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अमेरिका ने लिया 'बदला', बगदाद में मिसाइलें दागकर ईरान के 'बाहुबली' जनरल को मारा

Fri, 03 Jan 2020 01:37 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 03 Jan 2020 01:37 PM IST
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Eight killed in rocket attack on Baghdad airport
इराक के बगदाद एयरपोर्ट पर हमला - फोटो : ani
बगदाद हवाई अड्डे पर अमेरिकी सेना द्वारा किए गए मिसाइल हमले में ईरान के शीर्ष कमांडर सहित आठ लोगों की मौत हो गई है। ताजा हमले के बाद अमेरिका और ईरान में तनाव और बढ़ने के आसार हैं। वहीं इराक से भी अमेरिकी संबंधों में खटास आ सकती है। 
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अमेरिका ने कम से कम तीन कत्यूषा मिसाइल दागे जिससे बगदाद हवाई अड्डे पर भीषण तबाही मची। हवाई अड्डे पर मौजूद ईरान और हिज्बुल्लाह की संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा। अमेरिका ने यह हमला खुफिया जानकारी मिलने के बाद किया। अमेरिका ने यह भी दावा किया कि मारा गया ईरानी कमांडर अमेरिकी नागरिकों पर हमले की साजिश रच रहा था। 
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ट्रंप ने दिया था ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर की हत्या का आदेश: पेंटागन

अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेश में अमेरिकी कर्मियों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट रक्षात्मक कार्रवाई करते हुए ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर कासिम सुलेमानी को मारने का आदेश दिया था।

रेवोल्यूशनरी गार्ड ने कासिम सुलेमानी की मौत की पुष्टि की

ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड ने सरकारी टेलीविजन पर एक बयान में कुद्स यूनिट के कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत की पुष्टि की है। बयान में कहा गया है कि बगदाद में अमेरिकी बलों के हमले में उनकी मौत हो गई।


कासिम सुलेमानी (फाइल फोटो)

अमेरिका के इस हमले में ईरान की कुद्स फोर्स के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी की भी मौत हो गई है। वहीं पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सिज (पीएमएफ) के डिप्टी कमांडर अबु महदी अल-मुहांदिस भी मारा गया है। पीएमएफ ने इस हमले के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि इराकी सैन्य बल के घायलों को लेकर पुष्ट जानकारी नहीं मिली है।

अमेरिकी कर्मियों की रक्षा के लिए निर्णायक रक्षात्मक कार्रवाई की है: व्हाइट हाउस

व्हाइट हाउस ने बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने विदेशी आतंकवादी संगठन ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स-क्वैड्स फोर्स के प्रमुख कासिम सुलेमानी की हत्या करके विदेश में अमेरिकी कर्मियों की रक्षा के लिए निर्णायक रक्षात्मक कार्रवाई की है। व्हाइट हाउस ने यह भी दावा किया कि कासिम सुलेमानी सक्रिय रूप से इराक और उस क्षेत्र में रह रहे अमेरिकी राजनयिकों और अन्य सदस्यों पर हमले की योजना बना रहे थे।

ईरान बोला- अमेरिका को भारी कीमत चुकानी होगी

सुलेमानी की मौत को लेकर इरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने अमेरिका पर हमला बोला है। उन्होंने बगदाद हवाई अड्डे पर किए मिसाइल हमले को मूर्खतापूर्ण कदम बताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'अमेरिका का जनरल सुलेमानी को निशाना बनाने और उनकी हत्या करने के अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का कदम बहुत खतरनाक और मूर्खतापूर्ण है। उनका बल प्रभावी रूप से दाएश (आईएसआईएस), अल नुसराह, अल कायदा एट अल से लड़ता था। अमेरिका को अपने इस दुस्साहस की भारी कीमत चुकानी होगी।'

ईरान ने स्विटजरलैंड के राजदूत को किया तलब


अमेरिकी मिसाइल हमले में सुलेमानी की मौत से भड़के ईरान ने स्विटजरलैंड के राजदूत को तलब किया है। ईरान में अमेरिका का दूतावात नहीं है। वहां स्विटजरलैंड ही अमेरिका का प्रतिनिधित्व करता है। इसी वजह से ईरान ने उन्हें तलब किया है।

