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Elon Musk: टेस्ला के साथ होगी लो अर्थ ऑर्बिट सैटलाइट वाले इंटरनेट की एंट्री! मस्क की भारत को लेकर बड़ी योजना
Thu, 22 Jun 2023 03:36 PM IST
आशीष तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: आशीष तिवारी
Updated Thu, 22 Jun 2023 03:36 PM IST
सार
मोदी और एलन मस्क की इस मुलाकात से बदल जाएगी देश में इंटरनेट की स्पीड, लो अर्थ आर्बिट सेटेलाइट से इंटरनेट सुविधा मिलने की बढ़ी उम्मीद।
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एलन मस्क से मिले पीएम मोदी
- फोटो : Social Media
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका में लगातार अपने अपने क्षेत्र के दिग्गजों से मिल रहे हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण मुलाकात टि्वटर के मालिक और स्पेसएक्स समेत टेस्ला के सीईओ एलन मस्क के साथ भी मानी जा रही है। इस मुलाकात से माना यह जा रहा है कि अपने देश में इंटरनेट की पूरी दुनिया बहुत जल्दी और बहुत तेजी से बदलने वाली है। दरअसल सेटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट की सुविधा देने वाले एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में न सिर्फ अपना विस्तार करेगी बल्कि उसी विस्तार की कड़ी में अपने सबसे बड़े प्रोजेक्ट टेस्ला को भी भारत में एंट्री की योजना पर काम कर रही है। दरअसल 2021 में एलन मस्क की लो अर्थ आर्बिट सेटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट देने वाली स्टारलिंक की सुविधाओं को शुरू होने से पहले ही नवंबर 2021 में केंद्र सरकार ने रोक दिया था। फिलहाल अब इस मुलाकात के बाद स्पेसएक्स और टेस्ला ने भारत को लेकर अपनी बड़ी योजनाएं बनाई है।
शुरू हो सकेगी "लो अर्थ आर्बिट सेटेलाइट" ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एलन मस्क के साथ हुई मुलाकात के बाद अब यह माना जा रहा है कि अपने देश में इंटरनेट के युग में तेजी से परिवर्तन आने वाला है। एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सेटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट की सुविधा प्रदान करता है। खासतौर से उन इलाकों में जहां पर फाइबर के माध्यम से इंटरनेट की पहुंच बहुत मुश्किल है। वहां पर एलन मस्क की स्टारलिंक "लो अर्थ आर्बिट सेटेलाइट" के जरिए ब्रॉडबैंड इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराती है। वॉशिंगटन में रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनुज पुरवार कहते हैं कि भारत में स्टार लिंक ने 2021 के दौरान लो अर्थ आर्बिट सेटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट सुविधाएं शुरू करने की योजना बनाई थी। इस योजना के तहत देश में ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की सुविधा को हाई स्पीड पर दिए जाने का प्रावधान था। लेकिन 26 नवंबर 2021 को केंद्र सरकार ने लाइसेंस ना होने के चलते इस सुविधा को रोक दिया था। आईटी क्षेत्र के दिग्गजों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलन मस्क की इस मुलाकात के बाद जल्द ही भारत में लो अर्थ आर्बिट सैटलाइट के माध्यम से स्टारलिंक इंटरनेट की सेवाएं शुरू हो सकेंगी।
तो 2200 सेटेलाइट देने लगेंगे इंटरनेट की सेवा
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक में काम कर चुके अनुज पुरवार कहते हैं कि भारत में स्टारलिंक के काम करने का पूरा ड्राफ्ट पहले से तैयार है। वह कहते हैं कि अगर भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलन की मीटिंग के बाद इंटरनेट की सुविधाओं को शुरू करने की अनुमति मिलती है तो स्टारलिंक अनुमति मिलने की तय तारीख के एक साल के भीतर पांच लाख डिश टर्मिनल के माध्यम से ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा शुरू कर सकता है। अनुज बताते हैं कि स्टारलिंक इंटरनेट सुविधा को देने के लिए लो अर्थ आर्बिट सेटेलाइट का इस्तेमाल करती है। इसके लिए बाकायदा 2200 सैटेलाइट लो अर्थ आर्बिट में मजबूत हैं। जिनकी संख्या लगातार बढ़ाई भी जा रही है। वह बताते हैं कि धरती से तकरीबन 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद रहने वाला एक सेटेलाइट 90 मिनट में पूरी पृथ्वी का चक्कर लगा लेता है। ऐसे में 2200 सेटेलाइट सिर्फ इंटरनेट देने के लिए न सिर्फ हाई स्पीड बल्कि धरती के प्रत्येक कोने में इसकी सुविधा देने में सक्षम है।
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इसलिए टेस्ला कर रही है भारत में एंट्री की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलन मस्क की मुलाकात के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की भी हुई कि जल्द ही भारत में टेस्ला की एंट्री होने वाली है। एलन मस्क ने इस बात की तस्दीक भी की कि वह अगले साल भारत आ रहे हैं। दरअसल एलन मस्क ने आधिकारिक तौर पर इस बात का ऐलान करके उन उम्मीदों को और आगे बढ़ाया है जो भारत में टेस्ला कि राह देख रहे हैं। ऑटो एक्सपर्ट हरवीर तनेजा कहते हैं भारत में अब टेस्ला के आने की उम्मीद और ज्यादा इसलिए बढ़ गई है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मस्क की एक बड़ी बैठक हुई है। तनेजा कहते हैं कि बीते कुछ समय में जिस तरीके से प्रीमियम सेगमेंट की गाड़ियों की खरीद भारत ने बढ़ी है उससे अब टेस्ला को भारत में बड़ा बाजार भी नजर आने लगा है। वो कहते हैं कि यही वजह है टेस्ला न सिर्फ भारत में बड़े निवेश की तैयारी कर रही है बल्कि भारत के लिहाज से रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी काम करने की योजना बना रही है। तनेजा के मुताबिक दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और चेन्नई पर फोकस करते हुए टेस्ला ने भारत में बीते कुछ समय से अपनी रिसर्च भी की है। उनका कहना है कि भारत में टेस्ला का कंपटीशन फिलहाल तो लांच होने वाले इलेक्ट्रिक व्हीकल से ही होगा। लेकिन कीमत के मामलों में ऑडी, मर्सिडीज़ और बीएमडब्ल्यू सेगमेंट की कारों से होने वाला है। चूंकि भारत में जिस तरह से आने वाले दिनों में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर नई तैयारियां की जा रही हैं और नीतियां बनाई जा रही हैं उसके लिहाज से टेस्ला भारत में अपना बड़ा बाजार देख रही है।
एलन मस्क की इंटरनेट कंपनी और टेस्ला का यह है आपस में संबंध
ऑटो और टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि एलन मस्क की कंपनी टेस्ला और स्टारलिंक का आपस में मजबूत कनेक्शन भी है। हरवीर तनेजा कहते हैं कि टेस्ला ऑटो पायलट मोड पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर चलने वाली कार भी है। ऐसे में अगर टेस्ला को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर ऑटो पायलट मोड पर चलाने की जरूरत हो तो हाई स्पीड इंटरनेट की आवश्यकता बेहद जरूरी है। इसके अलावा हाई इंटरनेट पर सॉफ्टवेयर अपडेट के साथ-साथ नेविगेशन समेत अन्य दूसरी सुविधाएं भी बेहद जरूरी है। वह कहते हैं कि टेस्ला की गाड़ियां इलेक्ट्रिक व्हीकल हैं और रडार प्रणाली पर ऑटो पायलट मोड में काम करती हैं। इसलिए तकनीकी रूप से एलन मस्क और केंद्र सरकार के बीच में ऐसे कई समझौते भी हो सकते हैं जिसमें नई तकनीकी को बेहतर तरीके से भारत में प्रवेश की अनुमति मिल सके।
कई और क्षेत्रों में भी एलन मस्क कर सकते हैं निवेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद सिर्फ एलनन मस्क टेस्ला और इंटरनेट के क्षेत्र में ही निवेश नहीं करेंगे विशेषज्ञों का मानना है कि वाह और भी कई क्षेत्रों में भारत में या तो निवेश कर सकते हैं या उनकी कंपनी मिलकर काम कर सकती है। इंडो अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टेक्नोलॉजिस्ट के अंशु शाह बताते हैं कि एलन मस्क की कई कंपनियां रिन्यूएबल एनर्जी और स्पेसएक्स के साथ अंतरिक्ष में स्पेस एक्सप्लोरेशन के साथ-साथ कई तरह की नई तकनीकियो पर काम करते हैं। भारत में रहने वाले ने रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर काम करने वाले एसएल प्रकाश का कहते हैं कि केंद्र सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है उनमें बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जो अमेरिकी उद्योगपतियों के साथ मिलकर काम करके नई ऊंचाइयों को पा सकते हैं। उसमें इलेक्ट्रिक व्हीकल, स्पेस एक्सप्लोरेशन के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी शामिल है। इंडो अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टेक्नोलॉजिस्ट के अंशु शाह का कहना है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलन मस्क की हुई मुलाकात को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित हैं।
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शुरू हो सकेगी "लो अर्थ आर्बिट सेटेलाइट" ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एलन मस्क के साथ हुई मुलाकात के बाद अब यह माना जा रहा है कि अपने देश में इंटरनेट के युग में तेजी से परिवर्तन आने वाला है। एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सेटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट की सुविधा प्रदान करता है। खासतौर से उन इलाकों में जहां पर फाइबर के माध्यम से इंटरनेट की पहुंच बहुत मुश्किल है। वहां पर एलन मस्क की स्टारलिंक "लो अर्थ आर्बिट सेटेलाइट" के जरिए ब्रॉडबैंड इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराती है। वॉशिंगटन में रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनुज पुरवार कहते हैं कि भारत में स्टार लिंक ने 2021 के दौरान लो अर्थ आर्बिट सेटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट सुविधाएं शुरू करने की योजना बनाई थी। इस योजना के तहत देश में ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की सुविधा को हाई स्पीड पर दिए जाने का प्रावधान था। लेकिन 26 नवंबर 2021 को केंद्र सरकार ने लाइसेंस ना होने के चलते इस सुविधा को रोक दिया था। आईटी क्षेत्र के दिग्गजों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलन मस्क की इस मुलाकात के बाद जल्द ही भारत में लो अर्थ आर्बिट सैटलाइट के माध्यम से स्टारलिंक इंटरनेट की सेवाएं शुरू हो सकेंगी।
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तो 2200 सेटेलाइट देने लगेंगे इंटरनेट की सेवा
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक में काम कर चुके अनुज पुरवार कहते हैं कि भारत में स्टारलिंक के काम करने का पूरा ड्राफ्ट पहले से तैयार है। वह कहते हैं कि अगर भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलन की मीटिंग के बाद इंटरनेट की सुविधाओं को शुरू करने की अनुमति मिलती है तो स्टारलिंक अनुमति मिलने की तय तारीख के एक साल के भीतर पांच लाख डिश टर्मिनल के माध्यम से ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा शुरू कर सकता है। अनुज बताते हैं कि स्टारलिंक इंटरनेट सुविधा को देने के लिए लो अर्थ आर्बिट सेटेलाइट का इस्तेमाल करती है। इसके लिए बाकायदा 2200 सैटेलाइट लो अर्थ आर्बिट में मजबूत हैं। जिनकी संख्या लगातार बढ़ाई भी जा रही है। वह बताते हैं कि धरती से तकरीबन 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद रहने वाला एक सेटेलाइट 90 मिनट में पूरी पृथ्वी का चक्कर लगा लेता है। ऐसे में 2200 सेटेलाइट सिर्फ इंटरनेट देने के लिए न सिर्फ हाई स्पीड बल्कि धरती के प्रत्येक कोने में इसकी सुविधा देने में सक्षम है।
