फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Earth's 5 scary changes: Lands are sinking, glaciers melt, somewhere heat and cold havoc, know what happening?

पृथ्वी के 5 डरावने बदलाव: जमीनें धंस रहीं, ग्लेशियर पिघले, कहीं गर्मी तो कहीं ठंड का कहर, जानें क्या हो रहा?

Tue, 21 Feb 2023 01:54 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Tue, 21 Feb 2023 01:54 PM IST
विज्ञापन
सार
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक रिपोर्ट सामने आई है। इसमें कई हैरान करने वाले दावे किए गए हैं। आइए जानते हैं भारत के राज्यों को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा गया है?  इसका इंसानी जीवन पर क्या असर हो सकता है? अब आगे क्या होगा? दुनिया की ताकतें इन मुश्किलों का सामना करने के लिए क्या कर रही हैं? 
loader
Earth's 5 scary changes: Lands are sinking, glaciers melt, somewhere heat and cold havoc, know what happening?
जलवायु परिवर्तन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जलवायु परिवर्तन को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। ये रिपोर्ट क्रॉस डिपेंडेंसी इनिशिएटिव (एक्सडीआई) ने साल 2050 को देखते हुए तैयार की है। इसमें दुनिया के 2,600 राज्यों व प्रांतों को कवर किया गया है। रिपोर्ट की मानें तो भारत के नौ राज्यों में मानव निर्मित ढांचे को जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा खतरा है। इसके अलावा भी रिपोर्ट में काफी कुछ दावे किए गए हैं। 

 
इस रिपोर्ट में ऐसा क्या है? भारत के राज्यों को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा गया है?  इसका इंसानी जीवन पर क्या असर हो सकता है? अब आगे क्या होगा? दुनिया की ताकतें इन मुश्किलों का सामना करने के लिए क्या कर रही हैं? आइए समझते हैं...

 

पहले जानिए जलवायु परिवर्तन की रिपोर्ट में क्या-क्या है? 
क्रॉस डिपेंडेंसी इनिशिएटिव (एक्सडीआई) की रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक जोखिम वाले दुनिया के 50 राज्यों में नौ भारत के हैं। इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब और केरल शामिल हैं। इसके अलावा 100 शहरों की सूची में 14 भारतीय राज्य हैं। इनमें मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड शामिल हैं। 

रिपोर्ट में मानव गतिविधियों और घरों से लेकर इमारतों तक यानी मानव निर्मित पर्यावरण को जलवायु परिवर्तन व मौसम के चरम हालात से नुकसान के पूर्वानुमान का प्रयास किया गया है। इसी आधार पर रैंकिंग की गई। यहां बाढ़, जंगलों की आग, लू, समुद्र सतह के बढ़ने जैसे खतरे बढ़ने का इशारा किया गया है।  पाकिस्तान में हाल में आई बाढ़ से हुई तबाही को इस जोखिम का एक उदाहरण बताया गया है। 

इस रिपोर्ट में सरकारों द्वारा कार्बन उत्सर्जन रोकने के लिए फौरन कदम उठाने की जरूरत बताते हुए कहा गया है कि ऐसे बाढ़ के लिए सुरक्षा जैसे उपाय भी करने होंगे। जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान को भी बर्बादी का एक बड़ा खतरा बताया गया है। 
 

चीन सबसे ऊपर, अमेरिका दूसरे नंबर पर 
एक ही देश के सबसे ज्यादा खतरे वाली जगहों में चीन सबसे ऊपर है। अमेरिका दूसरे नंबर पर है। एक्सडीआई में विज्ञान और विकास प्रमुख कार्ल मैलन ने रिपोर्ट के बारे में बताते हुए कहा, 'हमें चीन, अमेरिका और भारत जैसे देशों से अत्यधिक मजबूत संकेत मिले हैं और हम वैश्विक अर्थव्यवस्था के इंजनों की बात कर रहे हैं जहां बहुत विस्तृत ढांचा बना है।' 

जयवायु परिवर्तन शहरों पर का क्या असर होगा?
विश्लेषकों ने पाया कि खतरे वाले इलाके तटीय भी हैं और अंदरूनी भी और वहां बने मूलभूत ढांचे विनाश का खतरा झेल रहे हैं। रिपोर्ट में जो शहर जोखिम वाली लिस्ट में शामिल हैं। वहां अत्यधिक गर्मी, जंगल की आग, मिट्टी का कटाव, अत्यधिक तेज हवाएं और अत्यधिक सर्दी पड़ने की आशंका है। 
 

तापमान को बढ़ने से रोकना होगा 
विश्लेषकों ने 2,600 क्षेत्रों का जायजा लिया है और गणना की कि अगर 1990 की तुलना में इस सदी के आखिर तक औसत तापमान तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ा, तब 2050 तक कितना नुकसान होगा? यूएन की पर्यावरण समिति आईपीसीसी ने कहा है कि अगर खतरा रोकना है तो इस सदी के आखिर तक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं बढ़ना चाहिए। 

एक्सडीआई में विज्ञान और विकास प्रमुख कार्ल मैलन के अनुसार, इन खतरों का असर आने वाले निवेश पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा, 'जो लोग इस सूची में शामिल राज्यों और प्रांतों में फैक्ट्री लगाने या सप्लाई चेन स्थापित करने के बारे में सोच रहे हैं, वे दो बार सोचेंगे। सौ सबसे ज्यादा खतरे वाले इलाकों की सूची में बीजिंग, ब्यून एयर्स, हो ची मिन्ह सिटी, जकार्ता, मुंबई, साओ पाउलो और ताइवान शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, जर्मनी और इटली के इलाके भी इस सूची का हिस्सा हैं। यूरोप में जर्मनी का लोअर सैक्सनी प्रांत सबसे ज्यादा खतरे में हैं जबकि वेनिस शहर के इर्द गिर्द वाला वेनितो प्रांत चौथे नंबर पर है। 
 

