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चिंताजनक: कोरोना के कारण नौकरी गई, अर्थव्यवस्था से लेकर सामान्य जनजीवन तक हुआ बेपटरी
Sat, 28 Aug 2021 05:59 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला रिसर्च टीम, लंदन।
अमर उजाला रिसर्च टीम, लंदन।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 28 Aug 2021 05:59 AM IST
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विस्तार
कोरोना महामारी से दुनिया त्रस्त है। नौकरी, अर्थव्यवस्था से लेकर सामान्य जनजीवन तक बेपटरी हो चुका है। ब्रिटेन के हेल्थ फाउंडेशन द्वारा किए गए सर्वे में पता चला है कि 22 से 26 वर्ष के 86 फीसदी युवा मानते हैं कि कोरोना महामारी के कारण नौकरी और मानसिक स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
युवाओं ने बताया है कि महामारी और लॉकडाउन के कारण अपने कौशल और पढ़ाई से जीवन में जो चाहते थे वो हासिल नहीं कर सके। यही नहीं 86 फीसदी युवा मानते हैं कि सही लोगों से संपर्क न बनने से भी उनका जीवन प्रभावित हुआ। 73 फीसदी का मानना है कि जिनके पास अच्छे संपर्क थे, वो इस दौर में भी नौकरी पा सके।
मानसिक समस्या ने अधिक परेशान किया
सर्वे के अनुसार पांच में से चार युवा (80 फीसदी) मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या से परेशान रहे। दस में से सात युवाओं 69 फीसदी का कहना है कि महामारी से पहले की तुलना में अभी मानसिक स्वास्थ्य लाभ लेना अधिक कठिन है। युवाओं का कहना है कि खराब हालात के बीच इलाज के लिए सोचना ही मुश्किल था।
नौकरी बचाने को लेकर चिंतित
महामारी के कारण अभी भी स्थिति नाजुक बनी हुई है। युवाओं का कहना है कि जिनके पास नौकरी है उसे बचाना मुश्किल हो गया है। 54 फीसदी का ता ये कहना है कि वे मजबूरी में अस्थायी या संविदा पर नौकरी करने को मजबूर हैं। 35 फीसदी का मानना है कि अगले छह महीने में सुरक्षित और अच्छी नौकरी हासिल करना मुश्किल है।
परिवार से पैस लेने में शर्मिंदगी
शोध में शामिल युवाओं में से 76 फीसदी का कहना है कि उन्हें अपना खर्च चलाने के लिए अभिभावकों से पैसा लेना पड़ रहा है। पढ़ाई पूरी होने के बाद महामारी में ये स्थिति हमारे लिए बहुत शर्मनाक है। युवाओं का मानना है कि महामारी के खत्म होने के बाद अच्छी नौकरी पाना भी बेहद मुश्किल होगा।