चीन में आठ करोड़ लोगों की जा सकती है नौकरी, 90 लाख नए छात्र होंगे स्नातक
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एक 26 साल के टेक कर्मचारी वांग ने पिछले एक साल में कई नौकरियां बदली हैं लेकिन बीते जनवरी में जब वांग को बीजिंग की एक इंटरनेट कंपनी से निकाल दिया गया तब वांग ने उम्मीद नहीं की थी कि दोबारा नौकरी पाना इतना मुश्किल हो जाएगा।
कोरोना महामारी ने इस साल चीन को कई हफ्तों तक बंद रहने पर मजबूर किया, जिसका परिणाम यह हुआ कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हिल गई और कई लोगों के हाथों से नौकरियां चली गई।
बीजिंग से मिले डाटा में पारदर्शिता कम है लेकिन चीन का बेरोजगारी का आधिकारिक आंकड़ा चार फीसद से बढ़कर पांच फीसद हो गया है, ये आंकड़ा सिर्फ चीन के शहरी इलाकों में पैदा हुई बेरोजगारी का है। चीन में मार्च में बेरोजगारी दर 5.9 फीसद थी जबकि फरवरी में यह 6.2 प्रतिशत थी।
हॉन्ग कॉन्ग के चीन के विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर विली लैम का कहना है कि चीन की बेरोजगारी दर जानबूझकर कम बताई जा सकती है। ऐसा जरूरी नहीं है कि सरकार वास्तविक डाटा सामने रखें, असल स्थिति और भी ज्यादा खराब हो सकती है।
चीन में डाटा एकत्र करने का अनोखा तरीका
बीजिंग की ओर से जारी बेरोजगारी दर में ग्रामीण इलाकों के लोगों को शामिल नहीं किया गया है। इस डाटा में उन करीब तीन करोड़ लोगों को शामिल नहीं किया गया जो निर्माण, मैन्यूफैक्चरिंग और कम वेतन पर काम करते हैं।
कुछ जानकारों का मानना है कि चीन में आठ करोड़ लोगों की नौकरी जाने वाला आंकड़ा वास्तविकता के समीप हो सकता है। एक अर्थशास्त्री के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि चीन के दस फीसद लोग जिनकी नौकरी लगने की संभावना थी, वो वास्तव में बेरोजगार हो सकते हैं।
हालांकि कोरोना वायरस का चीन की नौकरियों पर गहरा असर पड़ा है। लेकिन बीजिंग को अभी एक और बड़ा झटका मिलने वाला है, इस साल काफी संख्या में बच्चे अपनी ग्रेजुएशन पास कर रहे हैं। इसके बाद चीन में नौकरियों को लेकर सरकार पर प्रेशर ज्यादा पड़ जाएगा।
प्रोफेसक लैम के मुताबिक चीन के अधिकारियों को डर है कि बेरोजगारी की वजह से लोगों के बीच सामाजिक अशांति फैल जाएगी और राजनैतिक सरदर्द बढ़ जाएगा। प्रोफेसर की माने तो इस समय बीजिंग की सबसे बड़ी चिंता देश की जीडीपी नहीं बल्कि बेरोजगारी है।
ये स्थिति दुखदायी है
नौकरी पेशा लोगों को फिलहाल ऐसी कोई उम्मीद नहीं है कि हालात जल्द ठीक हो जाएंगे। टेक कर्मचारी वांग का कहना है कि ये स्थिति सबके लिए बहुत मुश्किल होने वाली है। वांग का कहना है कि वो अत्यंत दुखदायी महसूस करते हैं लेकिन वो जानते हैं कि वो कुछ नहीं कर सकते।
2015 के समय बीजिंग नए स्टार्टअप्स को कई सुविधाएं दे रहा था जिससे नए नए आंत्रेप्रेन्योर कई नई कंपनियां खोल रहे थे। उस समय बेरोजगारी दर 5 फीसद थी। वांग ने बताया कि कोरोना से पहले ही नए ऑफर्स कम होने लगे थे, बीजिंग की ओर से लगाए गए सख्त कानूनों की वजह वांग की कंपनी को 2018-19 में पूंजी की कमी देखने को मिली थी।
चीन की सबसे बड़ी जॉब साइट Zhaopin.com और चीन के बेरोजगारी शोध संस्थान की साझा रिपोर्ट में बताया गया कि 2020 के पहली तिमाही में 28 फीसद नौकरियां डूब जाएंगी। शोध में यह भी कह गया है कि नौकरी ढूंढने वालों की संख्या में नौ फीसद का इजाफा होगा।
नौकरी ढूंढने वालों की संख्या में इजाफा
बीजिंग में अधिकारियों का मानना है कि इस साल लगभग 87 लाख लोग अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करेंगे, जिससे नौकरी पाने की प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी। गैर अनुभवी लोगों के लिए नौकरी पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। ज्यादातर कंपनियां पहले से अनुभवी लोगों को नौकरी देने पर विचार कर रही हैं।
चीन में कई लोगों का मानना है कि कोरोना वायरस से उनके भविष्य की योजनाओं पर असर पड़ा है। कुछ बच्चे पत्रकारिता तो कुछ सार्वजनिक नौकरशाह बनना चाह रहे थे लेकिन कोरोना महामारी ने कई लोगों के सपनों को खत्म कर दिया है।
सरकार से मदद की गुहार
चीन की सरकार नए स्नातक किए बच्चों को नौकरी देने की योजना पर विचार कर रही है। चीन की सरकार नए बच्चों को प्राध्यापक और दूसरे तरह की नौकरियां देने पर जोर दे रही है। आने वाले दिनों में चीन के सामने कई तरह की समस्याएं आने वाली हैं।
हॉन्ग कॉन्ग के सिटी विश्विद्यालय के राजनीति विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर जोसेफ चेंग का कहना है कि चीन पहले से ही कर्ज में है, जिसकी वजह से इंफ्रास्टक्चर जैसे प्रोजेक्ट करने में दिक्कत आ सकती है, जो क्षेत्र सबसे ज्यादा नौकरियां पैदा करता है।
कई जानकारों का कहना है कि चीन के नीति बनाने वाले को आम जनता की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने पर ज्यादा फोकस देना चाहिए। वहीं कई जानकार कहते हैं कि देश के गरीबों के हाथ में ज्यादा से ज्यादा पैसा देने की जरूरत है।