पांच बड़े प्राकृतिक बदलाव, जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया   

1. तेजी से धंस रहीं जमीनें 
हाल ही में दुनिया के कई देशों में पहाड़ी इलाकों पर जमीनें धंसने का मामला सामने आ चुका है। भारत में उत्तराखंड के जोशीमठ इसका ताजा उदाहरण है। यहां कई इलाकों में जमीनें धंसने का मामला सामने आया है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत के घाटी इलाकों में इस तरह के बदलाव हुए हैं। अमेरिका, मैक्सिको समेत कई देशों में इस तरह से पहाड़ धंस रहे हैं। 

अमेरिका में 45 राज्यों में 17,000 वर्ग मील से अधिक क्षेत्र धंसाव से सीधे प्रभावित हुआ है। भूमिगत जल के दोहन के कारण अमेरिका में 80 प्रतिशत से अधिक जगहों पर जमीन धंसी है। भूमि और जल संसाधनों के बढ़ते दोहन से यह खतरा बढ़ सकता है।

मैक्सिको सिटी में बेसिलिका के निचले इलाके की नींव धंस रही है। धंसाव की यह घटना पूरे मेक्सिको सिटी में हो रही है। इसने औपनिवेशिक युग की इमारतों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। राजमार्गों को जाम कर दिया है और जल आपूर्ति और अपशिष्ट जल निकासी को बाधित कर दिया है। कुछ इमारतों को असुरक्षित माना गया है और उन्हें बंद कर दिया गया है। 
 

2. पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा
मौसम से जुड़ा भी एक डराने वाला आंकड़ा सामने आया है। मालूम चला है कि 1880 से अब तक पृथ्वी पर 2022 छठवां सबसे गर्म साल रहा है। भारत के लिहाज से देखा जाए तो 1901 के बाद से साल 2022 को पांचवा सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया।  

वर्ष 1965-2021 के आंकड़ों के आधार पर 11.2 के सामान्य के मुकाबले पिछले वर्ष 15 चक्रवात संबंधी घटनाएं देखी गईं, जिनमें तीन चक्रवाती तूफान और उत्तर हिंद महासागर के ऊपर बने निम्न दबाव के 12 क्षेत्र शामिल हैं। इनके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में अत्यधिक भारी वर्षा, बाढ़, भूस्खलन, बिजली गिरने, आंधी और सूखे जैसी मौसम संबंधी असामान्य घटनाओं का भी अनुभव किया गया। 
 

3. तेजी से पिघल रहा ग्लेशियर
1900 की शुरुआत से दुनिया भर के कई ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। खासतौर पर औद्योगिक क्रांति के बाद से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन ने तापमान बढ़ा दिया है। पृथ्वी का तापमान बढ़ने का असर ग्लेशियल पर पड़ रहा है और ये तेजी से पिघलने लगा है। worldwildlife की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर इसी तरह से पृथ्वी का तापमान बढ़ता रहा तो दुनिया के बचे हुए ग्लेशियरों में से एक तिहाई से अधिक साल 2100 से पहले पिघल जाएगा। 

समुद्री बर्फ की बात करें तो आर्कटिक में सबसे पुरानी और सबसे मोटी बर्फ का 95% हिस्सा पहले ही पिघल चुका है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर उत्सर्जन अनियंत्रित रूप से बढ़ता रहा, तो साल 2040 तक गर्मियों में आर्कटिक का सारा बर्फ पिघल जाएगा। 

अगर उत्सर्जन में वृद्धि जारी रहती है, तो सदी के अंत तक ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर पिघलने की मौजूदा रफ्तार दोगुनी हो जाएगी। अगर ग्रीनलैंड की सारी बर्फ पिघल जाए, तो यह वैश्विक समुद्र के स्तर को 20 फीट तक बढ़ा देगा। ये पूरी दुनिया के लिए सबसे खतरनाक दौर होगा। 
 

4. चक्रवाती तूफान की संख्या बढ़ने लगी 
ग्लेशियर पिघलने से समुद्र का स्तर तेजी से बढ़ रहा हे। गर्म हवा और समुद्र के बढ़ते स्तर से चक्रवाती तूफानों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। IISER द्वारा इस अप्रैल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, उत्तर हिंद महासागर के अरब सागर की ओर, 2001 से 2019 के बीच चक्रवाती तूफानों (63-88 किमी प्रति घंटे) में 52 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। ये भी समुद्री किनारे बसे देशों के लिए एक चिंता की बात है। कुछ स्टडी में पाया गया है कि हिंद महासागर के ऊपर एसएसटी में 0.5-0.7 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है। 
 

5. मौसम में अप्रत्याशित बदलाव
मौसम, प्रकृति पर काम करने वाली संस्थान carbonbrief की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ दशक में मौसम में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिले हैं। मसलन इस बीच, 30 प्रतिशत अत्यधिक गर्मी बढ़ गई है। भारी बारिश और बाढ़ के मामलों में 25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। जहां सूखा पड़ता है, वहां कई नदियां सूख गई हैं। चीन, भारत, अफ्रीका समेत दुनिया के कई देश इसकी चपेट में भी हैं। सूखा के मामलों में 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह जहां, ठंड, तूफान, जंगल जलने के मामले, नदियों के सूखने के मामलों में भी बेतहाशा वृद्धि हुई है। सूखे और गर्मी के चलते बड़े-बड़े जंगलों में अचानक से आग लगने की घटनाएं बढ़ गईं हैं। हरियाली घट रही है। प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। लोगों को साफ हवा मिलना भी मुश्किल हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed