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संबंध विकसित करने पर जोर: अमेरिका और चीन सिर्फ तनाव चाहते हैं, एक-दूसरे के साथ युद्ध नहीं!

Tue, 30 Nov 2021 04:58 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 30 Nov 2021 04:58 PM IST
सार

चीन सरकार के सूत्रों ने मीडिया से कहा है कि चीन भी अमेरिका के साथ दुर्घटनावश होने वाले किसी टकराव को टालना चाहता है। उन्होंने कहा है कि चीन इस मकसद से अमेरिका के साथ रक्षा संबंधी वार्ता का एक तंत्र विकसित करना चाहता है। विश्लेषकों का कहना है कि ताइवान के मुद्दे पर दोनों देशों में तनाव लगातार बढ़ रहा है...

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Efforts have intensified to organize a meeting of the top defense officials of the US and China as soon as possible
अमेरिका चीन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अमेरिका और चीन के सर्वोच्च रक्षा अधिकारियों की जल्द से जल्द बैठक आयोजित करने की कोशिश तेज हो गई हैं। मकसद यह है कि दोनों देशों के बीच बढ़ रहा तनाव कहीं दुर्घटनावश युद्ध में न तब्दील हो जाए। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक एक्सक्लूसिव खबर के मुताबिक अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन की चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के रक्षा प्रभारी के साथ बैठक आयोजित करने की कोशिश चल रही है। ये बैठक इसी साल होने की संभावना है।

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इस खबर के मुताबिक ऑस्टिन चाहते हैं कि वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के करीबी अधिकारियों के साथ संपर्क में रहें। उधर चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू चियान ने गुरुवार को कहा- ‘चीन, अमेरिका और चीन की सेनाओं के बीच संबंध विकसित करने को बड़ा महत्त्व देता है। वह अमेरिका के साथ विचार-विमर्श और सहयोग का इच्छुक है।’

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मिलिटरी कमीशन के उप प्रमुख से भेंट चाहते हैं ऑस्टिन

पिछली 15 नवंबर को चीन के राष्ट्रपति शी के साथ अपनी वर्चुअल शिखर वार्ता में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने दोनों देश के बीच ऐसी समझदारी बनाने पर जोर दिया था, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि गलतफहमी के कारण दोनों के बीच कहीं युद्ध ना छिड़ जाए। बताया जाता है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री ऑस्टिन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सेंट्रल मिलिटरी कमीशन के उप प्रमुख शु चिलियान से मुलाकात करना चाहते हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘शू ही चीनी सेना की रोजमर्रा की कार्रवाइयों के असली प्रभारी हैं।’ मिलिटरी कमीशन के अध्यक्ष शी जिनपिंग हैं। शू का दर्जा उनके ठीक बाद आता है।

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असली ताकत मिलिटरी कमीशन के पास

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने बीते अगस्त में कहा था- ‘हम जिस तरह की वार्ताएं चाहते हैं, उसके लिए हमारी राय में यह महत्त्वपूर्ण है कि ऑस्टिन और मिलिटरी कमीशन के उपाध्यक्ष (शू चिलियान) के बीच बातचीत हो।’ लेकिन चीन प्रोटोकॉल में शू का दर्जा अमेरिकी रक्षा मंत्री से ऊपर मानता है। इसलिए अब तक ऑस्टिन की मुलाकात चीन के रक्षा मंत्री से ही हुई है। चीन में रक्षा मंत्री सरकारी पदाधिकारी हैं, लेकिन वहां असली ताकत कम्युनिस्ट पार्टी के मिलिटरी कमीशन के पास होती है।


अमेरिकी सहायक उप रक्षा मंत्री माइकल चेज ने बीते अगस्त और सितंबर में चीनी सेना के अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग कार्यालय के के निदेशक हुआंग शुएपिंग से बातचीत की थी। लेकिन अमेरिका का मानना है कि ऐसी तमाम वार्ताओं के बावजूद दोनों देशो के बीच रक्षा संपर्क अभी पर्याप्त नहीं है।


चीन सरकार के सूत्रों ने मीडिया से कहा है कि चीन भी अमेरिका के साथ दुर्घटनावश होने वाले किसी टकराव को टालना चाहता है। उन्होंने कहा है कि चीन इस मकसद से अमेरिका के साथ रक्षा संबंधी वार्ता का एक तंत्र विकसित करना चाहता है। विश्लेषकों का कहना है कि ताइवान के मुद्दे पर दोनों देशों में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसके अलावा दक्षिण चीन सागर में भी दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ने के संकेत हैं। ऐसे में गलतफहमी या दुर्घटनावश लड़ाई छिड़ जाने का अंदेशा दोनों देशों में बना हुआ है। इस आशंका को दोनों देश टालना चाहते हैं।

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