रूस में संसदीय चुनाव: पुतिन को तगड़ा झटका लगने की संभावना, उनकी पार्टी को मिल सकते हैं मात्र 27 फीसदी वोट
रूस में संसदीय चुनाव के लिए मतदान 17 सितंबर से शुरू होगा और 19 सितंबर तक चलेगा। उन्हीं तीन दिन में रूस के 39 क्षेत्रीय ड्यूमा के चुनाव लिए भी वोट डाले जाएंगे। साथ ही नौ क्षेत्रीय गवर्नरों का निर्वाचन भी होगा। रूस के नेशनल ड्यूमा में 450 सदस्य हैं...
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रूस के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन को करारा झटका लग सकता है। एक चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक उनकी यूनाइटेड रशिया पार्टी को सिर्फ 27 फीसदी वोट मिलने की संभावना है। ऐसा हुआ तो ड्यूमा (रूसी संसद) में पार्टी के लिए निर्णायक बहुमत हासिल करना कठिन हो जाएगा।
रूस में संसदीय चुनाव के लिए मतदान 17 सितंबर से शुरू होगा और 19 सितंबर तक चलेगा। उन्हीं तीन दिन में रूस के 39 क्षेत्रीय ड्यूमा के चुनाव लिए भी वोट डाले जाएंगे। साथ ही नौ क्षेत्रीय गवर्नरों का निर्वाचन भी होगा। रूस के नेशनल ड्यूमा में 450 सदस्य हैं। फिलहाल पुतिन की पार्टी के पास इन 450 में 335 सीटें हैं। रूसी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक इस बार मतदान प्रतिशत कम रहने की संभावना है। लगभग 45 फीसदी वोट ही पड़ने की संभावना जताई गई है। रूस में मतदान आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से होता है।
रूसी मीडिया के मुताबिक राष्ट्रपति पुतिन की कोशिश ड्यूमा के चुनाव में कम से कम 45 फीसदी वोट हासिल करने की है। तभी उनकी पार्टी को इतनी सीटें मिल पाएंगी, जिससे वह संविधान संशोधन करने में सक्षम रहे। लेकिन इस बार ऐसा होने की संभावना बहुत कम है। रशियन पब्लिक ओपिनियन रिसर्च सेंटर के सर्वे से जाहिर हुआ है कि यूनाइटेड रशिया पार्टी इस समय जितनी अलोकप्रिय है, उतनी वह पिछले 13 साल में कभी नहीं हुई थी। इसकी वजह से लोगों में आर्थिक संकट, महंगाई, पिछले वायदे पूरे ना होना, और कोविड-19 महामारी को संभाल पाने में सरकार की नाकामी है। भ्रष्टाचार भी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जिससे सरकार घिरती दिख रही है।
इस सर्वे के मुताबिक 55 फीसदी मतदाताओं ने विपक्षी उम्मीदवारों को वोट देने की इच्छा जताई है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि मतदाता इस बार स्मार्ट वोटिंग स्ट्रेटेजी अपनाने के मूड में हैं। इस रणनीति का सुझाव 2016 में विपक्षी नेता अलेक्सी नवालनी ने दिया था। उसके तहत मतदाताओं से अपील की गई थी कि वे यूनाइटेड रशिया पार्टी के अलावा किसी दूसरी पार्टी के उम्मीदवार को वोट डालें।
जानकारों के मुताबिक 2019 में मास्को के स्थानीय ड्यूमा के चुनाव में मतदाताओं ने इसी रणनीति के तहत मतदान किया था। उसकी वजह से 45 में 20 सीटें विपक्षी दल जीतने में सफल रहे। उनमें से 13 सीटें कम्युनिस्ट पार्टी को मिली थीं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि अगले संसदीय चुनाव में भी कम्युनिस्ट पार्टी को काफी सफलता मिलने की संभावना है।
इससे उदारवादी पार्टियों में बेचैनी देखने को मिल रही है। उदारवादी याबलोको पार्टी की तरफ से पिछली बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ चुके नेता ग्रिगोरी यावलिन्स्की ने स्मार्ट वोटिंग स्ट्रेटेजी का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ यूनाइटेड रशिया को हराने के लिए कम्युनिस्ट और स्टालिनवादी उम्मीदवार का समर्थन एक ‘मूर्खतापूर्ण विचार’ है। उनकी पार्टी के नेता निकोलाई रिबाकोव ने भी एक ट्विट में कहा- ‘मैं नहीं चाहता कि कुछ दलाल और चोरों को हराने के लिए दूसरे समूह के दलाल या चोरों का समर्थन किया जाए।’
पर्यवेक्षकों का कहना है कि विपक्ष में ऐसे आपसी विरोधभाव का फायदा यूनाइटेड रशिया पार्टी को मिल सकता है। इसके अलावा मतदान प्रतिशत बहुत कम रहा, तो इसका लाभ भी उसे मिलेगा। सर्वेक्षणों के मुताबिक यूनाइटेड रशिया के समर्थक मतदाता वोट डालने आने के लिए अधिक कृत संकल्प हैं।