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ड्रेगन पर अमेरिका सख्त, चीन-पाक आर्थिक गलियारा समेत पाकिस्तान को दिए कर्ज पर उठाए सवाल

Fri, 22 May 2020 06:12 AM IST
संदीप भट्ट वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: संदीप भट्ट Updated Fri, 22 May 2020 06:12 AM IST
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Ease burden of unfair predatory lending on Pakistan US to China

अमेरिका ने चीन पर सख्ती से सवाल उठाते हुए कहा है कि वह पाकिस्तान को दिए गए ‘अनुचित और उत्पीड़क’ कर्ज के बोझ को कम करे। दक्षिण-मध्य एशिया के लिए विदेश मंत्रालय की कार्यवाहक सहायक मंत्री एलिस वेल्स ने कहा कि चाहे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) हो या कोई दूसरी सहायता हो, अमेरिका हमेशा ऐसे निवेश का समर्थन करता है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हो।

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यह बयान इसलिए आया है ताकि पाकिस्तान कोरोना महामारी के संकट के दौरान लिए गए उधार को चुकता कर सके। बता दें कि अमेरिका पहले भी चीन द्वारा पाक को दिए जा रहे कर्ज पर सवाल उठा चुका है। वेल्स ने कहा, हम ऐसे निवेश का समर्थन करते हैं जो वैश्विक मानकों के हिसाब से हो और पर्यावरण को बेहतर बनाता हो ताकि क्षेत्रीय लोगों को उसका लाभ हो सके।
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उन्होंने कहा, ‘मैंने सीपीईसी को लेकर अमेरिकी सरकार की चिंताओं का जिक्र किया है क्योंकि इसमें पारदर्शिता का अभाव है और चीनी संगठनों को अनुचित दर पर लाभ मिल रहा है। मुझे लगता है कि कोविड-19 जैसे संकट के समय, जब दुनिया अर्थव्यवस्था के बंद होने के नतीजों के जूझ रही है, चीन के लिए यह जरूरी है कि वह इस उत्पीड़क, बोझिल और अनुचित कर्ज का बोझ कम करे।’ वेल्स ने उम्मीद जताई कि चीन या तो कर्ज माफ करेगा या उसका पुनर्गठन करेगा।

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शांति के लिए पाकिस्तानी प्रतिबद्धता बढ़ी

शीर्ष अमेरिकी राजनयिक एलिस वेल्स ने कहा कि शांति के लिए पाकिस्तानी प्रतिबद्धता बढ़ी है। उसने आतंकी समूहों और उनके वित्तपोषण को रोकने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। वेल्स ने कहा, दक्षिण एशिया रणनीति ने स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान को इन समूहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जरूरत है, खासकर जो अफगानिस्तान में संघर्ष का समर्थन करते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा पैदा करते हैं।

पाकिस्तान को प्राथमिकता देना जारी रखेंगे: चीन

चीन ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह अपने पड़ोस की कूटनीति में पाकिस्तान को प्राथमिकता देना जारी रखेगा और अपने प्रगाढ़ संबंधों को और मजबूती प्रदान करेगा। दोनों सहयोगी देशों के राजनयिक संबंधों की स्थापना के 69 वर्ष पूरे हुए हैं।

भारत के बीजिंग के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने के एक साल बाद पाकिस्तान ने 1951 में चीन को मान्यता दी थी। 1950 में चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने के साथ ही भारत एशिया का पहला गैर-कम्युनिस्ट देश बन गया था। हालांकि, इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान के चीन के साथ राजनयिक संबंध भले ही देर से बने, लेकिन बाद में वह कम्युनिस्ट चीन का सबसे करीबी सहयोगी बन के उभरा है।

हाल के वर्षों में दोनों देशों ने 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के साथ अपने संबंध और अधिक प्रगाढ़ किए हैं। यह बीजिंग द्वारा विदेश में किया सबसे बड़ा निवेश है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने बृहस्पतिवार को यहां एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि चीन और पाकिस्तान के राजनयिक संबंधों की 69 वीं वर्षगांठ पर मैं बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि भविष्य में, हमें द्विपक्षीय संबंधों के और बढ़ने का पूरा भरोसा है। हम पाकिस्तान को अपने पड़ोस की कूटनीति में प्राथमिकता देना जारी रखेंगे।

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