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कोरोना का असर: लॉकडाउन, तनाव और शराब, घातक हो रहा यह कॉकटेल
Sun, 16 May 2021 06:05 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला रिसर्च टीम
अमर उजाला रिसर्च टीम
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 16 May 2021 06:05 AM IST
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सार
- जीआई और लिवर संबंधी रोगियों की संख्या में अचानक से इजाफा
- शराब से जुड़ी जीआई संबंधी तकलीफ के मरीज 59.6 फीसदी बढ़े
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विस्तार
कोरोना महामारी के बीच शराब पीने से होने वाली बीमारियां भी खतरनाक रूप में सामने आने लगी हैं। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एल्कोहल एब्यूज एंड एल्कोहलिज्म (एनआईएएए) का कहना है, लॉकडाउन के कारण घरों में कैद लोग तनाव और मानसिक परेशानियों से निजात के लिए शराब अधिक मात्रा में पी रहे हैं। यही कारण है, महामारी और लॉकडाउन के बीच शराब के कारण गैस्ट्रो और लिवर से जुड़ी तकलीफ वाले मरीज अधिक आ रहे हैं।
प्रमुख शोधकर्ता डॉ. वाईहोंग चुंग का कहना है, शोध के दौरान अस्पतालों में ऑडिट से यह भी पता चला कि लॉकडाउन के दौरान एंडोस्कोपी कराने वाले मरीज बढ़े हैं। इसका मतलब है, शराब के कारण गंभीर तकलीफ वाले मरीजों की संख्या तेजी के साथ बढ़ी है।
टीम ने पाया है, सामान्य जीआई संबंधी तकलीफ वाले मरीजों की दर 27 फीसदी घटी है। वहीं, शराब से जुड़ी जीआई संबंधी तकलीफ वाले मरीजों की संख्या 59.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे अधिक गैस्ट्राइटिस, हेपेटाइटिस, पैन्क्रियाटाइटिस और सिरोसिस जैसे मामले मिल रहे हैं।
शराब से जीआई तकलीफ के लक्षण
डॉ. चुंग ने अध्ययन में शराब के कारण जीआई संबंधी कुछ गंभीर लक्षणों का भी उल्लेख किया है-इसमें व्यक्ति का वजन अचानक बढ़ने लगता है, त्वचा पीली पड़ने लगती है, थकान महसूस होना, भ्रमित रहना, पाचनतंत्र कमजोर हो जाना, मल काला होना, पेट में बहुत तेज असहनीय दर्द। डॉक्टरों का कहना है, अगर किसी व्यक्ति को अचानक ऐसी तकलीफ हो रही है तो बिना देर किए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
लॉकडाउन में शराब वैश्विक समस्या
443 लोगों पर हुए अध्ययन में 73 फीसदी लोगों ने प्रारंभिक लॉकडाउन के दौरान मानसिक शांति के लिए शराब पीने की बात कही। वहीं, 14 फीसदी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन किया। इसी तरह, बेल्जियम, कनाडा और फ्रांस में भी 2871 लोगों पर हुए अध्ययन में पता चला है कि 26.4 फीसदी लोगों ने अधिक मात्रा में शराब पीना शुरू किया था।
ब्रिटेन में 691 लोगों पर हुए अध्ययन के अनुसार, 17 फीसदी लोगों ने अधिक मात्रा में शराब पीना शुरू कर दिया था। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 18 से 34 वर्ष की उम्र वाले लोगों में तकलीफ ज्यादा देखने को मिली है। वैज्ञानिकों का कहना है, लॉकडाउन के दौरान युवाओं में इस तरह की लत भविष्य के लिए खतरा है। आने वाले समय में युवा बीमार होने लगे, तो कई तरह से नुकसान हो सकता है।a