्रोत्साहित किया था।
चरखा और खादी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रतीक बन गए थे।
ऑनलाइन नीलामी 12 सितंबर को समाप्त हो जाएगी।
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नीलामी घर ने एक बयान में बताया कि यशवंत प्रसाद नाम के किसी व्यक्ति को लिखा गया यह पत्र गुजराती में है और यह “बापू का आशीर्वाद” से हस्ताक्षरित है।
गांधी ने पत्र में लिखा है, “हमने जो चरखे के बारे में सोचा था वह हो गया।”
उन्होंने लिखा, “हालांकि तुमने जो कहा वह सही है : यह सब कुछ करघों पर निर्भर करता है।”
गांधी द्वारा चरखे का उल्लेख अत्याधिक महत्त्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने इसे आर्थिक स्वतंत्रता के प्रतीक के तौर पर अपनाया था।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीयों को सहयोग के लिए उन्हें हर दिन खादी कातने के लिए समय देने के लिए प्रेरित किया था।
उन्होंने स्वदेशी आंदोलन के तहत सभी भारतीयों को अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कपड़ों की बजाए खादी पहनने के लिए प्रोत्साहित किया था।
चरखा और खादी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रतीक बन गए थे।
ऑनलाइन नीलामी 12 सितंबर को समाप्त हो जाएगी।