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यूरोपः जलवायु परिवर्तन का असर कम नहीं तो मारे जाएंगे डेढ़ लाख लोग

Sat, 05 Aug 2017 04:10 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
बीबीसी, हिन्दी Updated Sat, 05 Aug 2017 04:10 PM IST
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Impact of climate change will not be less then 1.5 million people killed in Europe
यूरोप

वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने के लिए जल्द ही कुछ नहीं किया गया तो इस सदी के अंत तक यूरोप में ख़राब मौसम के कारण हर साल एक लाख 52 हज़ार लोग मारे जाएंगे।

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'लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ' जर्नल में छपे एक अध्ययन के मुताबिक, ये संख्या मौजूदा अनुमान से 50 गुना ज़्यादा है। इसमें कहा गया है कि दक्षिणी यूरोप, गर्म हवाओं से सबसे अधिक प्रभावित होगा और यहां मौसम जनित 99 प्रतिशत मौतों के पीछे गर्म हवाएं कारण होंगी।
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विशेषज्ञों ने अध्ययन ने नतीज़ों को चिंताजनक बताया है। अगर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए कुछ नहीं किया गया और ख़राब मौसम के असर को कम करने के लिए नीतियों में बदलाव नहीं किया गया तो और मुश्किल खड़ी होगी। इस हालत में, यूरोपीय कमीशन के ज्वाइंट रिसर्च सेंटर के अनुसारः-
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-ख़राब मौसम के कारण 1981 से 2010 के बीच होने वाली प्रति वर्ष 3,000 मौतों के मुक़ाबले, 2017 से 2100 के बीच प्रति वर्ष 1,52,000 मौतें होने की आशंका है।

-प्राकृतिक आपदा के कारण 2100 तक यूरोप में हर तीन में से दो लोग प्रभावित होंगे। जबकि इस सदी की शुरुआत में ये आंकड़ा 20 में एक था।

-हर साल तटीय इलाक़ों में बाढ़ आने की वजह से मौतों में भारी इजाफ़े की आशंका है और ये संख्या इस सदी के अंत में 233 तक जा सकती है जबकि सदी की शुरुआत में ये संख्या प्रति वर्ष छह थी।

शोधकर्ताओं ने यूरोपीय संघ के 28 देशों में ख़राब मौसम से संबंधित सात ख़तरनाक प्राकृतिक घटनाओं का अध्ययन किया जैसे- गर्म हवाएं, ठंड, जंगली आग, सूखा, नदी और तटीय बाढ़ और आंधी-तूफ़ान।उन्होंने 1981 से 2010 के बीच आपदाओं के रिकॉर्ड और आबादी पर प्रभाव का विश्लेषण किया। इसमें आबादी वृद्धि और उनके विस्थापन को भी ध्यान में रखा गया है।


शोधकर्ता जोवानी फ़ॉर्जिएरी के अनुसार, "अगर ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर आपात कदम नहीं उठाए गए तो इस सदी के अंत तक 35 करोड़ यूरोपियों पर हर साल आने वाले प्राकृतिक आपदा का ख़तरा पैदा हो जाएगा।"

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