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अपराधों की कुंजी है दिमाग़ का नक्शा?
बीबीसी हिंदी
Updated Sat, 27 Oct 2012 03:39 PM IST
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ब्रिटेन में हुए एक नए शोध के मुताबिक जिन किशोर लड़कियों में व्यवहार
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संबंधी गड़बड़ियां पाई जाती हैं, उनके दिमाग़ की बनावट सामान्य किशोरियों
के मुकाबले काफी अलग होती है। ऐसे ही बच्चे आगे चलकर अक्सर अराजक हो जाते
हैं।
40 किशोरियों के दिमाग का अध्ययन करने वाले मनोचिकित्सकों के मुताबिक पीड़ित बच्चियों के दिमाग का वो हिस्सा जो किसी व्यक्ति के भीतर उठने वाली भावनाओं और अनुभूतियों की समझ पैदा करता है, स्वस्थ बच्चियों की तुलना में बिल्कुल अलग था।
अराजकता की जड़
दरअसल, यही वो स्थिति होती है जब दिमागी तौर से विकृत बच्चे जवान होकर असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं।
इन लोगों में भावनाओं और अनुभूतियों का एहसास विकृत होता है और यही वजह है कि इनका सामाजिक व्यवहार सामान्य नहीं रहताद्घ इससे पहले किशोर लड़कों पर किए गए अध्ययन भी इसी तरफ इशारा करते हैं।
शोध करने वाले इटली और ब्रिटेन के मनोचिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक जिन बच्चों में व्यवहार जनित समस्याओं के लक्षण हों, शुरुआत से ही अगर उनके दिमाग की स्कैनिंग की जाए तो समय रहते उन्हें सही इलाज मिल सकता है। एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में 100 में से करीब 5 बच्चे मानसिक विकृतियों के शिकार होते हैं।
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क्या कहता है शोध
शोध के दौरान किशोरियों के दिमाग के स्कैन में ये बात सामने आई कि मानसिक तौर पर विकृत बच्चों के दिमाग के भीतर का एक खास हिस्सा जिसे 'एमिग्डला’ कहते हैं वो सामान्य की तुलना में छोटा था। 'एमिगडला' दिमाग का वो हिस्सा होता है जो भय और डर को महसूस कराता है।
शोधकर्ता डॉक्टर एंडी कैडलर का कहना है कि, “बच्चों के दिमाग में इस तरह की विकृति जन्मजात भी हो सकती है और जन्म के बाद भी, बच्चे को जन्म के बाद भी अगर बहुत ज्यादा तनावपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़े तो दिमाग़ में इस तरह के बदलाव पैदा हो सकते हैं।”
40 किशोरियों के दिमाग का अध्ययन करने वाले मनोचिकित्सकों के मुताबिक पीड़ित बच्चियों के दिमाग का वो हिस्सा जो किसी व्यक्ति के भीतर उठने वाली भावनाओं और अनुभूतियों की समझ पैदा करता है, स्वस्थ बच्चियों की तुलना में बिल्कुल अलग था।
अराजकता की जड़
दरअसल, यही वो स्थिति होती है जब दिमागी तौर से विकृत बच्चे जवान होकर असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं।
इन लोगों में भावनाओं और अनुभूतियों का एहसास विकृत होता है और यही वजह है कि इनका सामाजिक व्यवहार सामान्य नहीं रहताद्घ इससे पहले किशोर लड़कों पर किए गए अध्ययन भी इसी तरफ इशारा करते हैं।
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शोध करने वाले इटली और ब्रिटेन के मनोचिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक जिन बच्चों में व्यवहार जनित समस्याओं के लक्षण हों, शुरुआत से ही अगर उनके दिमाग की स्कैनिंग की जाए तो समय रहते उन्हें सही इलाज मिल सकता है। एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में 100 में से करीब 5 बच्चे मानसिक विकृतियों के शिकार होते हैं।
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क्या कहता है शोध
शोध के दौरान किशोरियों के दिमाग के स्कैन में ये बात सामने आई कि मानसिक तौर पर विकृत बच्चों के दिमाग के भीतर का एक खास हिस्सा जिसे 'एमिग्डला’ कहते हैं वो सामान्य की तुलना में छोटा था। 'एमिगडला' दिमाग का वो हिस्सा होता है जो भय और डर को महसूस कराता है।
शोधकर्ता डॉक्टर एंडी कैडलर का कहना है कि, “बच्चों के दिमाग में इस तरह की विकृति जन्मजात भी हो सकती है और जन्म के बाद भी, बच्चे को जन्म के बाद भी अगर बहुत ज्यादा तनावपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़े तो दिमाग़ में इस तरह के बदलाव पैदा हो सकते हैं।”