क्या है कुर्द फोर्स और कैसे हैं अमेरिका से संबंध

कुर्द फोर्स ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की एक शाखा है जो देश के बाहर अभियानों को अंजाम देता है। इसका प्रमुख कासिम सुलेमानी सीधे तौर पर देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खमेनेई के प्रति जवाबदेह था। 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में हुए सैन्य हमलों में इराक में सद्दाम हुसैन की सत्ता का अंत हो गया था। इसके बाद मध्यपूर्व में कुर्द सेना ने अपने अभियान तेज कर दिए थे।

कुर्द ने ईरान का समर्थन करने वाले दूसरे देशों के सरकार विरोधी गुटों को हथियार, पैसे और प्रशिक्षण देना शुरू किया। इसके अलावा युद्ध के गैर-पारंपरिक तरीको को अपनाना भी शुरू किया। जिसके कारण ईरान को पारंपरिक हथियारों पर निर्भर रहने वाले विरोधियों पर बढ़त मिली। जिसमें स्वार्म तकनीक (बड़ी सैन्य टुकड़ी के साथ अलग-अलग ठिकानों से लड़ना), ड्रोन का इस्तेमाल करना और साइबर हमले शामिल हैं।

पिछले साल अप्रैल में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फोर्स को विदेशी आतंकवादी संगठन करार दिया था। इस फैसले को लेकर ईरान ने कहा था कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सेना खुद किसी आतंकवादी संगठन से कम नहीं है।

अमेरिका के निशाने पर क्यों हैं कताइब हिज्बुल्ला

अमेरिका का कहना है कि कताइब हिज्बुल्ला इराक में लगातार उसके सैन्य ठिकानों पर हमला करता रहता है। उसने 2009 से इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। इसके कमांडर अबु महदी अल-मुहांदिस को उसने वैश्विक आतंकी घोषित किया हुआ है।

अमेरिका का कहना है कि इराक की स्थिरता और शांति के लिए यह संगठन खतरा है। अमेरिका के रक्षा विभाग का कहना है कि हिज्बुल्ला का ईरान के इस्लामिक रिवॉल्युशन गार्ड कोर यानी आईआरजीसी के वैश्विक ऑपरेशन आर्म कुर्द फोर्स से संबंध है और उसे ईरान से कई तरह की मदद मिलती है।

इराक-ईरान के कमांडरों के मारे जाने के बाद ट्रंप ने साझा की अमेरिकी झंडे की तस्वीर

वाशिंगटन से जारी अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ‘पेंटागन’ ने कहा है कि वह इराक में उसके दूतावास पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में 750 अमेरिकी सैनिक और रवाना कर रहा है। रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने इस कदम को एहतियाती बताते हुए कहा कि नई टुकड़ी में 82वें एयरबोर्न डिवीजन की यूनिट को अगले कुछ दिनों में भेजने की तैयारी है।

इनमें से 500 को रवाना भी कर दिया गया है जबकि 4,000 और सैनिकों को भी जल्द ही रवाना किया जाना है। विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने इराक में हुए हमले को आतंकवादियों की साजिश करार दिया है और इनमें से एक की पहचान अबू महदी अल मुहादिस के रूप में की है। मुहादिस तेहरान समर्थित इराकी सशस्त्र समूहों के शिया नेटवर्क हश्द अल-शाबी का दूसरे नंबर का प्रमुख है।

कतैब हिजबुल्लाह भी इसी का एक हिस्सा है जिसे अमेरिकी हवाई हमलों में निशाना बनाया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए साल की बधाई देते हुए ईरान को बड़े ही सख्त अंदाज में अपनी धमकी दी है। उन्होंने इराक के अमेरिकी दूतावास पर हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, ‘इराक स्थित अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा व्यवस्था कई घंटे पूर्व बहाल की जा चुकी है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के 'यूएसए हिंंदी में' ट्विटर हैंडल पर इरान पर  निशाना साधा गया है। इसमें लिखा गया है कि "ईरान के लोग इस बात को समझते हैं कि उनके नेताओं को अपनी हरकतों से बाज आना होगा।''

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