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गैस की खरीदारी: रूस को जख्मी करने की कोशिश में खुद को भी चोटिल करेगा यूरोप

Thu, 12 May 2022 05:34 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 12 May 2022 05:34 PM IST
सार

विश्लेषकों की राय है कि रूसी तेल और गैस न आने का यूरोप को भी भारी नुकसान होगा। वहां अभी ही इन ईंधन की महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है। इस बीच अमेरिका में भी गैस के औसत दाम में इजाफा हुआ है, जबकि अमेरिका गैस के बड़े उत्पादक देशों में शामिल है...

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EU experts said despite the EU stopping imports, the Russian economy will not stall overnight, China and India will continue to buy from it
रूस प्राकृतिक गैस - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

यूरोपियन यूनियन (ईयू) में इस बात का गहराई से आकलन किया जा रहा है कि यूरोप के रूस से तेल और गैस खरीदना पूरी तरह रोक देने का रूसी अर्थव्यवस्था पर किस हद तक असर पड़ेगा। यहां विशेषज्ञ यह अनुमान लगाने की कोशिश में हैं कि जितनी मात्रा यूरोपीय देश रूस से तेल और गैस खरीदते हैं, क्या रूस उसे बेचने के लिए नए ग्राहक ढूंढ सकेगा?

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आधा बाजार रूस की पहुंच से बाहर

ईयू में पहले रूस से तेल और गैस आयात रोकने को लेकर हिचक थी। लेकिन अब इस बारे में सहमति बनती जा रही है। ईयू के विशेषज्ञों की राय है कि अगर रूस नए ग्राहक नहीं ढूंढ पाया, तो ईयू के खरीदारी रोकने से उसकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह जख्मी हो जाएगी। रूस की विदेशी मुद्रा की आय का सबसे बड़ा जरिया तेल और गैस ही हैं। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, और ऑस्ट्रेलिया रूसी तेल और गैस की खरीदारी रोक चुके हैं। जापान ने कहा है कि वह जी-7 की बैठक के बाद इस बारे में फैसला करेगा। ईयू और जापान ने अगर ये खरीदारी रोक दी, तो दुनिया की आधी अर्थव्यवस्था का बाजार रूस की पहुंच से बाहर हो जाएगा।

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ईयू के विशेषज्ञों का आकलन है कि ईयू के आयात रोकने के बावजूद रूसी अर्थव्यवस्था रातों-रात ठप नहीं होगी। चीन और भारत जैसे देश उससे खरीदारी जारी रखेंगे। उधर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की महंगाई से रूस को काफी फायदा पहुंचा है। इससे उसकी आमदनी बढ़ी है। ये ट्रेंड कुछ समय तक जारी रहेगा। इसके बावजूद ईयू के फैसले का असर यह होगा कि उसके 50 फीसदी निर्यात का बाजार उससे छिन जाएगा। थिंक टैंक यूरेशिया ग्रुप के एनर्जी प्रोग्रम के निदेशक हेनिंग ग्लोयस्टीन ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि इससे रूस को भारी नुकसान होगा।’
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सीएनएन की वेबसाइट पर छपे एक विश्लेषण के मुताबिक अपने तेल और गैस निर्यात के लिए लंबे समय से रूस की यूरोपीय बाजार पर बड़ी निर्भरता रही है। इस साल जनवरी में रूस सरकार को यूरोप को यूरोप को तेल और गैस की बिक्री से हुई आमदनी उसके बजट के 45 फीसदी हिस्से के बराबर थी। पिछले साल यूरोप को रूस ने तेल और गैस के अपने कुल निर्यात का एक तिहाई हिस्सा यूरोप को भेजा था। ये बाजार छिनना रूस के लिए बड़ा झटका होगा।

यूरोप भी रहेगा घाटे में

लेकिन कुछ विश्लेषकों की राय है कि रूसी तेल और गैस न आने का यूरोप को भी भारी नुकसान होगा। वहां अभी ही इन ईंधन की महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है। इस बीच अमेरिका में भी गैस के औसत दाम में इजाफा हुआ है, जबकि अमेरिका गैस के बड़े उत्पादक देशों में शामिल है। मंगलवार को सामने आए आंकड़ों के मुताबिक गैस की औसत कीमत 4.37 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई, जो एक रिकॉर्ड है। इसके पहले ये रिकॉर्ड चार मार्च को बना था। मंगलवार को ये कीमत उससे भी चार सेंट ऊपर दर्ज की गई।



तेल और गैस की महंगाई का असर आम मुद्रास्फीति दर पर पड़ा है। इसीलिए कुछ अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि रूस को चोट पहुंचाने की कोशिश में अमेरिका और यूरोपीय देश खुद को भी जख्मी कर रहे हैँ।

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