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Emmanuel Macron: अमेरिका से ट्रेड डील पर मैक्रों का सख्त रुख, बोले- ट्रंप को अब EU की ताकत दिखानी पड़ेगी
Sat, 02 Aug 2025 01:59 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sat, 02 Aug 2025 01:59 PM IST
सार
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका से व्यापार समझौते पर कहा कि यूरोपीय संघ को पर्याप्त ‘डर’ नहीं लगा। उन्होंने कहा कि अगली बातचीत में ईयू को सख्त रुख अपनाना होगा। समझौते में EU पर 15% टैरिफ और अमेरिका से ऊर्जा खरीदने की शर्त शामिल है। फ्रांस ने इसमें अपनी भूमिका को मजबूत बताते हुए और छूटों की उम्मीद जताई है।
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डोनाल्ड ट्रंप और इमैनुएल मैक्रों
- फोटो : ANI
विस्तार
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका के साथ हुई हालिया व्यापार वार्ता पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ (EU) को इन चर्चाओं में उतना डर नहीं लगा जितना लगना चाहिए था। उन्होंने यह भी साफ किया कि आगे की बातचीत में यूरोप को अधिक सख्ती दिखानी होगी और फ्रांस इस दिशा में मजबूती से खड़ा रहेगा।
कैबिनेट बैठक में मैक्रों ने कहा कि यह मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, मैक्रों ने बैठक में दो टूक कहा कि स्वतंत्र होने के लिए पहले शक्तिशाली और भयभीत करने वाला होना पड़ता है। उन्होंने स्वीकार किया कि अमेरिका के साथ हुई व्यापारिक बातचीत के दौरान ईयू को पर्याप्त गंभीरता और ताकत के साथ पेश नहीं किया गया।
15 प्रतिशत टैरिफ पर बनी सहमति
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुई वार्ता के बाद यह करार हुआ। समझौते के अनुसार, अब यूरोपीय संघ के अधिकांश निर्यात पर अमेरिका में 15 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। यह दर ट्रंप-पूर्व स्तर से अधिक है, लेकिन प्रस्तावित 30 प्रतिशत से कम है।
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अमेरिका से ऊर्जा आयात की भी शर्त
इस डील के तहत यूरोपीय संघ ने अमेरिका से तीन वर्षों में 750 अरब डॉलर मूल्य की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), तेल और परमाणु ईंधन खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा, अमेरिका में 600 अरब डॉलर के निवेश की भी योजना है। मैक्रों ने इसे संभावनाओं वाला समझौता बताया, जो निकट भविष्य के लिए स्थिरता देगा और फ्रांसीसी-यूरोपीय निर्यात हितों को संरक्षित करेगा।
ये भी पढ़ें- गाजा में इस्राइल ने छह देशों के साथ मिलकर पहुंचाई राहत सामग्री, IDF ने भुखमरी के आरोपों को नकारा
आगे की बातचीत में बदलाव की जरूरत
फ्रांस के वित्त मंत्री एरिक लॉम्बार्ड ने भी मैक्रों की चिंता का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कुछ महत्वपूर्ण चरणों में यूरोपीय संघ की वार्तात्मक शैली में ऊर्जा और दृढ़ता की कमी थी। लॉम्बार्ड के अनुसार, आगे की बातचीत में ईयू को अपने प्रभाव और रणनीतिक सोच को मज़बूत करना होगा।
ये भी पढ़ें- लंदन में ब्रिटिश सिख शख्स की चाकू मारकर हत्या मामले में अब तक क्या-क्या हुआ, किस-किस को किया गया गिरफ्तार?
मैक्रों ने नई छूटों की जताई उम्मीद
मैक्रों ने आगे कहा कि इस समझौते की आगामी चर्चा में ईयू को कुछ नए छूट या रियायतें मिल सकती हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि फ्रांस हमेशा से स्पष्ट और कठोर रुख अपनाने वाला देश रहा है, और यही नीति आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने यूरोप को 'शक्ति' के रूप में खुद को देखने की ज़रूरत पर बल दिया।
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कैबिनेट बैठक में मैक्रों ने कहा कि यह मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, मैक्रों ने बैठक में दो टूक कहा कि स्वतंत्र होने के लिए पहले शक्तिशाली और भयभीत करने वाला होना पड़ता है। उन्होंने स्वीकार किया कि अमेरिका के साथ हुई व्यापारिक बातचीत के दौरान ईयू को पर्याप्त गंभीरता और ताकत के साथ पेश नहीं किया गया।
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15 प्रतिशत टैरिफ पर बनी सहमति
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुई वार्ता के बाद यह करार हुआ। समझौते के अनुसार, अब यूरोपीय संघ के अधिकांश निर्यात पर अमेरिका में 15 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। यह दर ट्रंप-पूर्व स्तर से अधिक है, लेकिन प्रस्तावित 30 प्रतिशत से कम है।
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अमेरिका से ऊर्जा आयात की भी शर्त
इस डील के तहत यूरोपीय संघ ने अमेरिका से तीन वर्षों में 750 अरब डॉलर मूल्य की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), तेल और परमाणु ईंधन खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा, अमेरिका में 600 अरब डॉलर के निवेश की भी योजना है। मैक्रों ने इसे संभावनाओं वाला समझौता बताया, जो निकट भविष्य के लिए स्थिरता देगा और फ्रांसीसी-यूरोपीय निर्यात हितों को संरक्षित करेगा।
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आगे की बातचीत में बदलाव की जरूरत
फ्रांस के वित्त मंत्री एरिक लॉम्बार्ड ने भी मैक्रों की चिंता का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कुछ महत्वपूर्ण चरणों में यूरोपीय संघ की वार्तात्मक शैली में ऊर्जा और दृढ़ता की कमी थी। लॉम्बार्ड के अनुसार, आगे की बातचीत में ईयू को अपने प्रभाव और रणनीतिक सोच को मज़बूत करना होगा।
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मैक्रों ने नई छूटों की जताई उम्मीद
मैक्रों ने आगे कहा कि इस समझौते की आगामी चर्चा में ईयू को कुछ नए छूट या रियायतें मिल सकती हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि फ्रांस हमेशा से स्पष्ट और कठोर रुख अपनाने वाला देश रहा है, और यही नीति आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने यूरोप को 'शक्ति' के रूप में खुद को देखने की ज़रूरत पर बल दिया।
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