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यूरोप में रिकॉर्डतोड़ हीटवेव: तेजी से बदल रही महाद्वीप की जलवायु, बदले मौसम पर वैज्ञानिकों ने क्या कहा?

Sun, 28 Jun 2026 05:05 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, लंदन/पेरिस।
अमर उजाला नेटवर्क, लंदन/पेरिस। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 28 Jun 2026 05:05 AM IST
सार

 यूरोप इस वर्ष लगातार दूसरी बार अभूतपूर्व हीटवेव की चपेट में है, जिसमें लंदन, पेरिस, बर्लिन समेत कई शहरों में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है और वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकेत मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम न हुआ तो ऐसी भीषण गर्मी भविष्य में और सामान्य हो जाएगी। विस्तार से पढ़िए रिपोर्ट-

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europe record breaking heatwave climate change extreme weather scientists warning
अब लंबी, अधिक तीव्र और ज्यादा बार आएंगी भीषण गर्मी की लहरें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

यूरोप इस वर्ष दूसरी बार अभूतपूर्व हीटवेव की चपेट में है। लंदन, पेरिस, बर्लिन और फ्रांस सहित कई देशों में तापमान ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर की रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह केवल एक असामान्य मौसमीय घटना नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के गहराते प्रभावों का संकेत है। हालांकि इस बात पर मतभेद है कि यूरोप की जलवायु कब और किस हद तक बदली, लेकिन अधिकांश विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं घटा तो भविष्य में ऐसी भीषण गर्मी और अधिक सामान्य होती जाएगी।
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यूरोप में इस साल की दूसरी भीषण हीटवेव ने कई देशों में दशकों पुराने तापमान रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। फ्रांस के पिसोस शहर में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो देश के इतिहास के सबसे गर्म दिनों में शामिल है। भीषण गर्मी और उससे राहत पाने के प्रयासों के दौरान डूबने जैसी घटनाओं सहित कम से कम 54 लोगों की मौत हो चुकी है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की जलवायु वैज्ञानिक सारा पर्किन्स- किर्कपैट्रिक कहती हैं कि लंदन जैसे शहरों का 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचना असाधारण घटना है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाएं और अधिक देखने को मिल सकती हैं। वहीं, चेक गणराज्य, लिथुआनिया और लक्जमबर्ग के सभी अध्ययन किए गए शहरों में अभूतपूर्व गर्मी दर्ज की गई।
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जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई हीटवेव की तीव्रता: इंपीरियल कॉलेज लंदन की शोधकर्ता क्लेयर बार्न्स के अनुसार, वैश्विक ताप वृद्धि के कारण यूरोप की मिट्टी पहले से अधिक सूखी हो चुकी है। इससे वाष्पीकरण द्वारा होने वाली प्राकृतिक ठंडक कम हो जाती है और तापमान तेजी से बढ़ता है। इसके अलावा, वातावरण में एरोसोल घटे हैं। एरोसोल बादलों के निर्माण में सहायक होते हैं। बादल कम बनने से सूर्य की अधिक ऊर्जा सीधे धरती तक पहुंच रही है, जिससे गर्मी और बढ़ रही है।
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आखिर इतनी भीषण गर्मी क्यों पड़ रही है
वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान हीटवेव के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे पहला कारण वायुमंडलीय परिसंचरण (एयर सर्कुलेशन) का वह पैटर्न है, जो अफ्रीका और सहारा मरुस्थल की गर्म हवा को यूरोप तक पहुंचाता है। मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर मेटियोरोलॉजी की जलवायु मॉडलर लारा वालबर्ग के अनुसार यही प्रक्रिया पहले भी कई बड़ी हीटवेव का कारण रही है।

पोट्सडैम विवि के जलवायु वैज्ञानिक स्टीफन राह्मस्टोर्फ का कहना है कि उत्तर अटलांटिक महासागर की सतह का तापमान कम होने पर सहारा से आने वाली गर्म हवा कुछ समय के लिए यूरोप के ऊपर फंस सकती है, जिससे अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। इस महीने लगभग आधे शहरों में हीट स्ट्रेस के सर्वकालिक रिकॉर्ड टूट चुके हैं।
 

स्विट्जरलैंड, डेनमार्क और चेक गणराज्य में टूटे तापमान के रिकॉर्ड 

पश्चिमी यूरोप को झुलसाने वाली भीषण गर्मी की लहर अब मध्य और पूर्वी यूरोप तक पहुंच गई है। शनिवार को स्विट्जरलैंड, चेक गणराज्य और डेनमार्क समेत कई देशों में तापमान ने नए रिकॉर्ड बना दिए।

आमतौर पर ठंडे मौसम के लिए जाने जाने वाले नॉर्डिक देशों में भी इस बार असामान्य गर्मी दर्ज की गई। डेनमार्क के मौसम विभाग ने बताया कि आरहूस शहर के उत्तर में स्थित ओडुम में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो 1874 में रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद से सबसे अधिक है। स्विट्जरलैंड के बासेल शहर में भी 38.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो वहां का नया रिकॉर्ड है। 

जर्मनी में भी हालात बेहद गंभीर रहे। यहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई। राजधानी बर्लिन के बाहर ए2 ऑटोबान हाईवे पर दो जगह तेज गर्मी के कारण कंक्रीट फट गई, जिससे सड़क को बंद करना पड़ा। जर्मन अखबार 'बिल्ड' के अनुसार देश के कई अन्य हाईवे भी गर्मी से क्षतिग्रस्त हुए हैं।

