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Raisina Roundtable: जयशंकर ने रायसीना राउंडटेबल सम्मेलन को किया संबोधित, भारत-जापान संबंधों पर कही यह बात
Thu, 07 Mar 2024 07:49 AM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 07 Mar 2024 07:49 AM IST
सार
जयशंकर ने कहा कि भारत का यह परिवर्तन हमें अधिक प्रभावी और विश्वसनीय भागीदार बनाता है। व्यापार करने में आसानी हो, जिंदगी जीने के तरीकों में सरलता लाने की बात हो, डिजिटल डिलीवरी, स्टार्टअप और इनोवेशन संस्कृति हो या अंतरराष्ट्रीय एजेंडे को आकार देने की बात हो, भारत का रुख साफ है। आज हम एक बहुत अलग देश हैं।
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Dr. S Jaishankar
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने टोक्यो में ओआरएफ द्वारा रायसीना राउंडटेबल सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, 'यह महत्वपूर्ण है कि जापान आज भारत में बदलाव की गति की सराहना करे। यह वो देश है जो आज हर रोज 28 किलोमीटर के हाईवे बना रहा है, जो हर साल 8 नए हवाई अड्डे बना रहा है। ये परिवर्तन हमें और अधिक प्रभावी और विश्वसनीय साझेदार बनाता है।
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जयशंकर ने कहा कि भारत का यह परिवर्तन हमें अधिक प्रभावी और विश्वसनीय भागीदार बनाता है। व्यापार करने में आसानी हो, जिंदगी जीने के तरीकों में सरलता लाने की बात हो, डिजिटल डिलीवरी, स्टार्टअप और इनोवेशन संस्कृति हो या अंतरराष्ट्रीय एजेंडे को आकार देने की बात हो, भारत का रुख साफ है। आज हम एक बहुत अलग देश हैं।
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पूर्व और पश्चिम दोनों ओर प्रमुख गलियारों पर काम कर रहे
उन्होंने कहा कि भारत आज अपने पूर्व और पश्चिम दोनों ओर प्रमुख गलियारों पर काम कर रहा है। उनमें आईएमएसी (भारत मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर) पहल शामिल है। यह जब पूरा होगा, तब यह एशिया के माध्यम से अटलांटिक को प्रशांत से जोड़ देंगे। पारदर्शी और सहयोगात्मक कनेक्टिविटी की आवश्यकता के बारे में भारत और जापान के विचार समान हैं।
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ग्लोबल साउथ पर भी विस्तार से बात की
विदेश मंत्री ने ग्लोबल साउथ पर भी विस्तार से बात की और जोर दिया कि भारत जिम्मेदारी के प्रति सचेत है। उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में भारत जिम्मेदारी के प्रति सचेत है। हमारे प्रयास आज विभिन्न महाद्वीपों के 78 देशों तक फैले हुए हैं। यह सवाल भी उठता है कि क्या भारत और जापान अपनी विकास प्रणालियों के संबंध में समन्वय कर सकते हैं? हम इसे लेकर भी स्पष्ट हैं।
समुद्री सुरक्षा पर कही यह बात
समुद्री सुरक्षा और सुरक्षा विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गई है। कई चुनौतियां हमारे सामने हैं। हम देख सकते हैं कि लाल सागर में हम पहली बार हताहत हुए। बड़े क्षेत्र के लाभ के लिए हमारी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना भी आवश्यक है।
जापान की यात्रा पर हैं विदेश मंत्री
दरअसल, जयशंकर विशेष रूप से 6-8 मार्च तक जापान की यात्रा पर हैं। इससे पहले उन्होंने दक्षिण कोरिया का दौरा किया, जहां अपने प्रवास के दौरान उन्होंने शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। वह अपने जापानी समकक्ष योको कामिकावा के साथ 16वें भारत-जापान विदेश मंत्री की रणनीतिक वार्ता के लिए जापान में हैं।