यूरोप का दोहरा मानदंड आया सामने, अब ‘वैक्सीन वॉर’ छेड़ने की तैयारी
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ईयू से अपील की है कि वह निर्यात के रास्ते में कोई ठोस रुकावट खड़ी ना करे। ब्रिटेन कोरोना महामारी से बुरी तरह प्रभावित है। मंगलवार को वह यूरोप का पहला देश बना, जहां कोरोना से मृतकों की संख्या एक लाख पार कर गई...
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यूरोप कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए वैक्सीन की कमी की समस्या से जूझ रहा है। यूरोपीय अधिकारियों ने ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी एस्ट्रा-जेनेका के यूरोप में उत्पादित वैक्सीन के निर्यात पर पाबंदी लगाने की चेतावनी दी है। ये अधिकारी इस कंपनी की तरफ से वैक्सीन सप्लाई में हो रही देरी से नाराज हैं। उनकी शिकायत है कि यूरोपीय कंपनियां अमेरिका, ब्रिटेन और इजराइल में जिस तादाद में वैक्सीन की सप्लाई कर रही हैं, वैसा वे यूरोप में नहीं कर रही हैं। यूरोपियन यूनियन ने इस मामले में इस हफ्ते के अंत तक फैसला करने का वादा किया है।
लेकिन कारोबार में उदारवादी नीतियों के समर्थक जानकारों ने निर्यात प्रतिबंध संबंधी किसी कदम पर अभी से सवाल उठाना शुरू कर दिया है। इससे यहां इस मुद्दे पर एक विवाद खड़ा हो रहा है। जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जेन्स स्पहन ने कहा है कि यूरोपीय देशों को निर्यात सीमित करने के कदम उठाने चाहिए।
लेकिन यूरोपीय आयोग हमेशा से व्यापार में प्रतिबंधों और संरक्षणवादी नीतियों का विरोधी रहा है। साथ ही आयोग को इस बात की भी चिंता है कि अगर निर्यात सीमित करने के कदम उठाए गए, तो उससे यूरोप के कुछ सहयोगी देश नाराज हो सकते हैं, जो वैक्सीन के लिए यूरोपीय कंपनियों पर निर्भर हैं।
ईयू के व्यापार प्रमुख वालदिस डोमब्रोवस्किस ने मंगलवार को कहा कि ईयू का इरादा बंदरगाह पहुंच चुकी खेप पर रोक लगाने का नहीं है। बल्कि उसका मकसद दवा कंपनियों में अधिक जवाबदेही की भावना पैदा करना है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन की सप्लाई के मुद्दे पर बड़ी दवा कंपनियों ने ईयू को अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया है।
डोमब्रोवस्किस ने कहा- हम निर्यात पर प्रतिबंध या सीमा लगाने की योजना नहीं बना रहे हैं। हमारा प्राथमिक उद्देश्य निर्यात के मामले में पारदर्शिता लाना है, ताकि वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों की उत्पादन क्षमता के बारे में एक स्पष्ट जानकारी मिल सके। हम यह जानना चाहते हैं कि किस उत्पादन केंद्र पर बने कितने वैक्सीन डोज का निर्यात किया गया।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ईयू से अपील की है कि वह निर्यात के रास्ते में कोई ठोस रुकावट खड़ी ना करे। ब्रिटेन कोरोना महामारी से बुरी तरह प्रभावित है। मंगलवार को वह यूरोप का पहला देश बना, जहां कोरोना से मृतकों की संख्या एक लाख पार कर गई। इसलिए ब्रिटेन में वैक्सीन की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
लेकिन यूरोपीयन मीडिया में छप रही खबरों का कहना है कि संरक्षणवाद विरोधी अपनी नीतियों के बावजूद ईयू वैक्सीन निर्यात पर प्रतिबंध लगा सकता है। इस सिलसिले में ध्यान दिलाया गया है कि पिछले साल ईयू ने ऐसा ही कदम मास्क और अन्य सुरक्षा सामग्रियों के बारे में उठाया था। इसकी शुरुआत जर्मनी ने की थी। इस मामले में जर्मनी ने ईयू के सिंगल मार्केट सिद्धांत का उल्लंघन किया था।
इसलिए ईयू ने ये प्रतिबंध हटाने की मांग की थी। लेकिन जर्मनी ने वह प्रतिबंध तभी हटाया, जब ईयू ने खुद ऐसी पाबंदी लगा दी। इसके बाद यूरोप में मास्क और वायरस संक्रमण से बचाव की अन्य सामग्रियां बनाने वाली कंपनियों के लिए यह अनिवार्य हो गया कि निर्यात के पहले वे अपने देश की सरकारों की इजाजत लें।
अब एक बार फिर जर्मनी ही वैक्सीन निर्यात पर प्रतिबंध के लिए दबाव बना रहा है। लेकिन जानकारों ने चेतावनी दी है कि अगर ईयू ने ऐसा कदम उठाया, तो इससे दुनिया में ‘वैक्सीन वॉर’ छिड़ सकता है। तब अमेरिकी या अन्य देश भी ऐसा कदम उठा सकते हैं।
यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के प्रमुख ब्रेंड लैंग ने कहा है कि अभी ज्यादा समय नहीं गुजरा, जब कोविड-19 वैक्सीन को एक जनहित की सामग्री समझा जाता था। लेकिन अब इसे हासिल करने की लड़ाई छिड़ गई है।
आरोप यह लग रहा है कि व्यापार में खुलेपन और उदारवाद की वकालत करने वाले यूरोपीय देशों पर जब खुद पर आपदा आई है, तो अपने ही सिद्धांत का उल्लंघन कर संरक्षणवादी बन रहे हैं। स्विट्जरलैंड की सेंट गैलेन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर सिमोन इवनेट ने वेबसाइट पोलिटिको.ईयू से कहा, ‘मुझे ऐसा लगता है कि भूमंडलीकरण के विरोधी और विवेकहीन लोग बेकाबू हो गए हैं। यहां तक कि धनी देशों में भी लड़ाई छिड़ गई है कि वैक्सीन कौन हासिल करता है। ईयू निर्यात पर सीमा लगाने का कदम उठाने जा रहा है। मेरी राय में यह दोहरा मानदंड है।’