Pakistan: सियासी दलों ने आम चुनाव में महिलाओं के आरक्षण को किया नजरअंदाज, महिला संगठन ने की कार्रवाई की मांग
Pakistan: पाकिस्तान के एक महिला संगठन ने चुनाव आयोग (ईसीपी) से उन सियासी दलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है, जिन्होंने संसदीय चुनाव के लिए सीटें आवंटित करते समय महिलाओं के लिए आरक्षण को नजरअंदाज किया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पाकिस्तान में चार दिन बाद आम चुनाव होने हैं। इन चुनावों से पहले पीटीआई पार्टी के संस्थापक इमरान खान जेल में बंद हैं। जबकि, पीएमएल-एन और पीपीपी पार्टी जोर-शोर से अपने प्रचार अभियान जुटी हुई हैं। इस बीच, देश के एक महिला संगठन ने चुनाव आयोग (ईसीपी) से उन सियासी दलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है, जिन्होंने संसदीय चुनाव के लिए सीटें आवंटित करते समय महिलाओं के लिए आरक्षण को नजरअंदाज किया। प्रत्येक राजनीतिक दल के लिए राष्ट्रीय सभा (कौमी असेंबली) और चार प्रांतीय विधानसभाओं में सामान्य सीटों पर कम से कम पांच फीसदी महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारना अनिवार्य है।
इन दलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
'डॉन' अखबार की खबर के मुताबिक, 'औरत फाउंडेशन' की ओर से कई सियासी दलों के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दी गई है। महिला संगठन ने आयोग से पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी), जमात-ए-इस्लामी (जेआई), अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी), तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी), जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ), बलूचिस्तान नेशनल पार्टी (बीएनपी), पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) दलों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
शिकायत में इमरान की पार्टी का नाम नहीं शामिल
इसमें जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पीटीआई पार्टी का नाम शामिल नहीं किया गया है। क्योंकि पार्टी को चुनाव चिह्न से वंचित किया गया है। जिन चार प्रांतीय विधानसभाओं में चुनाव होने हैं, उनमें पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान शामिल हैं।
पीपीपी पार्टी ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, पीपीपी नेता फरहतुल्ला बाबर ने 'औरत फाउंडेशन' के आरोपों को खारिज किया और दावा किया कि उनकी पार्टी ने सामान्य सीटों पर पांच फीसदी से ज्यादा महिलाओं को मैदान में उतारा है। उन्होंने कहा कि 2018 के आम चुनावों में भी पीपीपी ने पांच फीसदी से ज्यादा महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। उन्होंने कहा, चुनाव आयोग की शर्त को पूरा करने के लिए ज्यादातर सियासी दल उन सीटों पर महिला उम्मीदवारों को उतारते हैं, जिन पर वे जीत नहीं सकतीं। पीपीपी एक मात्र ऐसा राजनीति दल है, जिसमें कई महिला उम्मीदवार हैं, जो स्वतंत्र रूप से सामान्य सीटें जीत सकती हैं। बाबर ने कहा, इस बात पर बहस शुरू होनी चाहिए कि जीतने योग्य सीटें महिलाओं को दी जानी चाहिए, ताकि संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व ज्यादा हो।
क्या कहता है चुनावी कानून
चुनाव अधिनियम 2007 की धारा 206 में कहा गया है कि प्रत्येक सियासी दल असेंबली में महिलाओं को कम से कम पांच फीसदी सामान्य सीट पर टिकट देंगे। इस अधिनियम के उल्लंघन के लिए सजा कानून की धारा 217 में प्रदान की गई है। औरत फाउंडेशन ने आयोग से शिकायत की है और उससे धारा 217 और कानून के अन्य प्रावधानों के तहत सियासी दलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का अनुरोध किया है।