जर्मनी की रेल सेवा डॉयचे बान और अन्य रेल कंपनियों ने लोगों से इस सप्ताहांत केवल जरूरी होने पर ही ट्रेन से यात्रा करने की अपील की है। डॉयचे बान ने कहा कि रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के कारण जर्मनी का परिवहन ढांचा गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। चेक गणराज्य में भी शनिवार को इतिहास का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। उत्तरी शहर डोक्सानी में तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि तापमान और बढ़ सकता है।
 

जर्मनी: वृद्धाश्रम के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया

पश्चिमी जर्मनी के डोरमागेन शहर में एक वृद्धाश्रम के कई बुजुर्गों को इमारत के अंदर खतरनाक गर्मी के कारण सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा।

दमकल विभाग के अनुसार, वृद्धाश्रम के अंदर तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। जर्मनी और यूरोप के कई देशों में एयर कंडीशनर आम नहीं हैं, क्योंकि पहले यहां इतनी भीषण गर्मी नहीं पड़ती थी। शहर के एक प्रवक्ता ने जर्मन समाचार एजेंसी डीपीए को बताया कि वृद्धाश्रम में एक बुजुर्ग की रात में मौत हो गई। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी मौत गर्मी की वजह से हुई या नहीं।

फ्रांस में अस्पतालों पर बढ़ा दबाव
फ्रांस में भी शनिवार को देश के पूर्वी हिस्से के कई शहरों में अब तक का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया। कुछ जगहों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। हालांकि, कुछ इलाकों में गर्मी की लहर अब धीरे-धीरे कम होने लगी है।

पेरिस और उसके अलावा 36 अन्य क्षेत्रों में शनिवार को भी रेड अलर्ट जारी रहा। इससे पहले गुरुवार को 72 क्षेत्रों में रेड अलर्ट था। पेरिस के अस्पतालों पर लगातार दबाव बना हुआ है। लगातार दूसरे दिन करीब 3,000 लोग सरकारी अस्पतालों के आपातकालीन विभाग में इलाज के लिए पहुंचे, जो सामान्य दिनों की तुलना में लगभग एक-तिहाई अधिक है।

पेरिस के सरकारी अस्पताल प्राधिकरण एपी-एचपी ने बताया कि हालात से निपटने के लिए उसके सभी 38 अस्पतालों में आपातकालीन योजना लागू कर दी गई है। मेडिकल हेल्पलाइन केंद्रों पर आने वाली फोन कॉल भी पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत बढ़ गई हैं। अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए शनिवार को पेरिस में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय की प्राइड मार्च को स्थगित कर दिया गया। वहीं तीन दिन तक चलने वाला एक संगीत समारोह भी रद्द कर 

ब्रिटेन में तीन दिन लगातार टूटा जून की गर्मी का रिकॉर्ड

ब्रिटेन में इस सप्ताह लगातार तीन दिन जून महीने के तापमान के नए रिकॉर्ड बने। शुक्रवार को पूर्वी इंग्लैंड में 37.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो जून महीने का अब तक का सबसे अधिक तापमान है। इससे पहले 1976 में बना रिकॉर्ड एक डिग्री से भी अधिक पीछे रह गया।

हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि इस सप्ताहांत से गर्मी धीरे-धीरे कम होने लगेगी। लेकिन शनिवार रात तक अलर्ट जारी रहेगा। शनिवार को पुलिस ने बताया कि एक 22 वर्षीय युवक और 15 वर्षीय किशोर के शव क्रमशः एक झील और एक नदी से बरामद किए गए हैं। इसके साथ ही इस सप्ताह ब्रिटेन में गर्मी से जुड़ी मौतों की संख्या चार हो गई है। ब्रिटेन के अधिकारियों ने लोगों से बिना निगरानी वाले जलाशयों में तैराकी करते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। फ्रांस में भी पिछले एक सप्ताह के दौरान डूबने से करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है।

रोम में रेड अलर्ट, गर्मी से बेहाल पर्यटक

इटली की राजधानी रोम में भी रेड अलर्ट जारी है। भीषण गर्मी से बचने के लिए पर्यटक इमारतों की छाया में आराम करते और सार्वजनिक फव्वारों के पानी से खुद को ठंडा करते नजर आए। सड़क किनारे पानी की बोतलें, टोपी और छाते बेचने वालों की बिक्री भी काफी बढ़ गई।

जर्मनी के केम्प्टेन शहर से आई पर्यटक इसाबेला डोल्ड ने कहा कि इस मौसम में ठंडा जेलाटो, पास्ता, ताजे फल और बर्फ वाले पेय सबसे अच्छा राहत देते हैं। शनिवार को इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि वेनिस, फ्लोरेंस, बोलोन्या और मिलान समेत 18 शहरों में भीषण गर्मी के कारण रेड अलर्ट जारी किया गया है।

वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

यूरोप के वैज्ञानिकों के संगठन 'वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन' की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बार यूरोप में पड़ी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और ज्यादा नमी जलवायु परिवर्तन का असर है। रिपोर्ट के अनुसार, 50 साल पहले ऐसी भीषण गर्मी पड़ना लगभग नामुमकिन था। वहीं, आज 20 साल पहले की तुलना में ऐसी गर्मी पड़ने की संभावना करीब 200 गुना बढ़ गई है।
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