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MEA: विदेश मंत्री जयशंकर बोले- US-PAK का रिश्ता किसी काम का नहीं, F-16 विमानों के लिए मदद पैकेज पर कही ये बात
Mon, 26 Sep 2022 05:19 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 26 Sep 2022 05:19 PM IST
सार
पाकिस्तान अमेरिका संबंधों को लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि यह एक ऐसा रिश्ता है, जिसने न तो पाकिस्तान की अच्छी तरह से सेवा की है और न ही अमेरिकी हितों की सेवा की है। इसलिए अमेरिका को इस पर विचार करना है कि इस रिश्ते से क्या लाभ है।
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर
- फोटो : ANI
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विस्तार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एफ-16 लड़ाकू विमानों के लिए पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा 45 करोड़ डॉलर के पैकेज की मंजूरी के फैसले पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, अमेरिका-पाक संबंधों को लेकर दोनों में से किसी देश को ‘कोई फायदा नहीं’ हुआ है। उन्होंने पाकिस्तान को पैकेज देने पर अमेरिका द्वारा दी गई सफाई को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि आप ऐसी बातों से किसी को बेवकूफ नहीं बना सकते।
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जयशंकर ने भारतीय-अमेरिकियों के साथ एक संवाद के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ईमानदारी से कहूं, तो इस संबंध से न तो पाक को कोई लाभ हुआ है और न ही इससे अमेरिकी हितों को पूरा करने में मदद मिली है। इसलिए अब अमेरिका को यह सोचना चाहिए कि इस संबंध का फायदा क्या है और इससे उन्हें क्या मिल रहा है। अमेरिका ने पाक को पैकेज पर तर्क दिया था कि आतंक से मुकाबले के लिए एफ-16 के रख-रखाव के वास्ते पैकेज को मंजूरी दी गई है।
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जयशंकर ने इस अमेरिकी तर्क का जिक्र करते हुए कहा कि हर कोई जानता है कि एफ-16 का कहां और किसके खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा, आप इस प्रकार की बातें कहकर किसी को मूर्ख नहीं बना सकते। इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने पाक को अमेरिकी पैकेज पर रोक लगा दी थी।
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राजनाथ ने उसी वक्त जताई थी चिंता
हाल ही में जब अमेरिका पाकिस्तान को एफ-16 विमानों के रखरखाव संबंधी पैकेज को मंजूरी दी थी तब भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन से इस मुद्दे पर चिंता प्रकट की थी। जयशंकर ने भी कहा कि यदि मैं एक अमेरिकी नीति-निर्माता से बात करता तो वास्तव में कहता कि आप क्या कर रहे हैं? जयशंकर अगले तीन दिन और वाशिंगटन में रहकर शीर्ष अफसरों से मिलेंगे।
अमेरिकी मीडिया की आलोचना, भारत को लेकर खबरों में ‘पूर्वाग्रह’
जयशंकर ने भारत के संबंध में ‘पूर्वाग्रही’ खबरों पर ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ सहित कई अमेरिकी मीडिया घरानों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, मीडिया में आने वाली खबरें मैं देखता हूं। कुछ अखबार हैं, जिनके बारे में आपको अच्छी तरह पता होता है कि वे क्या लिखने वाले हैं और ऐसा ही एक समाचार पत्र यहां भी है।
जयशंकर ने भारत विरोधी ताकतों के मजबूत होने से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा, मैं मानता हूं कि कुछ लोग पूर्वाग्रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समूहों की भारत में जीत नहीं हो रही, ये समूह देश के बाहर जीतने की कोशिश करते हैं और बाहर से भारत की राय व धारणाएं बनाने की कोशिश करते हैं।
सतर्क रहने की जरूरत
विदेश मंत्री ने कहा इन ‘पूर्वाग्रहों’ को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। कश्मीर मुद्दे को अमेरिका में गलत ढंग से पेश किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि कोई आतंकी घटना होती है तो यह मायने नहीं रखता कि किस धर्म के व्यक्ति की जान गई। इंटरनेट बंद करने पर बड़ा शोर होता है। अब, यदि आप उस स्तर पर पहुंच गए हैं जहां आप कहते हैं कि इंटरनेट बंद कर देना मानव जीवन के नुकसान से अधिक खतरनाक है, तो मैं क्या कह सकता हूं?
रूसी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता का कारण भारत से कोशिश का अभाव नहीं
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि रूसी रक्षा उपकरणों पर भारत की निर्भरता और मॉस्को के साथ मजबूत रिश्तों का कारण यह नहीं है कि नई दिल्ली ने इन उपकरणों को हासिल करने के लिए अमेरिका से संपर्क नहीं किया। उन्होंने कहा, हमारे संबंधों में आया एक बदलाव रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी है, जो शायद पिछले करीब 15 साल में अपने मौजूदा रूप में आया है। 1965 से आगामी 40 साल तक भारत में अमेरिका का कोई सैन्य उपकरण नहीं आया। इस दौरान भारत-सोवियत, भारत-रूस के रिश्ते मजबूत हुए। लेकिन इसका कारण भारत की ओर से कोशिश का अभाव नहीं है। मैं इसकी पुष्टि स्वयं कर सकता हूं।