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इसलिए टेस्ला कर रही है भारत में एंट्री की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलन मस्क की मुलाकात के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की भी हुई कि जल्द ही भारत में टेस्ला की एंट्री होने वाली है। एलन मस्क ने इस बात की तस्दीक भी की कि वह अगले साल भारत आ रहे हैं। दरअसल एलन मस्क ने आधिकारिक तौर पर इस बात का ऐलान करके उन उम्मीदों को और आगे बढ़ाया है जो भारत में टेस्ला कि राह देख रहे हैं। ऑटो एक्सपर्ट हरवीर तनेजा कहते हैं भारत में अब टेस्ला के आने की उम्मीद और ज्यादा इसलिए बढ़ गई है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मस्क की एक बड़ी बैठक हुई है। तनेजा कहते हैं कि बीते कुछ समय में जिस तरीके से प्रीमियम सेगमेंट की गाड़ियों की खरीद भारत ने बढ़ी है उससे अब टेस्ला को भारत में बड़ा बाजार भी नजर आने लगा है। वो कहते हैं कि यही वजह है टेस्ला न सिर्फ भारत में बड़े निवेश की तैयारी कर रही है बल्कि भारत के लिहाज से रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी काम करने की योजना बना रही है। तनेजा के मुताबिक दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और चेन्नई पर फोकस करते हुए टेस्ला ने भारत में बीते कुछ समय से अपनी रिसर्च भी की है। उनका कहना है कि भारत में टेस्ला का कंपटीशन फिलहाल तो लांच होने वाले इलेक्ट्रिक व्हीकल से ही होगा। लेकिन कीमत के मामलों में ऑडी, मर्सिडीज़ और बीएमडब्ल्यू सेगमेंट की कारों से होने वाला है। चूंकि भारत में जिस तरह से आने वाले दिनों में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर नई तैयारियां की जा रही हैं और नीतियां बनाई जा रही हैं उसके लिहाज से टेस्ला भारत में अपना बड़ा बाजार देख रही है।
एलन मस्क की इंटरनेट कंपनी और टेस्ला का यह है आपस में संबंध
ऑटो और टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि एलन मस्क की कंपनी टेस्ला और स्टारलिंक का आपस में मजबूत कनेक्शन भी है। हरवीर तनेजा कहते हैं कि टेस्ला ऑटो पायलट मोड पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर चलने वाली कार भी है। ऐसे में अगर टेस्ला को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर ऑटो पायलट मोड पर चलाने की जरूरत हो तो हाई स्पीड इंटरनेट की आवश्यकता बेहद जरूरी है। इसके अलावा हाई इंटरनेट पर सॉफ्टवेयर अपडेट के साथ-साथ नेविगेशन समेत अन्य दूसरी सुविधाएं भी बेहद जरूरी है। वह कहते हैं कि टेस्ला की गाड़ियां इलेक्ट्रिक व्हीकल हैं और रडार प्रणाली पर ऑटो पायलट मोड में काम करती हैं। इसलिए तकनीकी रूप से एलन मस्क और केंद्र सरकार के बीच में ऐसे कई समझौते भी हो सकते हैं जिसमें नई तकनीकी को बेहतर तरीके से भारत में प्रवेश की अनुमति मिल सके।
कई और क्षेत्रों में भी एलन मस्क कर सकते हैं निवेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद सिर्फ एलनन मस्क टेस्ला और इंटरनेट के क्षेत्र में ही निवेश नहीं करेंगे विशेषज्ञों का मानना है कि वाह और भी कई क्षेत्रों में भारत में या तो निवेश कर सकते हैं या उनकी कंपनी मिलकर काम कर सकती है। इंडो अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टेक्नोलॉजिस्ट के अंशु शाह बताते हैं कि एलन मस्क की कई कंपनियां रिन्यूएबल एनर्जी और स्पेसएक्स के साथ अंतरिक्ष में स्पेस एक्सप्लोरेशन के साथ-साथ कई तरह की नई तकनीकियो पर काम करते हैं। भारत में रहने वाले ने रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर काम करने वाले एसएल प्रकाश का कहते हैं कि केंद्र सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है उनमें बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जो अमेरिकी उद्योगपतियों के साथ मिलकर काम करके नई ऊंचाइयों को पा सकते हैं। उसमें इलेक्ट्रिक व्हीकल, स्पेस एक्सप्लोरेशन के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी शामिल है। इंडो अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टेक्नोलॉजिस्ट के अंशु शाह का कहना है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलन मस्क की हुई मुलाकात को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित हैं।