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सर्वे में खुलासा: मुश्किल हालात में भी नौजवानों से ज्यादा सकारात्मक रहे बुजुर्ग

Mon, 15 Mar 2021 07:19 AM IST
देव कश्यप न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन Published by: देव कश्यप Updated Mon, 15 Mar 2021 07:19 AM IST
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Elderly people are more positive than young people in difficult circumstances revealed in Survey during Corona pandemic
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

कोरोना महामारी ने भले ही सबसे ज्यादा बुजुर्गों को प्रभावित किया हो, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इसके बावजूद वे जवानों की तुलना में अधिक खुश और सकारात्मक रहे हैं। इसका खुलासा कुछ ताजा शोधों में हुआ है। इनमें साबित हुआ कि ढलती उम्र के साथ चुनौतियों से निपटने और मुश्किल हालात में सामंजस्य बिठाने की क्षमता बढ़ती जाती है, जिसका फायदा बुजुर्गों को कोरोनाकाल में मिला है।

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अध्ययनों के मुताबिक, ज्यों-ज्यों इंसान बुजुर्ग होता है, उसमें भले ही मानसिक तीक्ष्णता और शारीरिक स्वास्थ्य कमजोर हो लेकिन उम्र के साथ-साथ भावनात्मक खुशी में भी इजाफा होता है। दैनिक रूप से देखा जाए तो युवाओं की तुलना में 50 और उससे ज्यादा उम्र के लोगों में सकारात्मक भावों का स्तर ज्यादा रहता है और वे नकारात्मक भाव बहुत कम महसूस करते हैं।
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अंतर जानने का मौका
युवाओं और बुजुर्गों के बीच भावनात्मक अंतर जानने के लिए वैज्ञानिकों के सामने बड़ा सवाल था कि क्या लोग ढलती उम्र में मुश्किल हालात से निपटने का कौशल सीख जाते हैं। या फिर बुजुर्ग चीजों को नजरअंदाज करने की खूबी विकसित कर लेते हैं ताकि तनावग्रस्त स्थितियां और जोखिम कम झेलने पड़ें। इन दोनों परिदृश्यों का जवाब तलाशने के लिए वैज्ञानिकों को हमेशा से ऐसा माहौल चाहिए था, संयोग से यह मौका उन्हें पिछले साल अप्रैल में मिला, जब महामारी फैल चुकी थी।
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एक हजार लोग शामिल
कोरोना महामारी के पांव पसारते ही स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की मनोविज्ञानी लॉरा कार्स्टेंसन के नेतृत्व में एक टीम ने युवाओं और बुजुर्गों की मानसिक व भावनात्मक स्थिति की हकीकत जानने के लिए गहन शोध किया। अप्रैल में हुए इस शोध में अमेरिका के अलग-अलग राज्यों के 18 से 76 साल के एक हजार लोगों को शामिल किया गया था। इनसे पूछे गए सवालों व जवाबों के आधार पर नतीजे सामने आए।

16 सकारात्मक और 13 नकारात्मक भावों पर जानें जवाब: प्रतिभागियों से सर्वे में हफ्तेभर में महसूस की गई अलग-अलग भावनाओं से जुड़े सवालों के विस्तृत जवाब मांगे गए। सवालों में तनावमुक्ति और प्रसन्नता जैसे 16 सकारात्मक भावों को शामिल किया गया। वहीं गुस्सा और अपराधबोध जैसे 13 नकारात्मक भावों पर सवाल पूछे गए।


जब महामारी फैल रही थी तो सभी ने यह माना कि इसका बुजुर्गों पर ज्यादा असर हो रहा है। युवाओं की तुलना में वे ज्यादा जान गंवा रहे थे। लेकिन इन शोधों के बाद अब बुजुर्ग कह सकते हैं कि उनका जीवन इतना प्रभावित नहीं हुआ, जितना उनके बच्चों या नाती-पोतों का हुआ है। -सुजैन चार्ल्स, मनोविज्ञानी, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया

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