{"_id":"5c4a606dbdec222bf4527f57","slug":"e-waste-over-the-weight-of-the-total-planes-so-far","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब तक बने कुल विमानों के वजन से ज्यादा ई-कचरा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
अब तक बने कुल विमानों के वजन से ज्यादा ई-कचरा
Fri, 25 Jan 2019 06:33 AM IST
गौरव द्विवेदी
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Fri, 25 Jan 2019 06:33 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बढ़ता इलेक्ट्रानिक कचरा दुनियाभर में सेहत और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल पांच करोड़ टन ई-कचरा हर साल निकल रहा है, जो वर्ष 2050 तक बढ़कर 120 करोड़ टन सालाना हो जाएगा। यह अब तक बने कुल व्यावसायिक विमानों के वजन से भी ज्यादा होगा। विश्व आर्थिक मंच द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल हर वर्ष 62 अरब डॉलर से ज्यादा का ई-कचरा निकलता है। यह हर साल बनने वाली कुल चांदी की कीमत से तीन गुना ज्यादा है।
विज्ञापन
दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच के सम्मेलन के दौरान गुरुवार को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक एक टन स्वर्ण अयस्क में जितना सोना होता है उससे 100 गुना ज्यादा सोना एक टन मोबाइल फोन में होता है। रिपोर्ट बताती है फिलहाल जितना ई-कचरा और प्लास्टिक निकल रहा है उसका केवल 20 प्रतिशत ही री-साइकल हो पाता है। यह स्वास्थ्य और पर्यावरणीय तबाही को बताने के लिए काफी है। गौरतलब है कि 2016 में 4.47 करोड़ टन ई-कचरा दुनियाभर में होता था जो 2021 तक 5.52 करोड़ टन सालाना पहुंच जाएगा।
विज्ञापन
नाइजीरिया में री-साइकल इंडस्ट्री
रिपोर्ट में बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण, मानव स्वास्थ्य की रक्षा, स्थायी और समावेशी विकास के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। नाइजीरिया सरकार, वैश्विक पर्यावरण फैसिलिटी (जीईएफ) और संयुक्त राष्ट्र निजी निवेशकों के साथ मिलकर 15 अरब डॉलर से नाइजीरिया में ई-कचरा री-साइकल इंडस्ट्री की शुरुआत करने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में जीईएफ 2 अरब डॉलर लगाएगा जबकि 13 अरब डॉलर डेल, एचपी, माइक्रोसॉफ्ट तथा फिलिप्स जैसे निजी निवेशक लगाएंगे। इससे नाइजीरिया में एक लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
विज्ञापन
भारत भी शीर्ष पांच देशों में
बीते साल जून में वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम और नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक ई-कचरा पैदा करने वाले शीर्ष पांच देशों में भारत भी है। भारत से ऊपर सूची में चीन, अमेरिका, जापान और जर्मनी हैं। भारत में कुल ई-कचरे का पांच फीसदी ही री-साइकिल होता है।